पश्चिमी सिंहभूम (झारखंड): झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले स्थित एशिया के सबसे घने जंगलों में शुमार सारंडा एक बार फिर गोलियों की तड़तड़ाहट और धमाकों से दहल उठा है। बुधवार को सुरक्षाबलों और प्रतिबंधित माओवादी संगठन के बीच हुई एक भीषण मुठभेड़ में कोबरा (CoBRA) 205 बटालियन के एक इंस्पेक्टर समेत पांच जवान गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायल जवानों की स्थिति को देखते हुए उन्हें तत्काल एयरलिफ्ट कर बेहतर इलाज के लिए रांची भेजा गया है।
सुबह 10 बजे से शुरू हुआ खूनी संघर्ष
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुरक्षाबलों को खुफिया सूचना मिली थी कि सारंडा के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में माओवादियों का एक बड़ा दस्ता सक्रिय है। इसी सूचना के आधार पर जिला पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की कोबरा बटालियन ने संयुक्त रूप से सर्च ऑपरेशन शुरू किया था।
बुधवार सुबह करीब 10 बजे, जब सुरक्षाबल छोटानागरा और जराईकेला थाना क्षेत्र की सीमा पर स्थित बालिबा गांव से लगभग दो किलोमीटर दूर बाबुडेरा, दलाइडेरा और चडराडेरा के पहाड़ी इलाकों में पहुंचे, तो घात लगाकर बैठे माओवादियों ने उन पर हमला कर दिया। इसके बाद दोनों ओर से भीषण गोलीबारी शुरू हो गई, जो रुक-रुक कर दोपहर 2 बजे तक जारी रही।
IED विस्फोट और गोलीबारी की चपेट में आए जवान
मुठभेड़ के दौरान माओवादियों ने सुरक्षाबलों को क्षति पहुँचाने के लिए IED (Improvised Explosive Device) का भी सहारा लिया। इसी विस्फोट की चपेट में आने से कोबरा बटालियन के इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनके कमर में गंभीर चोटें आई हैं।
अन्य घायल जवानों का विवरण इस प्रकार है:
- जवान शैलेश कुमार दुबे: गर्दन में गोली लगने से घायल।
- उत्तम कुमार सेनापति: हाथ में गोली लगी।
- जितेंद्र राय: पैर में गोली लगने से जख्मी।
- प्रेम कुमार: मुठभेड़ के दौरान अन्य चोटों के कारण घायल।
रेस्क्यू ऑपरेशन और एयरलिफ्ट
जंगलों के भीतर भौगोलिक परिस्थितियों और घायलों की स्थिति को देखते हुए झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ के आला अधिकारियों ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन का आदेश दिया। शाम करीब 5:15 बजे, बालिबा गांव के पास बनाए गए अस्थाई हेलीपैड से इंस्पेक्टर सहित चार गंभीर रूप से घायल जवानों को एयरलिफ्ट किया गया और रांची के अस्पताल में भर्ती कराया गया। एक अन्य घायल जवान का स्थानीय स्तर पर प्राथमिक उपचार किया जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, घायलों में से एक की स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है।
माओवादियों को भी भारी नुकसान की संभावना
पुलिस अधीक्षक (SP) अमित रेणु ने इस मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया कि सुरक्षाबलों की ओर से की गई जवाबी कार्रवाई में माओवादियों को भी भारी नुकसान पहुँचा है। हालांकि, घने जंगल और पहाड़ियों का फायदा उठाकर माओवादी अपने घायल साथियों को लेकर भागने में सफल रहे। फिलहाल मौके से किसी शव या हथियार की बरामदगी नहीं हुई है, लेकिन खून के धब्बों और सुरक्षाबलों के आकलन के अनुसार कई नक्सलियों को गोलियां लगी हैं।
’ऑपरेशन सारंडा’ रहेगा जारी
इस घटना के बाद सारंडा और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद सख्त कर दिया गया है। चप्पे-चप्पे पर जवानों की तैनाती बढ़ा दी गई है और अतिरिक्त कुमुक (Reinforcement) को भी जंगल के भीतर भेजा गया है।
एसपी अमित रेणु का बयान:
“हमारा माओवादी विरोधी अभियान किसी भी सूरत में नहीं रुकेगा। सारंडा के विभिन्न क्षेत्रों से उग्रवाद के खात्मे के लिए जिला पुलिस और सुरक्षा बल पूरी दृढ़ता के साथ डटे हुए हैं। जब तक इलाके को पूरी तरह सुरक्षित नहीं कर लिया जाता, सर्च ऑपरेशन जारी रहेगा।”
सारंडा: उग्रवाद का पुराना गढ़
सारंडा का जंगल अपनी सघनता के कारण दशकों से नक्सलियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह रहा है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षाबलों ने ‘ऑपरेशन डबल बुल’ और ‘ऑपरेशन ऑक्टोपस’ जैसे अभियानों के जरिए इनके नेटवर्क को ध्वस्त किया है, लेकिन बुधवार की इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इलाके में अभी भी उग्रवादी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रहे हैं।
फिलहाल, पूरे पश्चिमी सिंहभूम जिले में हाई अलर्ट जारी है और पड़ोसी राज्यों (ओडिशा) की सीमाओं को भी सील कर दिया गया है ताकि उग्रवादी सीमा पार न कर सकें। प्रशासन का पूरा ध्यान घायल जवानों के समुचित इलाज और जंगल में छिपे नक्सलियों की धर-पकड़ पर केंद्रित है।









