विशेष संवाददाता, देहरादून
उत्तराखंड की राजधानी और अपनी शांत वादियों व ठंडी हवाओं के लिए मशहूर देहरादून में इस बार मौसम का मिजाज बदला-बदला नजर आ रहा है। जैसे-जैसे सूर्य देव के तेवर तल्ख हो रहे हैं, वैसे-वैसे दून घाटी की हवा भी जहरीली होती जा रही है। बढ़ते तापमान के साथ ही शहर की वायु गुणवत्ता (एअर क्वालिटी) ‘संतोषजनक’ (Satisfactory) श्रेणी से फिसलकर ‘मध्यम’ (Moderate) स्तर पर पहुंच गई है। दूनवासियों के लिए अब सुकून की सांस लेना मुश्किल होता जा रहा है, क्योंकि हवा में प्रदूषण फैलाने वाले सूक्ष्म कणों (प्रदूषकों) की मात्रा में तेजी से इजाफा हुआ है।
उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UEPPCB) के हालिया आंकड़े बताते हैं कि मई के दूसरे सप्ताह के बाद से ही एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार 100 के पार बना हुआ है, जो शहर के पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चेतावनी है।
मई के दूसरे हफ्ते में अचानक बदला हवा का रुख
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आधिकारिक आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि मई की शुरुआत तक देहरादून की हवा बेहद साफ और सेहतमंद थी। 7 मई को जहां एक्यूआई महज 33 (अच्छी श्रेणी) दर्ज किया गया था, वहीं 12 मई तक यह 69 (संतोषजनक श्रेणी) पर बना हुआ था। लेकिन 13 मई को जैसे ही पारे में उछाल आया, हवा की सेहत अचानक बिगड़ गई।
महज 24 घंटे के भीतर 13 मई को एक्यूआई का ग्राफ छलांग लगाकर 113 पर पहुंच गया। तब से लेकर अब तक वायु गुणवत्ता में कोई खास सुधार नहीं देखा गया है। हैरान करने वाली बात यह भी है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट पर 16 और 17 मई के आंकड़े ही नदारद हैं, जबकि 18 मई को अंतिम दर्ज आंकड़ा 101 रहा, जो अभी भी ‘मध्यम’ श्रेणी की खतरे की लकीर के ऊपर है।
दून में हवा की सेहत का रिपोर्ट कार्ड (मई का उतार-चढ़ाव)
नीचे दी गई तालिका स्पष्ट करती है कि किस तरह बढ़ते तापमान ने दून की हवा का दम घोंटा है:
| तिथि | एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) | हवा की स्थिति |
| 18 मई | 101 | मध्यम (Moderate) |
| 15 मई | 103 | मध्यम (Moderate) |
| 14 मई | 113 | मध्यम (Moderate) |
| 13 मई | 113 | मध्यम (Moderate) |
| 12 मई | 69 | संतोषजनक (Satisfactory) |
| 11 मई | 71 | संतोषजनक (Satisfactory) |
| 10 मई | 54 | संतोषजनक (Satisfactory) |
| 9 मई | 53 | संतोषजनक (Satisfactory) |
| 7 मई | 33 | अच्छी (Good) |
आखिर गर्मी बढ़ने से क्यों घुट रहा है दून का दम?
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पर्यावरणविदों और मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, तपती गर्मी और वायु प्रदूषण का सीधा व गहरा संबंध है। देहरादून में प्रदूषण का ग्राफ अचानक ऊपर भागने के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण काम कर रहे हैं:
1. ‘ग्राउंड लेवल ओजोन’ का खतरनाक निर्माण
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तेज धूप और भीषण गर्मी पड़ती है, तो वाहनों के धुएं और फैक्ट्रियों से निकलने वाली नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी गैसें वायुमंडल में आपस में रासायनिक क्रिया करती हैं। इस प्रक्रिया से जमीन के ठीक ऊपर ‘ओजोन गैस’ (Ground Level Ozone) का निर्माण होता है। यह गैस आंखों में जलन और सांस की गंभीर बीमारियों को जन्म देती है।
2. सूखी मिट्टी और उड़ती धूल का गुबार
लगातार बढ़ रहे तापमान के कारण जमीन की नमी पूरी तरह खत्म हो चुकी है और मिट्टी बेहद सूखी व भुरभुरी हो गई है। ऐसे में सड़कों पर दौड़ते वाहनों और हल्की हवा के चलने से भी धूल के महीन कण (PM 10 और PM 2.5) हवा में तैरने लगते हैं, जिससे धुंध जैसी स्थिति बन जाती है।
3. हवा की गति का थम जाना (Stagnant Air)
गर्मियों के कुछ दिनों में वायुमंडलीय दबाव ऐसा बनता है कि हवा की रफ्तार बेहद कम हो जाती है। हवा न चलने के कारण शहर का धुआं, धूल और अन्य हानिकारक प्रदूषक तत्व एक ही जगह पर ठहर जाते हैं और आसमान में जमा हो जाते हैं। इसे ‘विंड स्टैग्नेशन’ कहा जाता है, जो प्रदूषण को कई गुना बढ़ा देता है।
अब सिर्फ मानसून से ही उम्मीद: बोर्ड अधिकारी
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने चिंता जताते हुए कहा है कि अगर आने वाले दिनों में भी गर्मी का यही दौर जारी रहा और पारे में गिरावट नहीं आई, तो वायु प्रदूषण का स्तर और अधिक भयावह हो सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, अब इस स्थिति से फौरी राहत मिलने के आसार कम हैं। दूनवासियों को शुद्ध और साफ हवा में सांस लेने के लिए अब वर्षाकाल (मानसून) के शुरू होने का ही इंतजार करना होगा, क्योंकि बारिश की बूंदें ही इन हवा में तैरते धूल और गैसों के कणों को जमीन पर बैठा पाएंगी।
स्वास्थ्य चेतावनी: डॉक्टरों का कहना है कि AQI का 100 पार जाना विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा (सांस के मरीजों) के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है। सुबह और शाम के वक्त जब हवा भारी होती है, तब लोगों को वॉक करते समय सावधानी बरतनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर मास्क का प्रयोग करना चाहिए।






