फ्रैंकफर्ट (जर्मनी): वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी उछाल और ईरान युद्ध के चलते गहराते ईंधन संकट ने विमानन उद्योग की कमर तोड़ दी है। यूरोप की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी लुफ्थांसा एजी (Lufthansa AG) ने एक ऐतिहासिक और चौंकाने वाला फैसला लेते हुए अपने समर शेड्यूल से 20,000 छोटी दूरी की उड़ानें (Short-haul flights) रद्द करने की घोषणा की है। कंपनी का यह कदम सीधे तौर पर आसमान छूती जेट फ्यूल की कीमतों से निपटने की एक बड़ी रणनीति माना जा रहा है।
ईरान युद्ध ने बिगाड़ा खेल, दोगुनी हुईं ईंधन की कीमतें
लुफ्थांसा के इस बड़े फैसले के पीछे सबसे मुख्य कारण ईरान युद्ध के बाद पैदा हुए वैश्विक हालात हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से जेट फ्यूल (Aviation Turbine Fuel) की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग दोगुनी हो गई हैं। विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी एयरलाइन के संचालन खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी 30 से 40 प्रतिशत होती है। ऐसे में कीमतों का दोगुना होना एयरलाइंस के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा था।
40,000 टन ईंधन बचाने का लक्ष्य
एयरलाइन के प्रवक्ता के अनुसार, इन 20,000 उड़ानों में कटौती करने से कंपनी को लगभग 40,000 टन जेट ईंधन बचाने में मदद मिलेगी। हालांकि, इस फैसले से कंपनी की कुल सीट क्षमता में केवल 1 प्रतिशत की ही कमी आएगी, लेकिन लागत नियंत्रण के लिहाज से यह एक बड़ा बदलाव होगा।
लुफ्थांसा केवल उड़ानें ही रद्द नहीं कर रही है, बल्कि उसने अपनी रीजनल यूनिट ‘सिटीलाइन’ को बंद करने और अपने बेड़े से 27 पुराने विमानों को हटाने (Grounding) का भी निर्णय लिया है। ये पुराने विमान आधुनिक विमानों की तुलना में काफी ज्यादा ईंधन की खपत करते थे।
चरणबद्ध तरीके से लागू हो रही कटौती
उड़ानों को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मंगलवार से ही 120 उड़ानों को रद्द कर दिया गया है, जो फिलहाल मई के अंत तक प्रभावी रहेंगी। कंपनी ने संकेत दिए हैं कि गर्मियों के पूरे सीजन (Summer Season) के लिए उड़ानों में और अधिक कटौती की घोषणा अप्रैल के अंत या मई की शुरुआत तक की जा सकती है। इससे उन यात्रियों को असुविधा हो सकती है जिन्होंने गर्मियों की छुट्टियों के लिए पहले से बुकिंग करा रखी है।
वैश्विक विमानन उद्योग पर मंदी का साया
यह समस्या केवल लुफ्थांसा तक सीमित नहीं है। डेटा एनालिटिक्स फर्म सिरियम लिमिटेड (Cirium Ltd.) की रिपोर्ट के अनुसार, मई महीने में वैश्विक स्तर पर उड़ान क्षमता में लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
- अनुमान बनाम हकीकत: पहले इस साल विमानन क्षेत्र में 4 से 6 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया था।
- मौजूदा स्थिति: युद्ध और ईंधन संकट के चलते अब 3 प्रतिशत तक की गिरावट की आशंका जताई जा रही है। दुनिया की लगभग सभी बड़ी एयरलाइंस अपनी लागत बचाने के लिए रूट्स में कटौती कर रही हैं।
लागत कम करने के लिए नौकरियों पर भी कैंची
लुफ्थांसा अपने मुनाफे को बनाए रखने के लिए केवल उड़ानों में ही कटौती नहीं कर रही, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी बड़े बदलाव की तैयारी में है। कंपनी ने योजना बनाई है कि 2030 तक लगभग 4,000 प्रशासनिक नौकरियों को खत्म किया जाएगा।
इसके अलावा, कंपनी अपनी छोटी दूरी की उड़ानों का संचालन अपनी कम लागत वाली इकाइयों जैसे ‘सिटी एयरलाइंस’ और ‘डिस्कवर’ को सौंपने जा रही है। इन इकाइयों में कर्मचारियों का वेतन और अन्य खर्च मुख्य एयरलाइन (Mainline) की तुलना में करीब 40 प्रतिशत तक कम है।
निष्कर्ष
लुफ्थांसा का यह फैसला इस बात का संकेत है कि वैश्विक अस्थिरता और युद्ध का असर अब आम आदमी की यात्रा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर सीधे तौर पर पड़ने लगा है। आने वाले दिनों में उड़ानों की संख्या घटने से हवाई टिकटों की कीमतों में भारी उछाल आने की संभावना है, जो यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डालेगा।
मुख्य हाइलाइट्स:
- कुल रद्दीकरण: 20,000 छोटी दूरी की उड़ानें।
- कारण: जेट फ्यूल की कीमतों में दोगुनी बढ़ोतरी और ईरान युद्ध।
- ईंधन बचत: 40,000 टन जेट ईंधन बचाने की योजना।
- नौकरी में कटौती: 2030 तक 4,000 प्रशासनिक पदों को समाप्त करना।










