नई दिल्ली/चेन्नई:
दक्षिण भारत और विशेषकर तमिलनाडु की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर नेता और तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने देश की राजधानी नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात कर उन्हें अपना आधिकारिक त्यागपत्र सौंप दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के मुताबिक, अन्नामलाई का यह इस्तीफा पांच पन्नों का है, जिसमें उन्होंने पार्टी छोड़ने के कारणों का उल्लेख किया है। इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष भी मौजूद थे।
दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात और इस्तीफे की पूरी कहानी
लंबे समय से चल रही राजनैतिक कयासबाजियों पर विराम लगाते हुए पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई आज मंगलवार को अचानक नई दिल्ली पहुंचे। उन्होंने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात की और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन तथा संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष के साथ एक अहम बैठक की। इस बैठक के तुरंत बाद उन्होंने अपना 5 पन्नों का विस्तृत इस्तीफा सौंपकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी।
सूत्रों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि अन्नामलाई पिछले कुछ समय से तमिलनाडु में पार्टी की कुछ रणनीतियों और सांगठनिक फैसलों से पूरी तरह सहमत नहीं थे। हालांकि, उनके इस्तीफे के मुख्य कारणों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन पांच पन्नों के इस लंबे त्यागपत्र से यह साफ है कि इसके पीछे कई गहरे राजनैतिक और नीतिगत कारण शामिल हैं।
दक्षिण में बीजेपी को लगा बड़ा झटका
गौरतलब है कि कर्नाटक कैडर के पूर्व तेजतर्रार आईपीएस (IPS) अधिकारी के. अन्नामलाई ने खाकी वर्दी छोड़कर राजनीति में कदम रखा था और भाजपा का दामन थामा था। पार्टी ने उनकी आक्रामक कार्यशैली और युवाओं में लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें तमिलनाडु भाजपा की कमान सौंपी थी। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सत्ताधारी दल के खिलाफ कई मोर्चों पर आक्रामक रुख अपनाया, जिससे तमिलनाडु में भाजपा काफी चर्चा में आई थी।
अन्नामलाई का यह इस्तीफा ऐसे समय पर आया है जब भाजपा दक्षिण भारत में अपने पैर पसारने की पुरजोर कोशिशों में जुटी हुई है। तमिलनाडु में पार्टी का मुख्य चेहरा माने जाने वाले नेता का इस तरह अचानक इस्तीफा देना निश्चित रूप से भाजपा के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। अब देखना बेहद दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में अन्नामलाई के इस कदम के बाद तमिलनाडु की द्रविड़ राजनीति क्या नया मोड़ लेती है।











