देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र से रिश्तों को कलंकित करने और मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाला एक बेहद सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। यहाँ एक सरकारी स्कूल के सहायक अध्यापक (शिक्षक) पर अपनी पत्नी से एचआईवी (HIV) जैसी जानलेवा और लाइलाज बीमारी को छिपाने, फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार करने और अपनी ही जीवनसंगिनी को मौत के मुंह में धकेलने का गंभीर आरोप लगा है।
पीड़ित भाई की लंबी कानूनी लड़ाई और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के कड़े हस्तक्षेप के बाद, प्रेमनगर थाना पुलिस ने आरोपी पति के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। इस घटना ने न सिर्फ वैवाहिक रिश्तों के भरोसे को तार-तार किया है, बल्कि पूरे समाज को स्तब्ध कर दिया है।
अस्पताल के बेड पर खुला जानलेवा बीमारी का राज
मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के रहने वाले पीड़ित भाई ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में उस खौफनाक सच का ब्योरा दिया है, जिसने उनके हंसते-खेलते परिवार को तबाह कर दिया। शिकायत के मुताबिक, इसी साल 14 फरवरी को पीड़िता की तबीयत अचानक बेहद गंभीर हो गई थी। बहन की नाजुक हालत को देखते हुए मायके पक्ष (भाई) ने उसे तत्काल देहरादून के एक प्रतिष्ठित अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया।
अस्पताल में जब डॉक्टरों ने पीड़िता की गहन चिकित्सा जांच की और खून के नमूने लिए, तो जो रिपोर्ट सामने आई उसने भाई के पैरों तले से जमीन खिसका दी। डॉक्टरों ने खुलासा किया कि महिला किसी सामान्य बीमारी से नहीं, बल्कि मानव प्रतिरक्षा प्रणाली को नष्ट करने वाले जानलेवा ‘एचआईवी वायरस’ (HIV) से संक्रमित है।
बीमारी की बात सुनते ही भाग खड़े हुए पति और बेटा
जैसे ही डॉक्टरों ने परिवार को इस घातक बीमारी के बारे में सूचित किया, भाई ने सुरक्षा और एहतियात के तौर पर अपने बहनोई (महिला के पति) और उसके बेटे से भी तत्काल अपना एचआईवी टेस्ट कराने का अनुरोध किया। लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि बीमारी का नाम सुनते ही आरोपी पति और उसका बेटा घबरा गए। वे दोनों डॉक्टरों और मायके पक्ष के सामने तरह-तरह के बहाने बनाने लगे और बिना जांच कराए ही चुपके से अस्पताल परिसर से नौ दो ग्यारह हो गए। उनके इस संदिग्ध व्यवहार ने भाई के मन में गहरे संदेह को जन्म दे दिया था।
वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ती रही पत्नी, देखने तक नहीं आया शिक्षक पति
आरोप है कि जब महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और उसे जीवन रक्षक प्रणाली (वेंटिलेटर) पर रखा गया, तब भी पत्थरदिल पति अपनी गंभीर रूप से बीमार पत्नी का हालचाल जानने अस्पताल नहीं पहुँचा। एक तरफ पत्नी वेंटिलेटर पर अपनी आखिरी सांसों के लिए संघर्ष कर रही था, तो दूसरी तरफ पेशे से शिक्षक समाज को सही दिशा देने वाला पति अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह मुंह मोड़ चुका था।
जब मायके वालों ने फोन कर उससे अस्पताल न आने और जांच न कराने का कारण पूछा, तो उसने बेहद शातिर अंदाज में झूठ बोला कि वह बाहर अपना टेस्ट करवा रहा है और जल्द ही रिपोर्ट लेकर अस्पताल पहुंचेगा।
इलाज के दौरान तोड़ा दम, व्हाट्सएप पर भेजी फर्जी मेडिकल रिपोर्ट
दुर्भाग्यवश, डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद पीड़िता को नहीं बचाया जा सका और 2 मार्च 2026 को इलाज के दौरान अस्पताल में उसकी दर्दनाक मृत्यु हो गई। बहन की असमय मौत से टूटा भाई जब अपनी सिसकियों को संभालकर बहनोई की हरकतों की तह तक पहुंचा, तो एक और बड़ा और चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया।
आरोपी पति ने वास्तव में किसी भी अधिकृत लैब या अस्पताल से अपना कोई एचआईवी टेस्ट करवाया ही नहीं था। इसके बजाय, उसने अपनी बीमारी को छिपाने और मृतका के परिजनों को गुमराह करने की साजिश रची। उसने किसी सॉफ्टवेयर या एडिट टूल्स की मदद से एक नामी पैथोलॉजी लैब की फर्जी और कूट रचित (नकारात्मक) मेडिकल रिपोर्ट तैयार की और उसे व्हाट्सएप के जरिए मृतका के भाई को भेज दिया।
मायके पक्ष का गंभीर आरोप: जानबूझकर बहन को उतारा मौत के घाट
पीड़ित भाई का आरोप है कि उसका बहनोई पहले से ही इस जानलेवा बीमारी से ग्रसित था, जिसे उसने शादी और वैवाहिक जीवन के दौरान जानबूझकर छिपाकर रखा। सही समय पर बीमारी का पता न चलने और इलाज न मिलने के कारण ही उसकी बहन की जान गई है। आरोपी ने न केवल अपनी पत्नी की जान को खतरे में डाला, बल्कि धोखे से अपनी बीमारी को ट्रांसफर कर उसे तड़प-तड़प कर मरने के लिए छोड़ दिया, जो कि एक अक्षम्य और कानूनी रूप से जघन्य अपराध है।
एसएसपी के आदेश पर दर्ज हुआ मुकदमा, जांच शुरू
अपनी बहन को खोने के बाद पीड़ित भाई ने न्याय के लिए देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के समक्ष गुहार लगाई थी। मामले की संवेदनशीलता और गांभीर्य को देखते हुए एसएसपी ने तत्काल प्रेमनगर पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए। पुलिस ने प्राथमिक छानबीन के बाद आरोपी सहायक अध्यापक के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने (जालसाजी) और अन्य सुसंगत कानूनी धाराओं के तहत मामला पंजीकृत कर लिया है।
थाना प्रभारी का आधिकारिक वक्तव्य
इस पूरे सनसनीखेज मामले पर जानकारी देते हुए प्रेमनगर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक नरेश राठौर ने बताया:
”पीड़ित पक्ष की ओर से मिली लिखित तहरीर और शुरुआती जांच के आधार पर आरोपी सहायक अध्यापक के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार करने (जालसाजी) और अन्य संबंधित कानूनी धाराओं के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस इस मामले की अत्यंत निष्पक्षता और वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ जांच कर रही है। आरोपी द्वारा भेजे गए व्हाट्सएप दस्तावेज और संबंधित लैब की रिपोर्ट का मिलान किया जा रहा है। जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर अग्रिम विधानिक और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
यह घटना समाज के उस वर्ग के लिए एक बड़ा सबक है जो गंभीर और संक्रामक बीमारियों को छिपाकर दूसरों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करते हैं। फिलहाल पुलिस की टीमें आरोपी की धरपकड़ और साक्ष्य जुटाने में लगी हुई हैं।







