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विशाखापत्तनम स्टील प्लांट में भीषण औद्योगिक त्रासदी: धधकती भट्टी से पिघला हुआ लोहा लीक होने से 8 मजदूरों की दर्दनाक मौत, कई झुलसे; मची अफरा-तफरी

On: June 8, 2026 1:28 PM
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​विशाखापत्तनम। आंध्र प्रदेश के औद्योगिक तटीय शहर विशाखापत्तनम से एक बेहद दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाली बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ स्थित विशाखापत्तनम स्टील प्लांट (Visakhapatnam Steel Plant) में रविवार को एक भीषण औद्योगिक हादसा हो गया, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। प्लांट की बेहद संवेदनशील मानी जाने वाली एसएमएस-2 (SMS-2) और एसटीसी-3 (STC-3) हीट फैसिलिटी में काम के दौरान भारी मात्रा में खौलता और पिघला हुआ स्टील अचानक लीक हो गया।

इस भयावह हादसे की चपेट में आने से आठ स्थानीय मजदूरों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य कर्मचारी गंभीर रूप से झुलस गए हैं। घायलों में कुछ की हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है। घटना के बाद से ही पूरे स्टील प्लांट परिसर में कोहराम और अफरा-तफरी का माहौल व्याप्त है।


​लैडल फटने से हुआ धमाका, बहने लगी मौत की नदी


​मिली जानकारी के अनुसार, यह दिल दहला देने वाली घटना उस समय हुई जब प्लांट के भीतर बेहद उच्च तापमान पर पिघले हुए लोहे (लिक्विड स्टील) को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने की प्रक्रिया चल रही थी। विशाखापत्तनम स्टील प्लांट के सर्कल इंस्पेक्टर केशव राव ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि भट्टी के पास पिघले हुए स्टील को ढोने वाली एक विशालकाय ‘लैडल’ (धातु का बड़ा बर्तन/कंटेनर) अत्यधिक दबाव और तापमान के कारण अचानक फट गई।
​लैडल के फटते ही हजारों डिग्री सेल्सियस तापमान पर उबल रहा लिक्विड स्टील तेज धमाके के साथ चारों तरफ फैल गया। स्टील प्लांट के भीतर काम कर रहे मजदूरों को संभलने का एक पल भी मौका नहीं मिला। देखते ही देखते चारों तरफ आग की लपटें और खौलता हुआ लावा फैल गया, जिसकी चपेट में आकर आठ कामगारों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

​जान बचाने को भागे मजदूर, प्लांट बना युद्ध का मैदान

​हादसे के वक्त फैसिलिटी के भीतर दर्जनों मजदूर अपनी ड्यूटी पर तैनात थे। धमाके और पिघले हुए स्टील के रिसाव के बाद पूरे कारखाने में चीख-पुकार मच गई। खौलते हुए मलबे और धुएं के गुबार के बीच मजदूर अपनी जान बचाने के लिए बदहवास होकर इधर-उधर भागने लगे। घटना की सूचना मिलते ही स्टील प्लांट के सुरक्षा कर्मी, तकनीकी विशेषज्ञ और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंचीं।

​फायर फाइटर्स ने भारी मशक्कत के बाद धधकती आग और अत्यधिक तापमान पर काबू पाने की कोशिशें शुरू कीं। विशेष उपकरणों की मदद से मलबे को हटाने और फंसे हुए कर्मचारियों को बाहर निकालने के लिए युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि तापमान इतना अधिक था कि बचाव दल को भी शुरुआती मिनटों में अंदर दाखिल होने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।


​गृह मंत्री वंगलापुडी अनिता ने संभाला मोर्चा, अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश

​विशाखापत्तनम स्टील प्लांट में हुई इस बड़ी औद्योगिक त्रासदी पर राज्य सरकार ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए तुरंत कड़े कदम उठाए हैं। आंध्र प्रदेश की गृह मंत्री वंगलापुडी अनीता ने घटना की जानकारी मिलते ही तुरंत एक्शन लिया। उन्होंने विशाखापत्तनम के जिला कलेक्टर और शहर के पुलिस कमिश्नर से फोन पर आपातकालीन वार्ता की और दुर्घटना के कारणों व राहत कार्यों की विस्तृत समीक्षा की।


​गृह मंत्री ने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि हादसे में झुलसे सभी मजदूरों को बिना किसी देरी के शहर के सर्वश्रेष्ठ सुपर-स्पेशलिटी अस्पतालों में भर्ती कराया जाए और उनके इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राहत कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
​हादसे की खबर मिलते ही घटनास्थल के लिए रवाना हुईं मंत्री

​घटना की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्री वंगलापुडी अनीता अपने सभी पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों को रद्द कर तुरंत विशाखापत्तनम में दुर्घटना स्थल के लिए रवाना हो गईं। वे रास्ते से ही लगातार जिले के उच्चाधिकारियों और डॉक्टरों की टीम से संपर्क बनाए हुए हैं ताकि पल-पल की रिपोर्ट ली जा सके। सरकार ने इस मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराने के संकेत दिए हैं ताकि यह साफ हो सके कि इतनी बड़ी लापरवाही और तकनीकी खामी कैसे हुई।

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​औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर फिर खड़े हुए गंभीर सवाल

​विशाखापत्तनम के इस नामी स्टील प्लांट में पहले भी छोटे-बड़े हादसे होते रहे हैं, लेकिन इस ताजा तरीन घटना ने कारखाने के भीतर मजदूरों की सुरक्षा और मेंटेनेंस (रखरखाव) के दावों की पोल खोल कर रख दी है। मजदूर संगठनों ने प्रबंधन पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए भारी आक्रोश व्यक्त किया है। उनका कहना है कि अगर लैडल की समय पर जांच और मेंटेनेंस की गई होती, तो आठ बेकसूर मजदूरों को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ती।

​फिलहाल, पुलिस और जिला प्रशासन की प्राथमिकता आग पर पूरी तरह काबू पाने, घायलों की जान बचाने और कारखाने के भीतर फंसे संभावित अन्य कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकालने की है। इस दर्दनाक हादसे के बाद से ही मृत मजदूरों के परिवारों में कोहराम मचा हुआ है और पूरे औद्योगिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

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