नई दिल्ली:
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और चुनौतियों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने केंद्र की मोदी सरकार को एक बड़ी वित्तीय राहत दी है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत में सरकार को 2.86 लाख करोड़ रुपये का ऐतिहासिक लाभांश (Dividend/Surplus) हस्तांतरित (Transfer) करने का फैसला किया है।
यह अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड सरप्लस ट्रांसफर है, जो देश की अर्थव्यवस्था और सरकारी खजाने को ऐसे समय में मजबूती देगा जब दुनिया भर में ऊर्जा संकट और आर्थिक उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है।
विश्लेषकों के अनुमान के मुताबिक रहा फैसला
आरबीआई का यह कदम वित्तीय बाजारों और आर्थिक जानकारों की उम्मीदों के बिल्कुल अनुकूल है। इस फैसले से पहले, बाजार विश्लेषकों और इकोनॉमिस्ट्स ने अनुमान लगाया था कि इस बार डिविडेंड की राशि 2.7 लाख करोड़ रुपये से 3.5 लाख करोड़ रुपये के बीच रह सकती है। केंद्रीय बैंक का यह फैसला इसी दायरे में आया है, जिससे बाजार में सकारात्मक संदेश गया है।
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सरकारी खजाने को मिलेगी मजबूती, ऊर्जा संकट से निपटने में मिलेगी मदद
यह रिकॉर्ड लाभांश सरकार के लिए एक बड़े बूस्टर डोज की तरह काम करेगा। वर्तमान में वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतों ने कई देशों की चिंताएं बढ़ा रखी हैं। भारत पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है। ऐसे में:
- राजकोषीय घाटा कम होगा: इस भारी-भरकम राशि से सरकार को अपने राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी।
- महंगाई पर लगाम: ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के कारण पैदा होने वाले मुद्रास्फीति (Inflation) के दबाव को कम करने के लिए सरकार इस फंड का रणनीतिक उपयोग कर सकती है।
- विकास कार्यों को गति: इंफ्रास्ट्रक्चर और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए सरकार को अतिरिक्त कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
क्यों खास है यह सरप्लस ट्रांसफर?
आमतौर पर आरबीआई अपनी कमाई का एक हिस्सा जरूरी रिजर्व रखने के बाद भारत सरकार को ट्रांसफर करता है। विदेशी मुद्रा भंडार के प्रबंधन, डॉलर की खरीद-बिक्री और सरकारी प्रतिभूतियों (Securities) से होने वाली कमाई के चलते इस बार आरबीआई का मुनाफा ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचा है, जिसका सीधा फायदा देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए मोदी सरकार को मिला है।









