विकासनगर (देहरादून): उत्तराखंड के विकासनगर क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर अगवा कर लिया गया। इस अपहरण की गुत्थी सुलझाने में डिजिटल ट्रांजैक्शन यानी ‘फोन-पे’ (PhonePe) ने अहम भूमिका निभाई है। किशोरी के पिता की शिकायत पर पुलिस ने तीन मुख्य आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब आरोपितों की गिरफ्तारी और किशोरी की सकुशल बरामदगी के लिए दबिश दे रही है।
क्या है पूरा मामला?
विकासनगर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक गांव में रहने वाले परिवार ने पुलिस को आपबीती सुनाई। किशोरी के पिता द्वारा दी गई तहरीर के अनुसार, घटना 20 अप्रैल की रात की है। पूरा परिवार रोज की तरह खाना खाकर सो गया था। आधी रात के बाद जब परिजनों की नींद खुली, तो उन्होंने देखा कि उनकी 15 वर्षीय बेटी घर से गायब है। काफी खोजबीन के बाद भी जब उसका कहीं पता नहीं चला, तो परिजनों ने अनहोनी की आशंका जताते हुए पुलिस से संपर्क किया।
डिजिटल सुराग ने खोली पोल
इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब परिजनों ने किशोरी के फोन की जांच की। जांच के दौरान पता चला कि जिस रात किशोरी लापता हुई, उसी रात करीब 1:20 बजे उसके फोन-पे अकाउंट से 5,000 रुपये ‘समीर’ नामक युवक के खाते में ट्रांसफर किए गए थे।
हैरानी की बात यह रही कि समीर के पास पैसे पहुँचते ही, महज 10 मिनट के भीतर यानी रात 1:30 बजे, समीर ने वही राशि ‘अलताफ’ नाम के एक अन्य व्यक्ति को ट्रांसफर कर दी। इन संदिग्ध ट्रांजैक्शंस ने यह साफ कर दिया कि किशोरी का घर से जाना कोई सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक सोची-समझी साजिश थी।
मुख्य आरोपित और मददगारों की पहचान
परिजनों और पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि जीवनगढ़ निवासी साकिर ने किशोरी को अपने प्रेमजाल या किसी अन्य झांसे में लेकर उसका अपहरण किया है। इस कृत्य में समीर और अलताफ (दोनों निवासी जीवनगढ़) ने उसकी पूरी मदद की।
पिता का आरोप है कि साकिर ही उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर ले गया है, जबकि समीर और अलताफ ने पैसों के लेनदेन और भागने में सहयोग किया। यही नहीं, तहरीर में आरोपित युवक की मां और बहन की भूमिका पर भी संदेह जताया गया है। आरोप है कि इन लोगों को पूरी साजिश की जानकारी थी और इन्होंने अपराधियों को संरक्षण दिया।
पुलिस की कार्रवाई और धाराएं
विकासनगर पुलिस ने तहरीर के आधार पर आरोपित साकिर, समीर और अलताफ के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया है। पुलिस क्षेत्राधिकारी (CO) और कोतवाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल टीमों का गठन किया है।
पुलिस के मुख्य बिंदु:
- डिजिटल फुटप्रिंट: फोन-पे ट्रांजैक्शन के रिकॉर्ड को पुख्ता सबूत के तौर पर लिया गया है।
- सीडीआर जांच: आरोपितों और किशोरी के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाली जा रही है ताकि उनकी लोकेशन का पता लगाया जा सके।
- संभावित ठिकानों पर दबिश: जीवनगढ़ और आसपास के इलाकों में पुलिस की टीमें छापेमारी कर रही हैं।
सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
विकासनगर जैसे शांत इलाके में इस तरह की घटना ने स्थानीय लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा कर दी है। नाबालिग बच्चियों को सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से जाल में फंसाने और फिर अपहरण करने जैसी घटनाएं समाज के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। परिजनों ने मांग की है कि उनकी बेटी को जल्द से जल्द बरामद किया जाए और आरोपितों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
निष्कर्ष
फिलहाल, किशोरी और तीनों आरोपित फरार हैं। पुलिस का कहना है कि वे बहुत जल्द आरोपियों को सलाखों के पीछे ले आएंगे। यह घटना हमें सतर्क करती है कि डिजिटल युग में मोबाइल फोन का उपयोग जहाँ मददगार है, वहीं अपराधियों के लिए यह एक जरिया भी बन रहा है
विकासनगर पुलिस ने जनता से भी अपील की है कि यदि किसी को भी इस संबंध में कोई जानकारी मिले, तो वे तुरंत नजदीकी थाने में सूचित करें।









