मुख्य बिंदु:
- ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर गंगा दर्शन होटल के पास मंगलवार सुबह करीब 10 बजे हुआ हादसा।
- 200 मीटर गहरी और तीखी ढलान से लुढ़कते हुए सीधे उफनती गंगा नदी में जा गिरी अनियंत्रित कार।
- वाहन में चालक समेत कुल 8 लोग थे सवार; राजस्थान के जैसलमेर के रहने वाले थे दोनों तीर्थयात्री परिवार।
- 12 वर्षीय बालक गंभीर रूप से घायल, श्रीनगर बेस अस्पताल में भर्ती; 4 लापता लोगों के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी।
देवप्रयाग।
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के बीच एक बार फिर रफ्तार और भौगोलिक परिस्थितियों के चलते बड़ा और दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है। ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर देवप्रयाग थाना क्षेत्र के अंतर्गत मंगलवार सुबह एक अनियंत्रित इनोवा कार करीब 200 मीटर गहरी और तीखी ढलान से सीधे नीचे बह रही अलकनंदा-गंगा नदी में समा गई। इस भीषण दुर्घटना में कार सवार तीन लोगों के शव बरामद कर लिए गए हैं, जबकि चार लोग अब भी नदी के तेज बहाव में लापता हैं। हादसे में केवल एक 12 वर्षीय बालक की जान बच सकी है, जिसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, कार में सवार सभी यात्री राजस्थान के जैसलमेर जिले के रहने वाले थे और दो परिवारों से ताल्लुक रखते थे। यह सभी लोग बदरीनाथ धाम के दर्शन कर वापस लौट रहे थे, तभी नियति ने उनके साथ यह क्रूर मजाक किया।
सुबह 10 बजे चीखों से गूंजी घाटी, चश्मदीदों के उड़े होश
यह रूह कंपा देने वाला हादसा मंगलवार सुबह करीब 10 बजे देवप्रयाग से लगभग पांच किलोमीटर आगे ‘चकासा’ नामक स्थान पर हुआ। चश्मदीदों के मुताबिक, बदरीनाथ हाईवे पर स्थित ‘गंगा दर्शन होटल’ के समीप अचानक एक उत्तराखंड नंबर की वाणिज्यिक (कमर्शियल) इनोवा कार (संख्या: UK08 TA 5433) चालक के नियंत्रण से बाहर हो गई।
सड़क किनारे लगे मिट्टी के करीब पांच फीट ऊंचे ढेर को लांघते हुए कार सीधे हाईवे से नीचे उतर गई। इसके बाद वाहन लगभग 200 मीटर की बेहद खड़ी और पथरीली ढलान पर ताश के पत्तों की तरह पलटते हुए सीधे उफनती गंगा नदी में जा गिरा। कार की रफ्तार और ढलान इतनी तेज थी कि पलक झपकते ही गाड़ी नदी की लहरों में ओझल हो गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस और प्रशासन को दी।
रेस्क्यू ऑपरेशन: मलबे और ढलान के बीच मिला जिंदगी का ‘चमत्कार’
घटना की सूचना मिलते ही देवप्रयाग पुलिस, स्थानीय प्रशासन और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें तुरंत राहत और बचाव कार्य के लिए मौके पर पहुंच गईं। चूंकि ढलान बेहद सीधी और खतरनाक थी, इसलिए रेस्क्यू टीमों को नीचे उतरने में भारी मशक्कत करनी पड़ी।
इसी खोजबीन के दौरान रेस्क्यू टीम को ढलान के बीच पत्थरों के पास एक 12 वर्षीय बालक लहूलुहान और अचेत अवस्था में मिला। बालक की पहचान आयुष्मान (12) पुत्र हरीश के रूप में हुई। टीम ने बिना वक्त गंवाए स्ट्रेचर के जरिए उसे मुख्य सड़क तक पहुंचाया और तत्काल उपचार के लिए बेस अस्पताल श्रीनगर (गढ़वाल) रेफर कर दिया, जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।
