मुख्य बिंदु:
- कहाँ हुआ हादसा: लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर मटसेना थाना क्षेत्र के माइल स्टोन 46 के समीप।
- समय: गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात करीब 02:00 बजे।
- बड़ा नुकसान: स्टियरिंग में फंसने के कारण चालक शंभू की मौके पर ही दर्दनाक मौत; 24 यात्री घायल, 12 की हालत नाजुक।
- बचाव कार्य: फायर ब्रिगेड की 5 गाड़ियों ने पाया आग पर काबू, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद।
मध्यरात्रि में एक्सप्रेसवे पर मची चीख-पुकार, पलक झपकते ही खाक हुई बस
उत्तर प्रदेश (ब्यूरो): लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर गुरुवार की देर रात एक बार फिर तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला। मटसेना थाना अंतर्गत माइल स्टोन 46 किलोमीटर के पास एक बेहद दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाला सड़क हादसा सामने आया है। कानपुर से सवारियां लेकर गुरुग्राम (गुड़गांव) जा रही एक स्लीपर बस आगे चल रहे एक भारी कंटेनर से बेहद हिंसक तरीके से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस अनियंत्रित होकर पलट गई और देखते ही देखते वह आग के एक धधकते गोले में तब्दील हो गई।
इस दिल दहला देने वाले हादसे में बस के मुख्य चालक, जिसकी पहचान ‘शंभू’ के रूप में हुई है, की केबिन के मलबे और स्टियरिंग के बीच फंस जाने के कारण जिंदा जलकर मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, बस में सवार लगभग 30 यात्रियों में से 24 से अधिक लोग आग की लपटों और धुएं के गुबार के बीच गंभीर रूप से झुलस गए हैं।
चीख-पुकार सुनकर दौड़े स्थानीय लोग, धू-धू कर जलती रही बस
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दुर्घटना रात के करीब दो बजे की है, जब एक्सप्रेसवे पर सन्नाटा पसरा हुआ था और अधिकांश यात्री गहरी नींद में थे। अचानक एक जोरदार धमाका हुआ और यात्रियों की चीख-पुकार से पूरा इलाका गूंज उठा। टक्कर के तुरंत बाद बस के अगले हिस्से में स्पार्किंग हुई और डीजल टैंक फटने की वजह से पूरी बस में आग फैल गई।
स्थानीय ग्रामीणों और एक्सप्रेसवे से गुजर रहे अन्य राहगीरों ने तुरंत साहस दिखाते हुए बस की खिड़कियां तोड़कर अंदर फंसे यात्रियों को बाहर निकालना शुरू किया। हालांकि, आग इतनी तेजी से फैली कि चालक को बचाने का कोई मौका नहीं मिल सका।
दमकल की 5 गाड़ियों ने संभाला मोर्चा, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आपातकालीन सेवाएं तुरंत हरकत में आईं। सूचना मिलते ही मटसेना थाना पुलिस के साथ फायर ब्रिगेड की पांच गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। अग्निशमन दल के जवानों ने बेहद मशक्कत के बाद धधकती हुई आग पर पूरी तरह काबू पाया।
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने तुरंत एम्बुलेंस की मदद से सभी घायलों को नजदीकी जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। चिकित्सा अधिकारियों के मुताबिक, झुलसे हुए दो दर्जन यात्रियों में से करीब 12 यात्रियों की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए आईसीयू (ICU) में शिफ्ट किया गया है।
वरिष्ठ अधिकारियों ने लिया घटनास्थल का जायजा
हादसे की भयावहता को देखते हुए एसपी सिटी रविशंकर प्रसाद, क्षेत्राधिकारी (सीओ) तेजस त्रिपाठी और मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) सत्येंद्र पांडे भारी पुलिस बल के साथ आधी रात को ही मौके पर पहुंच गए। अधिकारियों ने खुद खड़े होकर राहत और बचाव कार्य की निगरानी की। पुलिस ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को एक्सप्रेसवे से हटाकर यातायात को सुचारू रूप से बहाल कराया। इसके बाद मृतक चालक शंभू के शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरने के बाद पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।
हादसे की मुख्य वजह: तेज रफ्तार या झपकी?
पुलिस प्रशासन ने इस पूरे मामले की गहनता से जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच और परिस्थितियों को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि रात के घने अंधेरे में बस की रफ्तार बहुत तेज थी। संभावना जताई जा रही है कि या तो चालक को अचानक झपकी आ गई या फिर आगे चल रहे कंटेनर की गति का सही अनुमान न लगा पाने के कारण यह जोरदार भिड़ंत हुई।
पुलिस अधिकारियों का कहना है:
”प्राथमिक दृष्टि से यह मामला तेज रफ्तार और रात के समय चालक की लापरवाही का प्रतीत होता है। एक्सप्रेसवे के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि दुर्घटना के सही कारणों का पता लगाया जा सके। घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराना हमारी पहली प्राथमिकता है।”
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर एक्सप्रेसवे पर चलने वाले भारी वाहनों की गति सीमा और रात्रि कालीन सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने मृतक चालक के परिजनों को सूचित कर दिया है और मामले की कानूनी कार्रवाई जारी है।








