नई दिल्ली:
देश की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करने वाले ‘अप्राकृतिक जनसांख्यिकीय परिवर्तन’ (Demographic Change) और अवैध घुसपैठ से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश में अवैध प्रवासियों के कारण हो रहे जनसांख्यिकीय असंतुलन का सुनियोजित समाधान खोजने के लिए एक ‘उच्च-स्तरीय समिति’ (High-Level Committee on Demographic Change) के गठन की आधिकारिक घोषणा की है।
हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"
इस बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण समिति की कमान सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश, जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर (सेवानिवृत्त) को सौंपी गई है। गृह मंत्री ने साफ तौर पर कहा कि अवैध घुसपैठ और इसके कारण आबादी के स्वरूप में आ रहा अप्राकृतिक बदलाव किसी भी राष्ट्र के वर्तमान और भविष्य के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है, जिससे कड़ाई से निपटना जरूरी है।
स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ
पीएम मोदी के ‘डेमोग्राफिक मिशन’ का ब्लूप्रिंट
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समिति के गठन की जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस ऐतिहासिक कदम की नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल ही रख दी थी। दरअसल, 15 अगस्त 2025 को 79वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने अवैध प्रवासियों से देश को होने वाले खतरों के प्रति सचेत किया था।
पीएम मोदी ने तब अपने संबोधन में एक ‘उच्च-शक्ति वाले जनसांख्यिकी मिशन’ (Demographic Mission) की घोषणा की थी। सरकार ने अब उसी घोषणा को अमलीजामा पहनाते हुए इस हाई-लेवल कमेटी को अधिसूचित कर दिया है, जो देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा के लिए एक विस्तृत नीति तैयार करेगी।
कमेटी में शामिल हैं देश के दिग्गज विशेषज्ञ
इस उच्च-स्तरीय समिति को बेहद मजबूत और प्रशासनिक रूप से सक्षम बनाने के लिए इसमें कानून, प्रशासन, सुरक्षा और अर्थशास्त्र के क्षेत्र से जुड़े देश के शीर्ष विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। समिति का ढांचा इस प्रकार है:
- अध्यक्ष: जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर (सेवानिवृत्त न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय)
- सदस्य: भारत के वर्तमान जनगणना आयुक्त (Registrar General & Census Commissioner)
- सदस्य: श्री दुर्गा शंकर मिश्रा (सेवानिवृत्त IAS अधिकारी और पूर्व मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश)
- सदस्य: श्री बालाजी श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त IPS अधिकारी और पूर्व पुलिस कमिश्नर/डीजी)
- सदस्य: डॉ. शमिका रवि (प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और सदस्य, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद)
- सदस्य सचिव: केंद्रीय गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (Foreigners-I) इस समिति के सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे।
यह विविधता इस बात का संकेत है कि कमेटी न केवल कानूनी और सुरक्षा के दृष्टिकोण से, बल्कि सामाजिक-आर्थिक और प्रशासनिक स्तर पर भी इस समस्या का बारीकी से अध्ययन करेगी।
क्या होगा इस हाई-लेवल कमेटी का मुख्य काम?
गृह मंत्रालय के अनुसार, यह कमेटी भारत के विभिन्न राज्यों और सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध प्रवासियों के कारण हो रहे जनसांख्यिकीय असंतुलन का एक व्यापक और वैज्ञानिक मूल्यांकन करेगी। कमेटी के मुख्य कार्य निम्नलिखित होंगे:
- पैटर्न का विश्लेषण: समिति देश के अलग-अलग हिस्सों में धार्मिक और सामाजिक समुदायों के स्तर पर हो रहे असामान्य जनसंख्या परिवर्तनों और उनके पैटर्न्स का गहराई से विश्लेषण करेगी।
- राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव: अवैध प्रवास के कारण स्थानीय कानून-व्यवस्था, सामाजिक संरचना और आंतरिक सुरक्षा पर पड़ रहे गंभीर प्रभावों की समीक्षा करना।
- जनजातीय समाज का संरक्षण: पूर्वोत्तर राज्यों और झारखंड, छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी बहुल इलाकों में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करना, ताकि जनजातीय समाज की संस्कृति और अधिकारों को बचाया जा सके।
- समयबद्ध समाधान: समिति इन सभी चुनौतियों का एक सुनियोजित, व्यावहारिक और समयबद्ध (Time-bound) समाधान तैयार कर केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
लाल किले से पीएम मोदी ने दी थी सख्त चेतावनी
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बेहद कड़े शब्दों में इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने देश के नागरिकों को आगाह करते हुए कहा था, “एक सोची-समझी साजिश के तहत देश की जनसांख्यिकी को बदला जा रहा है, और एक नए संकट के बीज बोए जा रहे हैं। ये घुसपैठिए मेरे देश के युवाओं की रोजी-रोटी छीन रहे हैं। वे हमारी बहनों और बेटियों को निशाना बना रहे हैं। वे आदिवासियों को गुमराह कर रहे हैं और उनकी जमीनें हड़प रहे हैं। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
प्रधानमंत्री की इसी चिंता और संकल्प को पूरा करने के लिए अब केंद्रीय गृह मंत्रालय इस मिशन मोड पर आगे बढ़ रहा है। माना जा रहा है कि इस समिति की सिफारिशों के आधार पर भविष्य में घुसपैठ रोकने और प्रवासियों की पहचान करने के लिए कानून को और अधिक सख्त किया जा सकता है।











