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महंगाई का सोमवार: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर भारी उछाल, दिल्ली में ₹102 और कोलकाता में ₹113 के पार पहुंचा दाम

On: May 25, 2026 8:50 AM
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​नई दिल्ली:

आम जनता के लिए सप्ताह की शुरुआत एक बार फिर महंगाई के बड़े झटके के साथ हुई है। सोमवार सुबह देश की तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी। इस ताजा संशोधन के बाद पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर का इजाफा दर्ज किया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि बीते दो सप्ताह के भीतर ईंधन की कीमतों में यह चौथी बड़ी बढ़ोतरी है। लगातार बढ़ते दामों के कारण अब घरेलू बजट बिगड़ने और माल ढुलाई महंगी होने से चौतरफा महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई है।


​दो हफ्तों में चौथी बढ़ोतरी: महानगरों में क्या हैं नए दाम?
​ताजा बढ़ोतरी के बाद देश की राजधानी दिल्ली समेत तमाम बड़े महानगरों में ईंधन के दाम आसमान छूने लगे हैं। दिल्ली में अब एक लीटर पेट्रोल के लिए 102.12 रुपये और डीजल के लिए 95.20 रुपये चुकाने होंगे।


​प्रमुख शहरों में पेट्रोल की नई कीमतें (रुपये प्रति लीटर)

  • ​कोलकाता: ₹113.51
  • ​पटना: ₹113.5
  • ​जयपुर: ₹113.4
  • ​मुंबई: ₹111.21
  • ​बेंगलुरु: ₹110.6
  • ​भुवनेश्वर: ₹108.8
  • ​नोएडा / लखनऊ: ₹101.9
  • ​चंडीगढ़: ₹101.5

​प्रमुख शहरों में डीजल की नई कीमतें (रुपये प्रति लीटर)

  • ​हैदराबाद: ₹103.8
  • ​भुवनेश्वर: ₹100.6
  • ​कोलकाता: ₹99.8
  • ​चेन्नई: ₹99.6
  • ​पटना: ₹99.5
  • ​बेंगलुरु: ₹98.5
  • ​जयपुर: ₹98.4
  • ​मुंबई: ₹97.8
  • ​गुड़गांव / नोएडा / लखनऊ: ₹95.4
  • ​चंडीगढ़: ₹89.5

​शनिवार को सीएनजी भी हुई थी महंगी
​ईंधन की कीमतों में लगी यह आग केवल सोमवार तक सीमित नहीं है। इससे पहले बीते शनिवार को भी पेट्रोल के दामों में 87 पैसे और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी। इतना ही नहीं, शनिवार को दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी (CNG) उपभोक्ताओं को भी झटका लगा था, जब सीएनजी की कीमतों में 1 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई। इसके बाद दिल्ली में सीएनजी के दाम बढ़कर 81.09 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच चुके हैं।क्यों बढ़ रहे हैं दाम? जानिए इसके पीछे की वैश्विक वजह
​घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आ रहे इस भूचाल के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव मुख्य कारण है।

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​होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) संकट:


अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। ईरान द्वारा रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘होर्मुज स्ट्रेट’ पर नियंत्रण कर वहां प्रतिबंध लगाने के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में अप्रत्याशित उछाल आया है।

​तेल कंपनियों को हो रहा था ₹1000 करोड़ का दैनिक नुकसान


​अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम कई हफ्तों से लगातार बढ़ रहे थे, लेकिन भारत की प्रमुख तेल विपणन कंपनियां—इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL)—लंबे समय तक पुरानी दरों पर ही ईंधन बेच रही थीं।


​अनुमानों के मुताबिक, इस अंतर के कारण तीनों सरकारी तेल कंपनियां सामूहिक रूप से प्रतिदिन 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का भारी नुकसान उठा रही थीं। घाटे के इस बढ़ते बोझ को कम करने और आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाए रखने के लिए आखिरकार सरकार और तेल कंपनियों को कीमतों में बढ़ोतरी का यह कड़ा फैसला लेना पड़ा।


​आम आदमी पर पड़ेगा सीधा असर


​विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार दो हफ्तों में चार बार हुई इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। डीजल महंगा होने से ट्रक और अन्य मालवाहक वाहनों का किराया बढ़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में फल, सब्जियां, दूध और अन्य दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी तेजी देखी जा सकती है।

    • ​मुख्य घटना: सोमवार सुबह देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर भारी बढ़ोतरी की गई है।
    • ​दामों में वृद्धि: पेट्रोल की कीमतों में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हुआ है।
    • ​चार बार बढ़ोतरी: पिछले दो हफ्तों के भीतर आम जनता को लगा यह चौथा बड़ा झटका है।
    • ​महानगरों का हाल: इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर हो गया है, जबकि कोलकाता में पेट्रोल ₹113.51 और डीजल ₹99.8 प्रति लीटर पर पहुंच गया है।
    • ​वृद्धि का कारण: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ईरान ने महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति बाधित हुई है और कीमतें बढ़ी हैं।
    • ​कंपनियों का नुकसान: अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी के बावजूद दाम न बढ़ाने के कारण भारतीय तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) को रोजाना ₹1,000 करोड़ से अधिक का घाटा हो रहा था, जिसके चलते कीमतें बढ़ाना अनिवार्य हो गया।

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