अल्मोड़ा बागेश्वर चमोली चम्पावत देहरादून हरिद्वार नैनीताल पौड़ी गढ़वाल पिथौरागढ़ रुद्रप्रयाग टिहरी गढ़वाल उधम सिंह नगर उत्तरकाशी

प्रशासनिक फेरबदल और पत्राचार की जंग में उलझा नैनीताल के 944 पुलिसकर्मियों का वेतन, पूर्व IG के एक आदेश से मचा हड़कंप

On: June 10, 2026 7:35 AM
Follow Us:

​नैनीताल।

उत्तराखंड के नैनीताल जिले में कानून व्यवस्था संभालने वाले पुलिसकर्मियों पर इस समय आर्थिक संकट के बादल मंडरा रहे हैं। तपती गर्मी में सड़कों पर दिन-रात ड्यूटी करने वाले 944 पुलिसकर्मियों का जून माह का वेतन अधिकारियों के बीच चल रहे पत्राचार और प्रशासनिक उलझनों की भेंट चढ़ गया है। जून का पहला सप्ताह बीत जाने के बाद भी पुलिसकर्मियों के खातों में सैलरी नहीं पहुंची है, जिसके कारण जवानों को बच्चों की स्कूल फीस, बैंक लोन की ईएमआई (EMI) और रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

​इस पूरे विवाद की जड़ में पूर्व आईजी (IG) का एक कड़ा आदेश और उसके बाद पुलिस महकमे व ट्रेजरी (कोषागार) के बीच शुरू हुई ‘कागजी जंग’ है। हालांकि, जिले में नए आईजी की तैनाती के बाद इस गतिरोध के जल्द सुलझने की उम्मीद तो जगी है, लेकिन तकनीकी पेंच अभी भी फंसा हुआ है।

​क्या है पूरा मामला? क्यों थमी 944 जवानों की सैलरी?

​यह पूरा प्रशासनिक विवाद साल 2025 में हुए तबादलों से जुड़ा है। दरअसल, तत्कालीन आईजी रिद्धिम अग्रवाल ने जिला पुलिस में तैनात ऐसे 11 पुलिसकर्मियों को चिन्हित किया था, जिनका ट्रांसफर होने के बावजूद वे लंबे समय से नैनीताल जिले में ही जमे हुए थे। नियमों की अनदेखी पर कड़ा रुख अपनाते हुए पूर्व आईजी ने इन सभी 11 कर्मियों का वेतन रोकने के आदेश जारी कर दिए थे। इस संबंध में आईजी कार्यालय की ओर से सीधे कोषागार (ट्रेजरी) को भी पत्र भेजा गया था।

​समस्या तब खड़ी हुई जब एसएसपी (SSP) कार्यालय से आगामी 27 मई को जिले के सभी 944 पुलिसकर्मियों के वेतन बिल पास होने के लिए ट्रेजरी भेजे गए। चूंकि इन सभी कर्मचारियों का बजट और वेतन एक ही ‘अकाउंट हेड’ के तहत आता है, इसलिए उन 11 विवादित कर्मियों के नाम भी इसी सामूहिक बिल में शामिल थे। ट्रेजरी ने पूर्व आईजी के आदेश का हवाला देते हुए पूरे बिल पर रोक लगा दी।

​मेज दर मेज घूमती रही फाइल, उलझता गया पेंच

  • ​28 मई का ट्रेजरी का कदम: कोषागार ने एसएसपी कार्यालय को पत्र लिखकर साफ किया कि पूर्व आईजी के आदेशानुसार उन 11 पुलिसकर्मियों का नाम मुख्य सूची से अलग किया जाए और शेष कर्मियों का नया वेतन बिल बनाकर भेजा जाए।
  • ​एसएसपी कार्यालय का तर्क: दूसरी ओर, एसएसपी कार्यालय ने तर्क दिया कि जिन 11 कर्मियों के ट्रांसफर हो चुके हैं, उन्होंने भी बीते महीने जिले में पूरी मुस्तैदी से ड्यूटी की है। ऐसे में काम के बदले वेतन पाना उनका अधिकार है। इस दलील के साथ एसएसपी कार्यालय ने सभी 944 कर्मियों को एक साथ वेतन जारी करने के लिए दोबारा पत्र भेजा।
  • ​पत्राचार का दौर: इसके बाद दोनों विभागों के बीच दो से तीन बार और चिट्ठियां लिखी गईं, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा। नतीजा यह हुआ कि पूरे जिले के पुलिस महकमे की सैलरी फाइलों में ही दबी रह गई।

