देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में करोड़ों रुपये के फ्लैट धोखाधड़ी मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। पुष्पांजलि इंफ्राटेक के भगोड़े निदेशक दीपक मित्तल की पत्नी राखी मित्तल को दुबई में इंटरपोल ने गिरफ्तार कर लिया है। करीब चार साल से फरार चल रही राखी की गिरफ्तारी के बाद अब दून पुलिस उसे भारत लाने के लिए प्रत्यर्पण (Extradition) की कानूनी कार्रवाई में जुट गई है। हालांकि, मुख्य आरोपी दीपक मित्तल अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।
90 खरीदारों से 45 करोड़ की ठगी का है मामला
यह मामला साल 2020 का है, जब देहरादून के सहस्रधारा रोड पर ‘आर्किड पार्क’ नाम की ग्रुप हाउसिंग परियोजना के नाम पर भारी निवेश कराया गया था। पुष्पांजलि इंफ्राटेक कंपनी के निदेशक दीपक मित्तल, उनकी पत्नी राखी मित्तल और पार्टनर राजपाल वालिया ने मिलकर करीब 90 फ्लैट खरीदारों को उनके सपनों के घर का झांसा दिया।
आरोप है कि बिल्डर दंपती ग्राहकों के 45 करोड़ रुपये से अधिक की रकम लेकर रातों-रात अपने बच्चों (रुद्राक्ष और दीया) के साथ देश छोड़कर फरार हो गए। इस धोखाधड़ी ने न केवल निवेशकों को आर्थिक चोट पहुँचाई, बल्कि राज्य की कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए थे।
ब्लू से रेड कॉर्नर नोटिस तक का सफर
फरार होने के बाद बिल्डर दंपती के खिलाफ देहरादून के विभिन्न थानों में कुल 9 मुकदमे दर्ज किए गए। शुरुआत में पुलिस ने इनके खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया था, जिसका उद्देश्य केवल संदिग्ध की लोकेशन का पता लगाना होता है। हालांकि, पुलिस की ढुलमुल कार्रवाई पर जब सवाल उठने लगे और पुख्ता जानकारी मिली कि आरोपी दुबई में ऐश-ओ-आराम की जिंदगी जी रहे हैं, तो दबाव बढ़ गया।
इसके बाद, पुलिस के आवेदन पर इस नोटिस को रेड कॉर्नर नोटिस में तब्दील किया गया। रेड कॉर्नर नोटिस जारी होते ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंटरपोल सक्रिय हुई और दुबई पुलिस के सहयोग से राखी मित्तल को धर दबोचा गया।
पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्रवाई
अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) वी. मुरुगेसन ने पुष्टि की है कि राखी मित्तल को दुबई पुलिस की हिरासत में लिया जा चुका है। उन्होंने बताया:
”राखी मित्तल की गिरफ्तारी की सूचना हमें मिल गई है। अब विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के माध्यम से प्रत्यर्पण की कागजी कार्रवाई शुरू कर दी गई है ताकि उसे जल्द से जल्द भारत लाकर अदालत में पेश किया जा सके।”
इस मामले में केवल दून पुलिस ही नहीं, बल्कि STF (Special Task Force) और ED (Enforcement Directorate) भी जांच कर रही है। एसटीएफ ने पूर्व में दीपक मित्तल के पिता अश्वनी मित्तल को गिरफ्तार किया था। वहीं, ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत कार्रवाई करते हुए ‘आर्किड पार्क’ परियोजना और बिल्डर की अन्य संपत्तियों को अटैच (जब्त) कर लिया है।
बैंक का कर्ज और अटैच संपत्तियां
बिल्डर की धोखाधड़ी का शिकार केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि बैंक भी हुए। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की इंदिरा नगर शाखा से बिल्डर ने करीब 21 करोड़ रुपये का ऋण लिया था, जो उनके फरार होने के बाद NPA (Non-Performing Asset) घोषित हो गया। वर्तमान में ईडी और बैंक दोनों ने संपत्तियों पर अपना दावा ठोका हुआ है।
दीपक मित्तल पर बढ़ा दबाव
राखी मित्तल की गिरफ्तारी को पुलिस दीपक मित्तल तक पहुँचने की पहली सीढ़ी मान रही है। जानकारों का मानना है कि पत्नी के पकड़े जाने के बाद दीपक मित्तल पर मानसिक और कानूनी दबाव बढ़ेगा। संभावना जताई जा रही है कि वह भी जल्द ही इंटरपोल के फंदे में होगा या फिर खुद सरेंडर करने पर मजबूर हो जाएगा।
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निवेशकों में जगी न्याय की उम्मीद
पिछले चार सालों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे निवेशकों के लिए यह खबर राहत भरी है। “आर्किड पार्क” में जीवन भर की जमा पूंजी लगाने वाले खरीदारों को अब उम्मीद है कि मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उनकी डूबी हुई रकम वापस मिल सकेगी या उन्हें उनके फ्लैट्स का कब्जा मिल पाएगा।









