काठमांडू: नेपाल की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त उथल-पुथल का दौर जारी है। सुशासन और पारदर्शिता का दावा कर सत्ता के शीर्ष पर पहुंचे प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार को एक महीने के भीतर दूसरा सबसे बड़ा झटका लगा है। नेपाल के गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने भारी विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि गुरुंग का कार्यकाल महज 26 दिन का रहा।
भ्रष्टाचार के आरोपों ने घेरा
गृह मंत्री सुदन गुरुंग पर पद संभालने के साथ ही गंभीर आरोप लगने शुरू हो गए थे। उन पर विवादास्पद कारोबारी दीपक भट्टा के साथ व्यापारिक हिस्सेदारी और माइक्रो इंश्योरेंस कंपनियों में संदिग्ध निवेश करने के आरोप हैं। नेपाली मीडिया में लीक हुए दस्तावेजों के अनुसार, गुरुंग के वित्तीय लेनदेन और आय से अधिक संपत्ति को लेकर विपक्ष ने मोर्चा खोल दिया था।
विपक्ष और सामाजिक संगठनों का दावा है कि एक तरफ गुरुंग भ्रष्टाचार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने का ढोंग कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर वे खुद संदिग्ध व्यावसायिक गतिविधियों में लिप्त थे। लगातार बढ़ते सार्वजनिक दबाव और विरोध प्रदर्शनों के बाद अंततः उन्हें पद छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।
’नैतिकता’ का हवाला देकर छोड़ी कुर्सी
अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए सुदन गुरुंग ने सोशल मीडिया (फेसबुक) पर एक भावुक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा, “मैंने 26 मार्च 2026 (चैत्र 13, 2082) से पूरी ईमानदारी के साथ कर्तव्यों का निर्वहन किया। लेकिन हाल के दिनों में मेरे निवेश और शेयरों को लेकर जनता ने जो सवाल उठाए हैं, उन्हें मैं नजरअंदाज नहीं कर सकता।”
गुरुंग ने अपने पत्र में ‘जेनरेशन जेड’ (Gen Z) का जिक्र करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी सुशासन और जवाबदेही चाहती है। उन्होंने कहा कि उनके लिए नैतिकता किसी भी राजनीतिक पद से बड़ी है और जब ४६ भाइयों-बहनों के बलिदान से बनी सरकार पर आंच आए, तो पद त्यागना ही एकमात्र विकल्प बचता है।
पीएम बालेन शाह की मुश्किलें बढ़ीं
प्रधानमंत्री बालेन शाह के लिए यह हफ्ता बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। सुदन गुरुंग के इस्तीफे से पहले, 9 अप्रैल को प्रधानमंत्री ने अपनी ही कैबिनेट के एक और सदस्य, श्रम एवं रोजगार मंत्री दीपक कुमार साह को बर्खास्त किया था।
दीपक कुमार साह पर अनुशासनहीनता और पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोप थे। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि साह ने अपनी पत्नी जूनू श्रेष्ठ को स्वास्थ्य बीमा बोर्ड के सदस्य के रूप में अवैध रूप से बनाए रखा था। एक ही महीने के भीतर दो कद्दावर मंत्रियों का जाना बालेन शाह की ‘क्लीन इमेज’ वाली राजनीति पर सवालिया निशान लगा रहा है।
प्रमुख बिंदु: एक नजर में
विवरण
जानकारी
नाम
सुदन गुरुंग (पूर्व गृह मंत्री, नेपाल)
कार्यकाल
मात्र 26 दिन
मुख्य आरोप
संदिग्ध निवेश, दीपक भट्टा से व्यापारिक संबंध
इस्तीफे का कारण
सार्वजनिक नैतिकता और चौतरफा विरोध
अन्य कार्रवाई
श्रम मंत्री दीपक कुमार साह की बर्खास्तगी (9 अप्रैल)
राजनीतिक विश्लेषण: क्या गिर जाएगी सरकार?
नेपाल की राजनीति के जानकारों का मानना है कि बालेन शाह ने भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का वादा किया था, लेकिन उनके करीबी मंत्रियों का इस तरह विवादों में फंसना सरकार की साख को कमजोर कर रहा है। सड़क पर उतर रहे प्रदर्शनकारी अब प्रधानमंत्री से भी जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
विपक्ष अब इस मुद्दे को लेकर संसद में सरकार को घेरने की तैयारी में है। सुदन गुरुंग का इस्तीफा केवल एक मंत्री का जाना नहीं है, बल्कि यह नेपाल की नई राजनीतिक व्यवस्था के लिए एक लिटमस टेस्ट (कड़ी परीक्षा) जैसा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बालेन शाह अपनी कैबिनेट का पुनर्गठन कैसे करते हैं और जनता का खोया हुआ विश्वास वापस कैसे पाते हैं।