नदी तट से तीन शव बरामद, शिनाख्त की कोशिशें तेज
जैसे ही सर्च ऑपरेशन आगे बढ़ा, ब्यासी और ऋषिकेश से विशेष गोताखोरों और राफ्टिंग टीमों को मौके पर बुलाया गया। गंगा की तेज लहरों और गहराई के बीच गोताखोरों ने सघन तलाशी अभियान चलाया। देर शाम तक रेस्क्यू टीम को नदी के तट और पानी के भीतर से तीन शव निकालने में सफलता मिली, जिनमें दो पुरुष और एक महिला शामिल हैं।
देवप्रयाग के तहसीलदार वीरम सिंह पंवार और कोतवाल प्रशांत बहुगुणा ने बताया कि बरामद किए गए शवों की स्थिति ऐसी नहीं थी कि उनकी तुरंत पहचान की जा सके। पुलिस प्रशासन ने राजस्थान में उनके परिजनों से संपर्क साधा है, ताकि शवों का पंचनामा भरकर उनकी शिनाख्त की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की जा सके। इसके साथ ही उत्तराखंड नंबर प्लेट वाली इस कार के चालक के नाम और पते की भी पुष्टि की जा रही है।
जैसलमेर के दो हंसते-खेलते परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
प्रशासन द्वारा जुटाई गई प्राथमिक जानकारी के अनुसार, कार में चालक को मिलाकर कुल आठ लोग सवार थे। यह सभी राजस्थान के जैसलमेर के निवासी थे और चारधाम की पवित्र यात्रा पर उत्तराखंड आए थे।
कार में सवार यात्रियों की सूची इस प्रकार है:
नाम
उम्र
निवासी
स्थिति
गुड्डी देवी (पत्नी हरीश)
40 वर्ष
जैसलमेर, राजस्थान
लापता / शिनाख्त शेष
अवलेश (पुत्र हरीश)
22 वर्ष
जैसलमेर, राजस्थान
लापता / शिनाख्त शेष
नम्बरदार
जैसलमेर, राजस्थान
लापता / शिनाख्त शेष
जाह्नवी (पुत्री हरीश)
18 वर्ष
जैसलमेर, राजस्थान
लापता / शिनाख्त शेष
डॉ. दिनेश
27 वर्ष
जैसलमेर, राजस्थान
लापता / शिनाख्त शेष
कमला (पत्नी डॉ. दिनेश)
जैसलमेर, राजस्थान
लापता / शिनाख्त शेष
आयुष्मान (पुत्र हरीश)
12 वर्ष
जैसलमेर, राजस्थान
घायल (अस्पताल में भर्ती)
वाहन चालक
उत्तराखंड
लापता / शिनाख्त शेष
नोट: बरामद तीन शवों (दो पुरुष, एक महिला) की व्यक्तिगत पहचान ऊपर दिए गए नामों में से की जानी अभी बाकी है।
अंधेरा होने के कारण रोकना पड़ा सर्च ऑपरेशन, आज फिर शुरू होगी तलाश
गंगा नदी का जलस्तर और तेज बहाव रेस्क्यू टीम के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। मंगलवार देर शाम तक गोताखोरों और एसडीआरएफ की टीमों ने नदी के चप्पे-चप्पे को खंगाला, लेकिन तीन शवों के अलावा शेष चार लापता लोगों (जिनमें महिलाएं और चालक शामिल हैं) का कोई सुराग नहीं मिल सका। रात के घने अंधेरे और पहाड़ी नदी के बढ़ते खतरे को देखते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, बुधवार सुबह तड़के से एक बार फिर अत्याधुनिक उपकरणों, राफ्ट और गहरे पानी के गोताखोरों की मदद से ‘सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन’ शुरू किया जाएगा। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा के दौरान बरती जाने वाली सतर्कता और ओवरस्पीडिंग जैसे गंभीर मुद्दों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। समूचे जैसलमेर और उत्तराखंड में इस घटना के बाद शोक की लहर है।







