देहरादून: यूक्रेन और रूस के बाद अब ईरान और पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध के बादलों ने उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की रसोई का बजट और व्यवस्था दोनों बिगाड़ दी है। आलम यह है कि दून में एलपीजी (LPG) सिलिंडरों की भारी किल्लत पैदा हो गई है। लोग सुबह से ही गैस एजेंसियों और गोदामों के बाहर लंबी कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं, लेकिन इसके बावजूद कई उपभोक्ताओं को खाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा है।
गैस बुकिंग सिस्टम हुआ ‘फेल’
पिछले कुछ दिनों से देहरादून के उपभोक्ता एक अजीबोगरीब समस्या का सामना कर रहे हैं। गैस बुक करने के लिए निर्धारित मोबाइल नंबरों पर कॉल कनेक्ट नहीं हो रही है। डिजिटल इंडिया के दौर में जब घर बैठे गैस मिलने का दावा किया जाता है, तब दून के लोग दिन भर मोबाइल फोन लेकर बुकिंग की कोशिश करते रहे, लेकिन सफलता नहीं मिली। बुकिंग न हो पाने के कारण उपभोक्ताओं में दहशत का माहौल है और वे सीधे गैस गोदामों की ओर रुख कर रहे हैं।
नया गांव और अन्य इलाकों में हाहाकार
बुधवार को देहरादून के नया गांव स्थित इंडेन गैस एजेंसी और अन्य प्रमुख गोदामों पर सुबह 8 बजे से ही अफरा-तफरी का माहौल देखा गया।
- लंबी कतारें: कड़ाके की धूप और अपनी बारी के इंतजार में उपभोक्ता घंटों खड़े रहे।
- स्टॉक खत्म: मिली जानकारी के अनुसार, एक ही दिन में करीब 320 उपभोक्ताओं को सिलिंडर बांटे गए, जिसके बाद स्टॉक पूरी तरह समाप्त हो गया।
- खाली हाथ लौटे लोग: स्टॉक खत्म होने के कारण 60 से अधिक लोगों को बिना सिलिंडर लिए ही वापस घर जाना पड़ा। यही स्थिति शहर की अन्य छोटी-बड़ी एजेंसियों पर भी बनी हुई है।
होटल और रेस्टोरेंट बंदी की कगार पर
घरेलू गैस की किल्लत तो है ही, लेकिन सबसे बुरा असर वाणिज्यिक (Commercial) गैस कनेक्शनों पर पड़ा है। जिले में 19,000 से अधिक कॉमर्शियल गैस कनेक्शन हैं, जिनकी मासिक खपत 40,000 सिलिंडरों से ज्यादा है।
आपूर्ति बाधित होने के कारण:
- रेहड़ी-पटरी संचालक: छोटे ढाबे और रेहड़ी वालों के पास बैकअप नहीं है, जिससे उनके चूल्हे बुझने की नौबत आ गई है।
- होटल व्यवसाय: पर्यटन सीजन के बीच गैस की कमी से होटल मालिकों को ग्राहकों को सेवाएं देने में भारी दिक्कत हो रही है।
- तालाबंदी का डर: यदि आपूर्ति जल्द बहाल नहीं हुई, तो कई छोटे रेस्टोरेंट और ढाबों पर ताले लटक सकते हैं।
प्रशासन का दावा बनाम हकीकत
एक तरफ जहाँ जनता सड़कों पर है, वहीं प्रशासन का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है। अधिकारियों का कहना है कि गैस की आपूर्ति निरंतर की जा रही है और कुछ लोग अनावश्यक रूप से पैनिक (दहशत) फैला रहे हैं। प्रशासन ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे धैर्य रखें और गैस बुक करके घर पर डिलीवरी का इंतजार करें।
साथ ही, प्रशासन ने चेतावनी दी है कि इस संकट की आड़ में गैस की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और दोषी पाए जाने पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाएगी।
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क्यों पैदा हुआ यह संकट? (Expert Opinion)
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल और गैस की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता का सीधा असर स्थानीय वितरण प्रणाली पर पड़ रहा है।
जनता की मांग
देहरादून के निवासियों का कहना है कि यदि प्रशासन घर पर डिलीवरी का दावा कर रहा है, तो सबसे पहले बुकिंग सिस्टम को दुरुस्त किया जाना चाहिए। जब तक बुकिंग नहीं होगी, तब तक उपभोक्ता को अपनी बारी का पता नहीं चलेगा, जिससे गोदामों पर भीड़ कम नहीं होगी।









