बर्लिन/डुइसबर्ग। विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय और विशेषकर सिख समाज के लिए जर्मनी से एक विचलित करने वाली खबर सामने आई है। जर्मनी के डुइसबर्ग (Duisburg) इलाके में स्थित एक गुरुद्वारे के भीतर सिखों के दो गुटों के बीच हिंसक झड़प हो गई। इस खूनी संघर्ष में चाकू, कृपाण और यहाँ तक कि बंदूक का भी इस्तेमाल किया गया, जिसमें 11 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और भारतीय समुदाय के बीच हड़कंप मचा दिया है।
चुनाव और फंड को लेकर उपजा विवाद
शुरुआती जांच और स्थानीय जर्मन मीडिया ‘बिल्ड’ (Bild) की रिपोर्ट के अनुसार, इस हिंसा की जड़ में गुरुद्वारे के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का चुनाव और प्रबंधन फंड है। बताया जा रहा है कि काफी समय से गुरुद्वारे के पूर्व और वर्तमान सदस्यों के बीच फंड के प्रबंधन और प्रशासनिक दबदबे को लेकर मतभेद चल रहे थे। सोमवार को यह विवाद इतना बढ़ गया कि शांतिपूर्ण धार्मिक परिसर युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया।
सेवा से ठीक पहले शुरू हुआ ‘प्लान्ड अटैक’
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह कोई अचानक हुई झड़प नहीं बल्कि एक सुनियोजित हमला लग रहा था। संगत के एक 56 वर्षीय सदस्य ने बताया कि जब गुरुद्वारे में सेवा शुरू होने वाली थी, तभी एक गुट के हमलावरों ने अचानक अपने विरोधियों पर ‘पेपर स्प्रे’ छिड़कना शुरू कर दिया। इसके तुरंत बाद वहां अफरा-तफरी मच गई और हमलावरों ने चाकू और कृपाण निकाल लिए। प्रत्यक्षदर्शियों का यह भी दावा है कि इस दौरान एक पिस्तौल से फायरिंग भी की गई, जिससे वहां मौजूद श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई।
40 लोग शामिल, पुलिस की विशेष इकाइयों ने संभाला मोर्चा
जर्मन पुलिस के अनुसार, इस हिंसक झड़प में करीब 40 लोग शामिल थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने न केवल भारी पुलिस बल, बल्कि ‘विशेष पुलिस सामरिक इकाइयों’ (Special Tactical Units) को भी मौके पर तैनात किया। पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई और घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। पैरामेडिक्स और आपातकालीन डॉक्टरों की टीम ने मौके पर ही कई लोगों का प्राथमिक उपचार किया।
’ब्लैंक-फायरिंग’ पिस्तौल का हुआ इस्तेमाल
पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है। हालांकि, हमलावर जिस बंदूक की बात कर रहे थे, वह अभी बरामद नहीं हुई है, लेकिन घटनास्थल से मिले कारतूसों के खोखों (shells) की जांच से पता चला है कि वह एक ‘ब्लैंक-फायरिंग’ पिस्तौल थी। राहत की बात यह रही कि इस हिंसक घटना में किसी की जान जाने की खबर नहीं है, लेकिन 11 घायलों में से कुछ की हालत चिंताजनक बताई जा रही है।
वर्चस्व की जंग ने किया समुदाय को शर्मसार
गुरुद्वारे के भीतर हुई इस हिंसा के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में पगड़ीधारी लोग एक-दूसरे पर लात-घूंसे और धारदार हथियारों से हमला करते दिख रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह विवाद केवल चुनाव तक सीमित नहीं था, बल्कि यह इस बात की लड़ाई थी कि गुरुद्वारे के फैसलों पर किसका अंतिम नियंत्रण रहेगा। इस घटना ने विदेशों में सिख समुदाय की छवि पर भी सवाल खड़े किए हैं।
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निष्कर्ष और वर्तमान स्थिति
फिलहाल, जर्मन पुलिस इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है। गुरुद्वारे के फंड के दावों और काउंटर-दावों की भी पड़ताल की जा रही है। डुइसबर्ग इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि दोबारा ऐसी स्थिति पैदा न हो। भारतीय दूतावास भी इस मामले पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और धार्मिक सद्भाव से जुड़ा है










