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गुरुग्राम में पहिये थमे: वेतन वृद्धि की मांग को लेकर 500 ड्राइवर-कंडक्टर हड़ताल पर, 100 से अधिक सिटी बसों का चक्का जाम

On: June 11, 2026 4:44 AM
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​गुरुग्राम।

साइबर सिटी गुरुग्राम की लाइफलाइन मानी जाने वाली सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बृहस्पतिवार सुबह उस वक्त एक बड़ा झटका लगा, जब गुरुग्राम महानगर सिटी बस सेवा (GMCBL) के अंतर्गत काम करने वाले लगभग 500 ड्राइवर और कंडक्टर अचानक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। वेतन में बढ़ोतरी, वर्दी भत्ता और अन्य मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर कर्मचारियों ने ‘चक्का जाम’ कर दिया है।

इस विरोध प्रदर्शन के कारण सेक्टर-52 डिपो से संचालित होने वाली 100 से अधिक बसों के पहिये पूरी तरह थम गए। सुबह के व्यस्त समय में अचानक हुई इस हड़ताल के कारण दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों और आम यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

​सुबह 5 बजे से ही ठप हुआ बसों का संचालन

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन बृहस्पतिवार सुबह ठीक 5 बजे शुरू हुआ, जो कि सिटी बसों के रूट पर निकलने का प्राथमिक समय होता है। सेक्टर-52 बस डिपो से जुड़े सैकड़ों चालक (ड्राइवर्स) और परिचालक (कंडक्टर्स) सुबह डिपो तो पहुँचे, लेकिन उन्होंने बसों को चाबी लगाने या उन्हें डिपो से बाहर निकालने से साफ इनकार कर दिया।


​कर्मचारियों की इस एकजुटता के कारण सुबह की पहली शिफ्ट से ही शहर के प्रमुख रूटों पर बसों का संकट खड़ा हो गया। गुरुग्राम महानगर सिटी बस लिमिटेड (जीएमसीबीएल) के तहत शहर में कुल मिलाकर करीब 150 लो-फ्लोर सीएनजी (CNG) बसें चलती हैं, जो 30 से अधिक निर्धारित रूटों पर यात्रियों को सेवा देती हैं। इस बेड़े का एक बहुत बड़ा हिस्सा अकेले सेक्टर-52 डिपो से नियंत्रित होता है, जिसके बंद होने से पूरी परिवहन कमान चरमरा गई।

हालांकि, राहत की बात यह रही कि शहर के दूसरे प्रमुख डिपो, सेक्टर-10 से बसों का संचालन सामान्य रूप से जारी रहा, लेकिन पूरे शहर की मांग को पूरा करने के लिए यह बेहद नाकाफी साबित हुआ।

​मांगों को लेकर डिपो परिसर में जमकर नारेबाजी

​हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों ने किसी भी रूट पर बस ले जाने के बजाय डिपो के भीतर ही धरना दे दिया। कर्मचारियों का आरोप है कि वे लंबे समय से बेहद कम वेतन पर काम कर रहे हैं, जिससे इस महंगाई के दौर में घर चलाना मुश्किल हो रहा है।

​कर्मचारियों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  • ​समान और सम्मानजनक वेतन: लंबे समय से लंबित वेतन वृद्धि (Salary Hike) को तुरंत लागू किया जाए।
  • ​वर्दी और भत्ता: चालकों और परिचालकों को आधिकारिक वर्दी उपलब्ध कराई जाए या इसके एवज में उचित वर्दी भत्ता दिया जाए।
  • ​मूलभूत सुविधाएं: ड्यूटी के दौरान डिपो और टर्मिनलों पर जरूरी सुविधाएं व सुरक्षा सुनिश्चित हो।

​प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने अपनी इन समस्याओं और मांगों को लेकर कई बार उच्च अधिकारियों को लिखित में अवगत कराया था। प्रशासन द्वारा बार-बार केवल आश्वासन दिए जाने और कोई ठोस कदम न उठाए जाने के विरोध में ही उन्हें अंततः यह सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। उनका साफ़ कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर कोई लिखित और सकारात्मक फैसला नहीं होता, उनका आंदोलन और चक्का जाम इसी तरह जारी रहेगा।

​बस स्टैंड्स पर मची अफरा-तफरी, यात्रियों की जेब पर पड़ा अतिरिक्त बोझ

​इस अचानक हुई हड़ताल का सबसे गंभीर असर उन कामकाजी लोगों पर पड़ा जो रोजाना सुबह अपने दफ्तरों, फैक्ट्रियों या कॉलेजों के लिए सिटी बसों पर निर्भर रहते हैं। शहर के प्रमुख बस स्टॉप्स, जैसे राजीव चौक, इफ्को चौक, हुडा सिटी सेंटर और सोहना रोड पर यात्रियों की भारी भीड़ जमा हो गई। लोग घंटों तक बसों का इंतजार करते देखे गए, लेकिन बसें न आने के कारण स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही थी।


​सस्ती और सुलभ सरकारी बस सेवा बंद होने का फायदा निजी ऑटो, ई-रिक्शा और कैब चालकों ने जमकर उठाया। यात्रियों को मजबूरी में अपने गंतव्य तक पहुँचने के लिए सामान्य से दोगुना या तिगुना किराया देना पड़ा। कई यात्रियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रशासन को ऐसी आपात स्थिति से निपटने के लिए पहले से कोई वैकल्पिक व्यवस्था रखनी चाहिए थी, क्योंकि अचानक बसें बंद होने से न केवल उनकी दिनचर्या प्रभावित हुई, बल्कि उनकी जेब पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है।

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​प्रशासन की तरफ से समाधान के प्रयास तेज

​शहर की रफ्तार थमने और यात्रियों की बढ़ती परेशानियों को देखते हुए जीएमसीबीएल (GMCBL) और परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों में हड़कंप मच गया। दोपहर होते-होते अधिकारियों की एक टीम प्रदर्शनकारी कर्मचारियों के प्रतिनिधियों से बातचीत करने के लिए सेक्टर-52 डिपो पहुँची।

​प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों की मांगें उनके संज्ञान में हैं और विभाग के उच्च स्तर पर इस संबंध में विचार-विमर्श किया जा रहा है। अधिकारियों ने कर्मचारियों से अपील की है कि वे आम जनता की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए तुरंत काम पर लौटें और बातचीत के माध्यम से बीच का रास्ता निकालें।

हालांकि, खबर लिखे जाने तक दोनों पक्षों के बीच किसी अंतिम समझौते पर सहमति नहीं बन पाई थी और गतिरोध बरकरार था। फिलहाल, शहर के हजारों यात्री अब भी इस उम्मीद में हैं कि यह विवाद जल्द सुलझे ताकि शुक्रवार सुबह से उन्हें सफर करने में कोई परेशानी न हो।

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