​नए आईजी की एंट्री, पर संशय बरकरार

​इस प्रशासनिक खींचतान के बीच पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल हुआ। आदेश जारी करने वाली पूर्व आईजी का स्थानांतरण हो गया और उनके स्थान पर नई आईजी नवेदिता कुकरेती ने कार्यभार संभाल लिया। नए अधिकारी के आने से जवानों को उम्मीद थी कि यह गतिरोध तुरंत खत्म हो जाएगा, लेकिन प्रशासनिक औपचारिकताएं अब भी आड़े आ रही हैं।

​नवनियुक्त आईजी नवेदिता कुकरेती ने मामले पर बयान देते हुए कहा:

“यह पूरा मामला मेरे संज्ञान में आ चुका है। पुलिसकर्मियों को आ रही दिक्कतों को देखते हुए इस प्रशासनिक और तकनीकी समस्या का जल्द से जल्द निस्तारण किया जा रहा है। कर्मियों का वेतन रोकना हमारा उद्देश्य नहीं है, जल्द ही स्थिति सामान्य होगी।”

​आईजी कार्यालय का नया पत्र: क्या निकलेगा समाधान?

​सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नवनियुक्त आईजी के निर्देश पर आईजी कार्यालय से एसएसपी कार्यालय को एक नया पत्र भेजा गया है। इस पत्र में वेतन जारी करने की बात तो कही गई है, लेकिन रुख पुराना ही रखा गया है। नए पत्राचार में भी स्पष्ट निर्देश हैं कि उन 11 दागी या नियम विरुद्ध जमे कर्मियों का वेतन रोकते हुए, शेष 933 पुलिसकर्मियों की सैलरी तत्काल जारी करने के लिए संशोधित बिल बनाया जाए।

​पुलिसकर्मियों में निराशा: “ड्यूटी पूरी, तो सजा क्यों?”

​इस पूरी प्रशासनिक रार का खामियाजा उन 933 बेकसूर पुलिसकर्मियों को भुगतना पड़ रहा है, जिनका इस विवाद से कोई लेना-देना नहीं है। जून का हफ्ता बीतने के बाद भी जेब खाली होने से जवानों में मायूसी और आक्रोश है।

​ग्राउंड पर तैनात कर्मियों का कहना है कि भीषण गर्मी और कानून व्यवस्था के कड़े मोर्चे पर वे अपनी ड्यूटी ईमानदारी से निभा रहे हैं। अधिकारियों और ट्रेजरी के बीच की इस कागजी लड़ाई की सजा उन्हें और उनके परिवारों को क्यों मिल रही है? होम लोन, कार लोन की किश्तें बाउंस होने का डर सता रहा है, वहीं बाजार में दुकानदारों का उधार भी बढ़ता जा रहा है।

ये भी पढ़े➜उत्तराखंड में मौसम का ऑरेंज अलर्ट: देहरादून समेत 6 जिलों में भारी ओलावृष्टि और अंधड़ की चेतावनी, मैदानी इलाकों में पारा 40 पार

​निष्कर्ष: अब आगे क्या?

​अब गेंद पूरी तरह से एसएसपी कार्यालय के पाले में है। सवाल यह उठता है कि क्या एसएसपी कार्यालय इस बार आईजी कार्यालय के कड़े रुख को देखते हुए उन 11 कर्मियों के नाम हटाकर 933 जवानों का नया बिल ट्रेजरी भेजेगा? या फिर इन 11 कर्मियों के वेतन को लेकर कोई नया तकनीकी रास्ता निकाला जाएगा?

​यदि एसएसपी कार्यालय तत्काल संशोधित बिल ट्रेजरी को भेज देता है, तो अगले 24 से 48 घंटों में 933 पुलिसकर्मियों के खातों में सैलरी क्रेडिट हो सकती है। लेकिन अगर प्रशासनिक जिद और संशय का यह दौर आगे भी जारी रहा, तो नैनीताल पुलिस के जवानों को आर्थिक तंगी के बीच ही अपनी ड्यूटी बजानी होगी।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment