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नंदा राजजात यात्रा 2026: श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी, यात्रा मार्ग को चमकाने के लिए करोड़ों की योजना मंजूर; जानें पूरा रूट और डिटेल

On: June 11, 2026 9:22 AM
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​गोपेश्वर (चमोली):

उत्तराखंड की देवभूमि में आस्था और संस्कृति के सबसे बड़े महाकुंभ यानी ‘नंदा राजजात यात्रा-2026’ को लेकर एक बहुत बड़ा अपडेट सामने आया है। विश्व की सबसे कठिन और लंबी पैदल धार्मिक यात्राओं में शुमार इस यात्रा को भव्य, सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है।

इसी कड़ी में यात्रा मार्ग पर बुनियादी ढांचा सुधारने के लिए करोड़ों रुपये की एक महत्वाकांक्षी योजना को हरी झंडी मिल गई है। इस बार दुर्गम और पथरीले रास्तों पर चलने वाले श्रद्धालुओं को अंधेरे का सामना नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि पूरी यात्रा को पर्यावरण-अनुकूल सोलर लाइटों से जगमगाया जाएगा।

​करोड़ों का बजट स्वीकृत: सोलर लाइटों से रोशन होंगे दुर्गम रास्ते

​नंदा राजजात यात्रा 2026 के कठिन रास्तों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड सरकार और स्थानीय प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। इस बार यात्रा मार्ग पर व्यापक सोलर प्रकाश व्यवस्था (Solar Lighting System) विकसित की जाएगी। इस पूरी योजना के लिए 2 करोड़ 25 लाख 79 हजार 832 रुपये की भारी-भरकम राशि को मंजूरी दी गई है।


​चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार के नेतृत्व में तैयारियों को रफ्तार देते हुए उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (उरेडा) ने इस प्रोजेक्ट को फाइनल अप्रूवल दे दिया है। सबसे राहत की बात यह है कि उरेडा द्वारा इस कार्य के लिए पूरी धनराशि चमोली जनपद को ट्रांसफर (अवमुक्त) भी कर दी गई है, जिससे जमीनी स्तर पर काम जल्द शुरू हो सके।

​कहाँ और कैसे खर्च होगा बजट? जानिए पूरा गणित

​इस ढाई करोड़ के बजट को यात्रा मार्ग की भौगोलिक स्थिति के हिसाब से दो अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है:

  • ​Solar Street Lights: यात्रा के मुख्य पैदल रास्तों और पड़ावों पर रोशनी के लिए कुल 792 सोलर स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएंगी। इस कार्य पर कुल 1 करोड़ 52 लाख 42 हजार 832 रुपये खर्च होंगे।
  • ​Solar Highmast Lights: यात्रा के मुख्य पड़ावों, बेस कैंपों और जहां श्रद्धालु रात्रि विश्राम करते हैं, उन बड़े मैदानों के लिए 50 सोलर हाईमास्ट लाइटें (ऊंचे खंभों वाली बड़ी लाइटें) स्थापित की जाएंगी। इसके लिए 73 लाख 37 हजार रुपये का बजट तय किया गया है।

​रात का सफर होगा आसान, जंगली जानवरों का खतरा होगा कम

​नंदा राजजात यात्रा का मार्ग हिमालय के अत्यंत दुर्गम, घने जंगलों और संकरे पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरता है। कई बार मौसम खराब होने या शाम ढलने के बाद श्रद्धालुओं के लिए चलना बेहद जोखिम भरा हो जाता था। पथरीले रास्तों पर पैर फिसलने और जंगली जानवरों का डर हमेशा बना रहता था।


​जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि इस सोलर लाइट परियोजना के पूरा होने से रात्रिकालीन आवागमन (Night Movement) पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा। सुदूर और बेहद ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में पर्याप्त रोशनी होने से देश-видеश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को बहुत बड़ी राहत मिलेगी।

​इको-फ्रेंडली (Eco-Friendly) होगी इस बार की यात्रा

​यह कदम न सिर्फ यात्रियों की सहूलियत के लिए है, बल्कि यह हिमालय के संवेदनशील पर्यावरण को बचाने की दिशा में भी एक बेहतरीन पहल है। उरेडा के माध्यम से सौर ऊर्जा का उपयोग करके प्रशासन ‘हरित ऊर्जा’ (Green Energy) को बढ़ावा दे रहा है। चूंकि इन दुर्गम इलाकों में पारंपरिक बिजली की लाइनें बिछाना और उनकी मेंटेनेंस करना बेहद मुश्किल है, ऐसे में सोलर पैनल और लाइटें सबसे टिकाऊ (Sustainable) विकल्प साबित होंगी। इससे नंदा राजजात यात्रा को एक आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल स्वरूप मिलेगा।

​क्वालिटी पर रहेगा कड़ा पहरा: होगा थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन

​इतने बड़े बजट और संवेदनशील क्षेत्र को देखते हुए प्रशासन काम की गुणवत्ता (Quality) को लेकर बेहद गंभीर है। स्वीकृत योजना के तहत केवल उन्हीं जगहों पर लाइटें लगेंगी जो तकनीकी रूप से चिह्नित की गई हैं। काम में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो, इसके लिए नियमित सरकारी निरीक्षण तो होगा ही, साथ ही ‘तृतीय पक्ष परीक्षण’ (Third Party Inspection) की व्यवस्था भी अनिवार्य की गई है। यानी कोई स्वतंत्र एजेंसी आकर काम की क्वालिटी की जांच करेगी।

​क्या है नंदा राजजात यात्रा का महत्व?

​नंदा राजजात यात्रा को ‘हिमालय का महाकुंभ’ कहा जाता है। यह यात्रा हर 12 वर्ष (या विशेष परिस्थितियों में) के अंतराल पर आयोजित होती है, जिसमें मां नंदा (पार्वती) को उनके मायके (इड़वापनी/नोटी) से विदा कर उनके ससुराल (कैलाश/होमकुंड) भेजा जाता है।

चमोली के नोटी गांव से शुरू होकर लगभग 280 किलोमीटर की यह पैदल यात्रा बेहद कठिन मानी जाती है, जो चौदह सींगों वाले खाडू (मेढ़े) की अगुवाई में आगे बढ़ती है। वैतरणी, रूपकुंड और होमकुंड जैसे पड़ावों से गुजरने वाली इस यात्रा में शामिल होना हर सनातनी और उत्तराखंडी के लिए परम सौभाग्य की बात मानी जाती है।

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​निष्कर्ष

​2026 में होने वाली इस ऐतिहासिक यात्रा के लिए उत्तराखंड सरकार का यह शुरुआती कदम सराहनीय है। करोड़ों रुपये की इस सौर ऊर्जा योजना से न केवल यात्रियों का सफर आसान होगा, बल्कि चमोली के सीमांत और पिछड़े गांवों तक भी विकास की रोशनी पहुंचेगी। प्रशासन का दावा है कि आने वाले समय में अन्य मूलभूत सुविधाओं (जैसे पेयजल, स्वास्थ्य और रास्ते) को लेकर भी ऐसे ही बड़े अपडेट देखने को मिलेंगे।

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