कुदरत का पहरा: पिथौरागढ़ में भूस्खलन से चीन सीमा को जोड़ने वाला दारमा मार्ग ठप, पंचाचूली ग्लेशियर ट्रैक पर फंसे 200 से अधिक पर्यटक; आदि कैलास यात्रा पर भी पड़ा असर - Doonprimenews
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कुदरत का पहरा: पिथौरागढ़ में भूस्खलन से चीन सीमा को जोड़ने वाला दारमा मार्ग ठप, पंचाचूली ग्लेशियर ट्रैक पर फंसे 200 से अधिक पर्यटक; आदि कैलास यात्रा पर भी पड़ा असर

On: June 8, 2026 1:07 PM
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​पिथौरागढ़। उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में एक बार फिर कुदरत का कड़ा पहरा देखने को मिल रहा है। सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण और चीन सीमा को जोड़ने वाले तवाघाट-सोबला-ढाकर मार्ग पर रविवार शाम से ही भारी भूस्खलन के कारण यातायात पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है। इस मार्ग के बंद होने से देश की प्रसिद्ध दारमा घाटी का संपर्क जिला मुख्यालय से पूरी तरह कट गया है, जिससे यह क्षेत्र देश के अन्य हिस्सों से अलग-थलग पड़ गया है।

मार्ग अवरुद्ध होने के कारण पंचाचूली ग्लेशियर के बेस कैंप और ट्रैकिंग रूट पर गए विभिन्न राज्यों के 200 से अधिक पर्यटक बीच रास्ते में ही फंस गए हैं, जो अब मौसम के साफ होने और मार्ग खुलने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, तवाघाट-लिपुलेख मार्ग पर भी चट्टान दरकने से आदि कैलास यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं की रफ्तार पर कुछ समय के लिए ब्रेक लग गया।
​दर और बौगलिंग के बीच बरस रहे पहाड़, बीआरओ के सामने बड़ी चुनौती

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​प्राप्त जानकारी के अनुसार, चीन सीमा को जोड़ने वाली तवाघाट-सोबला-ढाकर सड़क रविवार सायं से ही बंद पड़ी है। दारमा घाटी के प्रवेश द्वार माने जाने वाले ‘दर’ और ‘बौगलिंग’ के मध्य भूस्खलन की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। पहाड़ की तरफ से लगातार बड़े-बड़े बोल्डर (विशाल चट्टानें) और भारी मात्रा में मलबा गिर रहा है।

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​पहाड़ी से लगातार पत्थर और मलबे की बारिश होने के कारण सीमा सड़क संगठन (BRO) के जवानों को राहत और बचाव कार्य चलाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बीआरओ की मशीनें और मजदूर मौके पर तैनात हैं, लेकिन ऊपर से लगातार गिर रहे पत्थरों के कारण मार्ग को साफ करने का काम बार-बार बाधित हो रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही मलबे का गिरना बंद होगा, युद्धस्तर पर काम शुरू कर मार्ग को खोल दिया जाएगा।

​पंचाचूली बेस कैंप में फंसे सैकड़ों सैलानी, बढ़ रही हैं मुश्किलें

​इस मार्ग के बंद होने का सबसे बड़ा असर पर्यटन पर पड़ा है। इस समय देश के अलग-अलग राज्यों से आए लगभग दो सौ से अधिक पर्यटक पंचाचूली ग्लेशियर बेस कैंप और उसके आसपास के ट्रैकिंग रूट पर मौजूद हैं। सड़क पूरी तरह जमींदोज होने के कारण इन सैलानियों की गाड़ियां और सफर वहीं ठहर गया है। हालांकि, स्थानीय प्रशासन और बीआरओ पर्यटकों की सुरक्षा पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, लेकिन दुर्गम इलाका होने के कारण बंद रास्ते में समय काटना पर्यटकों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों की आवाजाही भी इस अवरोध के कारण पूरी तरह थम गई है।

​लखनपुर के पास दरकी चट्टान, आदि कैलास यात्रा में हुई देरी

​इसी बीच, आदि कैलास और कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग (तवाघाट-लिपुलेख मार्ग) पर भी रविवार की देर रात लखनपुर के पास एक बड़ा हादसा होने से टल गया। यहाँ रात के समय पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा टूटकर सड़क पर आ गिरा, जिससे भारी चट्टानें मार्ग के बीचों-बीच जमा हो गईं। राहत की बात यह रही कि भूस्खलन देर रात्रि को हुआ, जब इस मार्ग पर सुरक्षा कारणों से यातायात पूरी तरह बंद रहता है, अन्यथा कोई बड़ा जान-माल का नुकसान हो सकता था।


​चूंकि यह घटना रात में हुई, इसलिए आदि कैलास यात्रा पर इसका कोई बहुत बड़ा और स्थाई प्रभाव नहीं पड़ा। सोमवार सुबह तक यह मार्ग पूरी तरह बंद रहा। इस भूस्खलन की सूचना धारचूला में पहले ही मिल चुकी थी, जिसके कारण प्रशासन ने एहतियात बरतते हुए आदि कैलास यात्रियों के वाहनों को धारचूला से सोमवार सुबह कुछ विलंब (देरी) से रवाना किया।
​सुबह 9 बजे खुला लिपुलेख मार्ग, यात्रियों ने ली राहत की सांस

​लखनपुर में मार्ग बंद होने की सूचना पर बीआरओ की टीम सुबह तड़के ही आधुनिक मशीनों के साथ मौके पर जुट गई थी। जवानों की कड़ी मशक्कत के बाद सोमवार सुबह लगभग नौ बजे के आसपास इस मार्ग से मलबे और भारी पत्थरों को हटाकर इसे यातायात के लिए दोबारा सुचारु कर दिया गया। मार्ग खुलने के बाद धारचूला से रोके गए आदि कैलास यात्रियों के वाहनों को आगे के लिए रवाना किया गया, जिसके बाद इस रूट पर आवागमन सामान्य हो गया और श्रद्धालुओं ने राहत की सांस ली।

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​प्रशासन की पैनी नजर, यात्रियों से सतर्क रहने की अपील

​सीमांत क्षेत्र में मौसम के बदलते मिजाज और संवेदनशील पहाड़ियों को देखते हुए स्थानीय प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। पिथौरागढ़ जिला प्रशासन ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों, विशेषकर दारमा घाटी और आदि कैलास रूट पर जाने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों से अपील की है कि वे मौसम का पूर्वानुमान देखकर और पूरी सतर्कता के साथ ही अपनी यात्रा को आगे बढ़ाएं।

​प्रशासन का कहना है कि संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्रों (लैंडस्लाइड जोन्स) पर नजर रखने के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं। फिलहाल, पूरा ध्यान दारमा घाटी को जोड़ने वाले मार्ग को जल्द से जल्द बहाल करने और पंचाचूली बेस कैंप में फंसे पर्यटकों को सुरक्षित निकालने पर केंद्रित है। बीआरओ के जवान विषम परिस्थितियों के बावजूद मार्ग खोलने के काम में डटे हुए हैं।

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