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उत्तराखंड में UCC के तहत ‘हलाला’ का पहला केस: इल्जाम साबित हुआ तो होगी 3 साल की जेल, जानें क्या है पूरा मामला

On: May 15, 2026 7:09 AM
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उत्तराखंड में यूसीसी के तहत हलाला का पहला मामला दर्ज, पुलिस कार्रवाई की सांकेतिक तस्वीर।

​देहरादून/रुड़की: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद कानून का डंडा अब उन प्रथाओं पर चलना शुरू हो गया है, जिन्हें इस कानून के तहत अपराध की श्रेणी में रखा गया है। राज्य में UCC के तहत ‘हलाला’ का पहला आधिकारिक मामला दर्ज किया गया है। रुड़की के बुग्गावाला क्षेत्र में एक महिला की शिकायत पर पुलिस ने गहन जांच के बाद मुकदमे में UCC की धाराएं जोड़ दी हैं। यदि इस मामले में दोष सिद्ध होता है, तो आरोपियों को सलाखों के पीछे जाना पड़ेगा।

​क्या है पूरा मामला?

​यह मामला हरिद्वार जिले के बुग्गावाला थाना क्षेत्र का है। यहाँ की निवासी एक पीड़िता ने अपने पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ तीन तलाक और दहेज उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। महिला का आरोप था कि उसे न केवल तीन तलाक देकर घर से निकाला गया, बल्कि उस पर दोबारा निकाह करने के लिए ‘हलाला’ जैसी कुप्रथा का दबाव भी बनाया गया।

​शुरुआत में, पुलिस ने 4 अप्रैल को महिला की तहरीर पर दहेज उत्पीड़न और मुस्लिम विवाह अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। उस समय इसमें समान नागरिक संहिता (UCC) की धाराएं शामिल नहीं की गई थीं, जिसे लेकर पीड़िता के परिजनों और स्थानीय समाज में काफी आक्रोश देखा गया था।

​पुलिस की ‘माथापच्ची’ और विधिक राय

​चूंकि उत्तराखंड में UCC हाल ही में लागू हुआ है, इसलिए पुलिस प्रशासन इस मामले में फूंक-फूंक कर कदम रख रहा था। हलाला के आरोपों पर धाराएं बढ़ाने से पहले पुलिस अधिकारियों ने लंबी कानूनी राय ली। उत्तराखंड में इस तरह का यह पहला मामला होने के कारण पुलिस के सामने प्रक्रियात्मक चुनौतियां भी थीं

​काफी जांच-पड़ताल और साक्ष्यों के संकलन के बाद, पुलिस ने अब इस मुकदमे में समान नागरिक संहिता (UCC) की धारा 32(1)(3) को शामिल कर लिया है।

एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर के अनुसार, पुलिस ने पूरी गंभीरता के साथ विवेचना पूरी की है और अब कोर्ट में आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल करने की तैयारी है।

​कितनी होगी सजा? (UCC के कड़े प्रावधान)

​समान नागरिक संहिता के तहत हलाला को एक दंडनीय अपराध माना गया है। बुग्गावाला मामले में जोड़ी गई धारा 32(1)(3) के तहत सजा के स्पष्ट प्रावधान हैं:

  • ​अधिकतम सजा: यदि अदालत में हलाला का आरोप साबित हो जाता है, तो दोषी को 3 साल तक की जेल की सजा हो सकती है।
  • ​जुर्माना: जेल के साथ-साथ दोषी पर भारी आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है।
  • ​गैर-जमानती प्रकृति: UCC के तहत इन मामलों में कड़ी कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाती है ताकि पीड़ित महिला को त्वरित न्याय मिल सके।

​27 जनवरी 2025: उत्तराखंड के लिए ऐतिहासिक तारीख

​उत्तराखंड सरकार ने 27 जनवरी 2025 को राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) के नियमों को प्रभावी रूप से लागू किया था। इसके लागू होने के बाद विवाह, तलाक, विरासत और हलाला जैसे विषयों पर सभी धर्मों के लिए एक समान कानून बन गया है। बुग्गावाला का यह केस इस कानून की सार्थकता और प्रभावशीलता की पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।

​हलाला पर क्यों लगा प्रतिबंध?

​पारंपरिक व्यक्तिगत कानूनों में कुछ व्याख्याओं के अनुसार, यदि एक पुरुष अपनी पत्नी को तलाक देता है और बाद में दोबारा उसी से निकाह करना चाहता है, तो महिला को पहले किसी अन्य पुरुष से निकाह करना होता है और उस रिश्ते को खत्म (तलाक) करने के बाद ही वह पहले पति के पास लौट सकती है। UCC ने इस प्रक्रिया को महिला की गरिमा के खिलाफ मानते हुए इसे पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है और इसे ‘मजबूरी’ या ‘दबाव’ बनाने की स्थिति में अपराध घोषित किया है।

​एसएसपी का बयान

​हरिद्वार के एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया:
​”यह प्रदेश में UCC के तहत हलाला का पहला मामला है। पुलिस ने कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श के बाद और महिला के बयानों के आधार पर धाराएं बढ़ाई हैं। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि विवेचना पूरी तरह पारदर्शी हो ताकि पीड़िता को न्याय मिले।”

​निष्कर्ष

​रुड़की का यह मामला पूरे राज्य के लिए एक मिसाल बनेगा। यह न केवल कानून के क्रियान्वयन को दर्शाता है, बल्कि समाज के उस वर्ग को भी कड़ा संदेश देता है जो अभी भी पुरानी कुप्रथाओं के जरिए महिलाओं का उत्पीड़न कर रहे हैं। अब सबकी नजरें कोर्ट की कार्यवाही पर टिकी हैं, जहाँ UCC की इन नई धाराओं के तहत पहली बार किसी आरोपी के भाग्य का फैसला होगा।

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​मुख्य बिंदु एक नजर में:

  • ​स्थान: बुग्गावाला, रुड़की (उत्तराखंड)।
  • ​धारा: UCC की धारा 32(1)(3)।
  • ​सजा: आरोप सिद्ध होने पर 3 साल की कैद।
  • ​महत्व: प्रदेश में UCC के तहत हलाला का यह पहला कानूनी केस है।

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