देहरादून।
उत्तराखंड में एक बार फिर मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदल गया है। चिलचिलाती गर्मी और उमस से परेशान लोगों को जहां इस बदलते मौसम से राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा के लिहाज से मुश्किलें बढ़ने की आशंका है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के देहरादून केंद्र ने राज्य में अगले तीन दिनों तक भारी बारिश, तेज आंधी-तूफान और ओलावृष्टि को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है।
मौसम विभाग के मुताबिक, 5 जून से लेकर 7 जून तक प्रदेश के पर्वतीय और मैदानी दोनों ही क्षेत्रों में मौसम बेहद खराब रह सकता है। विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई जिलों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ और कुछ के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। इसके साथ ही प्रशासन और आम जनता को विशेष एहतियात बरतने की सलाह दी गई है।
इन जिलों में ‘ऑरेंज अलर्ट’, आकाशीय बिजली गिरने का खतरा
मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार, राज्य के पहाड़ी और संवेदनशील इलाकों में विशेष चौकसी बरतने की जरूरत है। मौसम विभाग ने देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चंपावत जिलों में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने और भारी बारिश का पूर्वानुमान लगाया है। इन जिलों के कुछ हिस्सों में ओलावृष्टि (Hailstorm) की भी प्रबल संभावना है, जिससे बागवानों और किसानों की फसलों को नुकसान पहुंच सकता है।
पर्वतीय जिलों के साथ-साथ आकाशीय बिजली (Lightning) चमकने और गिरने का भी खतरा जताया गया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस दौरान बादलों की गर्जना के साथ तेज आंधी आ सकती है, जिसकी रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक होने की उम्मीद है। इतनी तेज रफ्तार हवाओं के कारण कमजोर संरचनाओं, पेड़ों और बिजली के खंभों को नुकसान पहुंच सकता है।
मैदानी इलाकों में ‘येलो अलर्ट’, तेज हवाओं की चेतावनी
पहाड़ों पर जहां मौसम का मिजाज ज्यादा आक्रामक रहेगा, वहीं मैदानी जिलों में भी इसका असर साफ देखने को मिलेगा। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर समेत राज्य के अन्य मैदानी हिस्सों के लिए मौसम विभाग ने ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। इन इलाकों में धूल भरी तेज आंधी चलने, हल्की से मध्यम बारिश होने और कुछ जगहों पर झोंकेदार हवाएं चलने की पूरी संभावना है।
मैदानी क्षेत्रों में अचानक तेज हवाएं चलने से दृश्यता (Visibility) कम हो सकती है, जिससे सड़क यातायात प्रभावित होने की आशंका है। इसके अलावा, तापमान में अचानक आई इस गिरावट से लोगों को उमस भरी गर्मी से तो राहत मिलेगी, लेकिन अचानक मौसम बदलने से मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
पर्यटकों और चारधाम यात्रियों के लिए विशेष एडवाइजरी
जून का महीना होने के कारण इस समय उत्तराखंड में चारधाम यात्रा और पर्यटन अपने चरम पर है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक बाबा केदार, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। ऐसे में मौसम का यह बदला मिजाज यात्रा मार्ग पर बाधा उत्पन्न कर सकता है।
प्रशासन ने पहाड़ी मार्गों पर यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं और पर्यटकों से अपील की है कि वे मौसम की जानकारी लेने के बाद ही अपनी यात्रा को आगे बढ़ाएं। भारी बारिश के कारण संवेदनशील पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन (Landslides) और चट्टानें गिरने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए, यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे बारिश के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रुकें और नदी-नालों के किनारे जाने से बचें।
किसानों और बागवानों की बढ़ी चिंता
इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने उत्तराखंड के किसानों और बागवानों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इस समय पहाड़ों में नकदी फसलें और फलों (जैसे सेब, आडू, पुलम) तैयार होने की स्थिति में होते हैं। ऐसे में अगर तेज हवाओं के साथ ओले गिरते हैं, तो फसलों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। कृषि विभाग ने भी किसानों को कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखने और मौसम सामान्य होने तक कीटनाशकों का छिड़काव न करने की सलाह दी है।
मौसम विभाग और प्रशासन ने जारी की गाइडलाइंस (एहतियाती कदम):
- यातायात में सावधानी: आंधी और भारी बारिश के दौरान वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतें। पेड़ों और होर्डिंग्स के नीचे वाहन पार्क न करें।
- इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दूरी: आकाशीय बिजली चमकने के दौरान खुले मैदानों में न जाएं और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल से बचें।
- आपातकालीन नंबर सक्रिय: आपदा प्रबंधन विभाग और जिला प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है। किसी भी अप्रिय घटना या मार्ग बंद होने की स्थिति में तुरंत स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने को कहा गया है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 7 जून के बाद धीरे-धीरे मौसम के मिजाज में सुधार देखने को मिलेगा और मैदानी इलाकों में मौसम दोबारा शुष्क हो जाएगा। तब तक सभी को सतर्क रहने की हिदायत दी गई है।







