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महंगाई का चौका: 10 दिनों में तीसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम; जानें आपके शहर में क्या हैं नई दरें

On: May 23, 2026 9:40 AM
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पेट्रोल पंप पर बाइक में ईंधन भरवाता चिंतित युवक और पेट्रोल-डीजल की बढ़ी हुई कीमतों का बोर्ड

​नई दिल्ली। देश में आम जनता की जेब पर एक बार फिर महंगाई का तगड़ा प्रहार हुआ है। घरेलू तेल कंपनियों ने एक बार फिर ईंधन की कीमतों में बड़ा इजाफा कर दिया है। दिल्ली के ईंधन डीलरों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित पूरे देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
​ताजा संशोधन के तहत, पेट्रोल की कीमतों में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। बढ़ती महंगाई से जूझ रही जनता के लिए यह लगातार लगने वाला तीसरा बड़ा झटका है, जिससे आने वाले दिनों में आम आदमी का बजट पूरी तरह से बिगड़ने की आशंका है।

​10 दिनों के भीतर तीसरी बड़ी बढ़ोतरी

​आम उपभोक्ताओं के लिए सबसे चिंताजनक बात यह है कि ईंधन की कीमतों में यह बढ़ोतरी कोई इकलौती घटना नहीं है। पिछले महज 10 दिनों के भीतर यह तीसरी बार है जब पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए गए हैं।

  • ​पहला झटका: इस सिलसिले की शुरुआत कुछ दिन पहले हुई थी, जब तेल कंपनियों ने एकमुश्त 3 रुपये प्रति लीटर की भारी-भरकम बढ़ोतरी की थी।
  • ​दूसरा झटका: इस सप्ताह की शुरुआत में ही जनता संभल भी नहीं पाई थी कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 90 पैसे प्रति लीटर का एक और इजाफा कर दिया गया।
  • ​तीसरा झटका: अब एक बार फिर पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे महंगा हो गया है।

​इस तरह देखा जाए तो पिछले दो हफ्तों से भी कम समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में करीब 5 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो चुकी है, जिसने मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों की कमर तोड़कर रख दी है।

​आज सुबह 6 बजे से लागू हुईं नई दरें

​तेल कंपनियों के अनुसार, ईंधन की ये संशोधित दरें आज सुबह 6 बजे से पूरे देश में प्रभावी कर दी गई हैं। हालांकि, देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें एक समान नहीं होंगी। पेट्रोलियम डीलरों का कहना है कि विभिन्न राज्यों में लागू होने वाले स्थानीय वैट (Value Added Tax) और माल ढुलाई शुल्क (Freight Charges) के कारण हर शहर में अंतिम कीमतें अलग-अलग हो सकती हैं। जिन राज्यों में वैट की दरें ऊंची हैं, वहां उपभोक्ताओं पर इसका असर और भी ज्यादा देखने को मिलेगा।

​क्यों लगी ईंधन की कीमतों में आग?

​इस अचानक आई तेजी के पीछे तेल कंपनियों और बाजार विशेषज्ञों ने अंतरराष्ट्रीय कारणों को जिम्मेदार ठहराया है। ईंधन डीलरों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति में आ रही बाधाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

​इसके साथ ही, भारतीय तेल विपणन कंपनियों (IOC, HPCL, BPCL) की रिफाइनिंग और परिवहन लागत में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। लंबे समय तक कीमतों को स्थिर रखने के बाद, कंपनियां अब अपने घाटे की भरपाई के लिए इस बढ़े हुए बोझ को धीरे-धीरे उपभोक्ताओं पर डाल रही हैं।

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​चौतरफा महंगाई की आशंका: रोजमर्रा की चीजें होंगी महंगी

​डीजल की कीमतों में 91 पैसे की इस ताजा बढ़ोतरी का सीधा और सबसे बड़ा असर देश की लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन इंडस्ट्री पर पड़ने वाला है। डीजल महंगा होने से ट्रकों और मालवाहक वाहनों का परिचालन खर्च तुरंत बढ़ जाएगा।

​व्यापारिक संगठनों का अनुमान है कि माल ढुलाई (Freight Rates) महंगी होने के कारण आने वाले दिनों में रोजमर्रा की जरूरी चीजों के दाम बढ़ना तय है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • ​फल और सब्जियां: ग्रामीण इलाकों से शहरों तक मंडियों में आने वाली सब्जियों का ट्रांसपोर्टेशन खर्च बढ़ेगा।
  • ​दूध और राशन: पैकेज्ड फूड, अनाज और दूध की सप्लाई करने वाले वाहनों का खर्च बढ़ने से इनके खुदरा दामों में तेजी आ सकती है।
  • ​कंज्यूमर गुड्स: फैक्ट्रियों से निकलने वाला तैयार माल अब डीलरों तक पहुंचना महंगा हो जाएगा।

​आम जनता में भारी असंतोष

​इस लगातार हो रही मूल्यवृद्धि के कारण देश के नागरिकों में भारी निराशा और असंतोष का माहौल है। दिल्ली में एक पेट्रोल पंप पर आए उपभोक्ता ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “हर दो-तीन दिन में दाम बढ़ा दिए जाते हैं। सैलरी वैसी ही है, लेकिन दफ्तर आने-जाने का खर्च दोगुना होता जा रहा है। सरकार को इस पर टैक्स कम करके राहत देनी चाहिए।”
​आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह अनियंत्रित रहीं, तो आने वाले दिनों में तेल कंपनियां कुछ और किश्तों में दाम बढ़ा सकती हैं। फिलहाल जनता की नजरें सरकार पर टिकी हैं कि क्या केंद्र या राज्य सरकारें टैक्स (एक्साइज ड्यूटी या वैट) में कटौती करके आम आदमी को इस ‘तेल के खेल’ से थोड़ी राहत देती हैं या नहीं।

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