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उत्तरकाशी: दयारा बुग्याल ट्रेक पर लापता बबीता पांडे का 5वें दिन भी सुराग नहीं, आज गोई झील में उतरेगी जल पुलिस की डीप डाइविंग टीम

On: June 3, 2026 8:22 AM
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उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल ट्रेक पर लापता बबीता पांडे की खोज में जुटी रेस्क्यू टीम

​उत्तरकाशी / देहरादून:

उत्तराखंड के प्रसिद्ध ट्रैकिंग रूट दयारा बुग्याल (Dayara Bugyal) में बीते शुक्रवार से रहस्यमय तरीके से लापता नैनीताल की महिला ट्रैकर बबीता पांडे की खोजबीन में अब जिला प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। घने जंगलों, गहरी खाइयों और पथरीले रास्तों पर सघन सर्च अभियान चलाने के बाद भी जब बबीता का कोई सुराग नहीं मिला, तो अब रेस्क्यू ऑपरेशन का रुख प्राकृतिक जलाशयों की ओर मुड़ गया है। लापता ट्रैकर की तलाश के लिए आज यानी बुधवार को जल पुलिस की एक विशेष डीप डाइविंग (Deep Diving) टीम गोई स्थित प्राकृतिक झील में उतरेगी। प्रशासन को उम्मीद है कि इस झील के भीतर से बबीता के संबंध में कोई न कोई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लग सकता है।

​रामपुर चिल्किया की रहने वाली हैं बबीता, साथियों संग आई थीं ट्रेकिंग पर

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, नैनीताल जिले के रामनगर अंतर्गत ग्राम चिल्किया की रहने वाली बबीता पांडे अपने दो साथियों के साथ उत्तरकाशी के विश्वप्रसिद्ध दयारा बुग्याल की ट्रेकिंग पर आई थीं। समुद्र तल से लगभग 11,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित दयारा बुग्याल को अपनी प्राकृतिक सुंदरता और मखमली घास के मैदानों के लिए जाना जाता है।

​बीते शुक्रवार को ट्रेकिंग के मुख्य पड़ाव ‘गोई’ (Goi) के समीप बबीता अचानक बेहद रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गई। उनके साथियों ने जब काफी देर तक बबीता को आसपास नहीं पाया, तो उन्होंने स्थानीय गाइड और प्रशासन को सूचित किया। शुक्रवार शाम से ही स्थानीय स्तर पर खोजबीन शुरू कर दी गई थी, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, मामले की गंभीरता को देखते हुए बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।

​150 सदस्यीय दल ने खंगाला 5 किलोमीटर का दायरा, घने जंगल भी रहे नाकाम

​लापता बबीता पांडे की सुरक्षित बरामदगी के लिए जिला प्रशासन उत्तरकाशी और आपदा प्रबंधन विभाग ने संयुक्त मोर्चा संभाला हुआ है। वर्तमान में राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल (NDRF), उत्तराखंड पुलिस, वन विभाग और स्थानीय ग्रामीणों को मिलाकर करीब 150 सदस्यों का एक विशाल राहत एवं बचाव दल दिन-रात सर्च ऑपरेशन में जुटा है।
​बचाव दल ने पिछले चार दिनों में गोई पड़ाव के आसपास के लगभग पांच-पांच किलोमीटर के बेहद दुर्गम और घने जंगली दायरे को पूरी तरह खंगाल डाला है। खोजी कुत्तों (Dog Squad) और स्थानीय ट्रैकर्स की मदद से झाड़ियों, गुफाओं और गहरी खाइयों तक में तलाशी ली गई है। उच्च हिमाच्छादित और सर्द मौसम की चुनौतियों के बीच रेस्क्यू टीमें लगातार जंगलों की खाक छान रही हैं, लेकिन बबीता का कोई सुराग न मिलना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी पहेली बन गया है।

​अब ‘गोई झील’ पर टिकी निगाहें, छह विशेष गोताखोर पहुंचे उत्तरकाशी

​जंगलों और पहाड़ों में लगातार नाकामयाबी मिलने के बाद, अब जिला प्रशासन और रेस्क्यू टीमों की निगाहें गोई में ही छानियों (चरवाहों के अस्थायी ठिकाने) से कुछ ही दूरी पर स्थित एक गहरी प्राकृतिक झील पर टिक गई हैं। आशंका जताई जा रही है कि पैर फिसलने या रास्ता भटकने के कारण कोई अनहोनी झील के आसपास तो नहीं हुई।

​इस आशंका को दूर करने और पुख्ता जांच के लिए जिला प्रशासन ने जल पुलिस की विशेष डीप डाइविंग टीम को आपातकालीन स्थिति में बुलाया है। यह विशेषज्ञ टीम मंगलवार देर शाम को ही जिला मुख्यालय उत्तरकाशी पहुंच चुकी थी। इस टीम में छह पेशेवर और अनुभवी गोताखोर शामिल हैं, जो अत्याधुनिक उपकरणों के साथ आज सुबह गोई की इस प्राकृतिक झील की गहराइयों में उतरकर बबीता की खोज करेंगे। अधिकारियों का मानना है कि झील के भीतर सर्च ऑपरेशन चलाने से स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगी।

​बढ़ती जा रही है परिजनों की चिंता, दुआओं का दौर जारी

​जैसे-जैसे समय बीत रहा है, बबीता के परिजनों की सांसें अटकती जा रही हैं। रामनगर के चिल्किया गांव में बबीता के लापता होने की खबर के बाद से ही कोहराम मचा हुआ है और परिजन किसी भी तरह की अनहोनी की आशंका से डरे हुए हैं। बबीता के परिवार के कुछ सदस्य भी उत्तरकाशी पहुंच चुके हैं और लगातार रेस्क्यू टीम के संपर्क में हैं। स्थानीय ग्रामीणों और बबीता के करीबियों द्वारा उनके सकुशल लौटने के लिए लगातार प्रार्थनाएं और दुआएं की जा रही हैं।

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​ट्रैकिंग रूटों पर सुरक्षा और गाइडों की भूमिका पर उठे सवाल

​इस घटना ने एक बार फिर उत्तराखंड के दुर्गम ट्रैकिंग रूटों पर रेस्क्यू रिस्पॉन्स टाइम और ट्रैकर्स की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय जानकारों का कहना है कि दयारा बुग्याल का रूट वैसे तो सुरक्षित माना जाता है, लेकिन मौसम में अचानक बदलाव या मुख्य मार्ग से भटक जाने पर घने जंगलों में दिशा भ्रम होना आम बात है। प्रशासन अब इस बात की भी जांच कर रहा है कि घटना के वक्त बबीता के साथी और स्थानीय गाइड कहाँ थे और उनके लापता होने की सटीक क्रोनोलॉजी क्या रही। फिलहाल, पूरा ध्यान बबीता को ढूंढ निकालने पर केंद्रित है।

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