नई दिल्ली | विशेष संवाददाता
पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भीषण तेजी का सीधा असर अब भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने लगा है। शुक्रवार सुबह देश की राजधानी दिल्ली समेत पूरे देश के लिए महंगाई की एक बुरी खबर आई। तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है, जिससे आम आदमी का घरेलू बजट पूरी तरह चरमरा गया है।
4 साल बाद सबसे बड़ी वृद्धि: क्या हैं नए रेट?
दिल्ली में शुक्रवार सुबह 6 बजे से पेट्रोल की कीमतों में 3.14 रुपये और डीजल में 3.11 रुपये प्रति लीटर की ऐतिहासिक बढ़ोतरी लागू हो गई है। यह वृद्धि इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि साल 2022 के बाद पहली बार ईंधन की कीमतों में इतना बड़ा बदलाव एक साथ किया गया है।
ताजा रेट चार्ट (दिल्ली):
- नियमित पेट्रोल: पहले ₹94.77 था, जो अब बढ़कर ₹97.91 प्रति लीटर हो गया है।
- प्रीमियम पेट्रोल: इसकी कीमतें अब ₹105.14 से ₹107.14 प्रति लीटर के बीच पहुँच गई हैं।
- नियमित डीजल: पहले ₹87.67 था, जो अब ₹90.78 प्रति लीटर की दर से बिक रहा है।
क्यों लगी कीमतों में ‘आग’? विशेषज्ञों का विश्लेषण
दिल्ली पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के निवर्तमान अध्यक्ष निश्चल सिंघानिया के अनुसार, इस मूल्यवृद्धि के पीछे मुख्य रूप से तीन वैश्विक कारक जिम्मेदार हैं:
- पश्चिम एशिया में युद्ध: इजरायल और पड़ोसी देशों के बीच बढ़ते तनाव के कारण तेल की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बाधित हुई है। आपूर्ति में किल्लत की आशंका ने कीमतों को हवा दी है।
- कच्चे तेल (Crude Oil) में उछाल: अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से लगातार तेजी बनी हुई है।
- रुपये की ऐतिहासिक कमजोरी: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के गिरते स्तर की वजह से तेल कंपनियों को आयात के लिए अधिक भुगतान करना पड़ रहा है, जिसका बोझ अंततः जनता पर डाला गया है।
सिंघानिया ने बताया कि पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा गुरुवार मध्यरात्रि को ही पेट्रोल पंप संचालकों को ई-मेल के जरिए नई दरों की सूचना दे दी गई थी, जिसे शुक्रवार सुबह से सिस्टम में अपडेट कर दिया गया।
चौतरफा मार: आम आदमी से लेकर छोटे व्यापारियों तक संकट
ईंधन की कीमतों में यह वृद्धि केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका ‘डोमिनो इफेक्ट’ पूरी अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलेगा:
- ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स: डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई महंगी हो जाएगी। ट्रक और मिनी-टेंपो संचालकों ने पहले ही किराए में बढ़ोतरी के संकेत दे दिए हैं।
- सब्जी और राशन पर असर: जब ढुलाई महंगी होती है, तो मंडियों में आने वाली फल, सब्जियां और अन्य जरूरी सामान के दाम अपने आप बढ़ जाते हैं। इससे आने वाले हफ्तों में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) बढ़ने का खतरा है।
- मिडिल क्लास का बजट: दिल्ली-एनसीआर में रोजाना ऑफिस जाने वाले लाखों नौकरीपेशा लोगों के लिए महीने का पेट्रोल खर्च अब ₹500 से ₹1000 तक बढ़ सकता है।
दिल्ली-एनसीआर की स्थिति: एक नजर में
राजधानी दिल्ली के साथ-साथ नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी तेल की कीमतें बढ़ी हैं। चूंकि इन राज्यों में वैट (VAT) की दरें अलग-अलग हैं, इसलिए एनसीआर के शहरों में तेल की कीमतों में कुछ पैसों का अंतर देखा जा सकता है। हालांकि, दिल्ली में बढ़ी कीमतों का असर पड़ोसी राज्यों पर भी तुरंत पड़ता है।
क्या कहते हैं अर्थशास्त्री?
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर युद्ध जल्द नहीं थमा, तो कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल का आंकड़ा पार कर सकती हैं। ऐसी स्थिति में तेल कंपनियां आने वाले दिनों में और भी छोटे-छोटे किस्तों में कीमतों में वृद्धि कर सकती हैं। फिलहाल सरकार की ओर से एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) में कटौती को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, जिससे जनता को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद कम ही नजर आती है।
निष्कर्ष
शुक्रवार सुबह की यह बढ़ोतरी आम आदमी के लिए किसी झटके से कम नहीं है। एक तरफ जहां लोग पहले से ही खान-पान की वस्तुओं की महंगाई से जूझ रहे हैं, वहीं पेट्रोल-डीजल के इन नए रेट्स ने ‘कोढ़ में खाज’ का काम किया है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार वैट या एक्साइज ड्यूटी में बदलाव कर जनता को थोड़ी राहत पहुँचाती है या महंगाई का यह पहिया इसी रफ्तार से घूमता रहेगा।











