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पिथौरागढ़ का परचम: 24 की उम्र में ‘डिप्टी कलेक्टर’ बने अमित द्विवेदी, प्रवीण दिगारी बने उप शिक्षा अधिकारी

On: June 2, 2026 11:56 AM
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उत्तराखंड पीसीएस परीक्षा में सफलता पाकर उप जिलाधिकारी बने अमित द्विवेदी और उप शिक्षा अधिकारी बने प्रवीण सिंह दिगारी

​पिथौरागढ़ (उत्तराखंड ब्यूरो): उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) द्वारा आयोजित राज्य सिविल सेवा (PCS) परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में जश्न का माहौल है। जिले के दो होनहार युवाओं ने अपनी मेधा और कड़े संघर्ष के बल पर प्रशासनिक सेवाओं में उच्च पद हासिल कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

​मुनस्यारी विकासखंड के रहने वाले अमित द्विवेदी ने महज 24 वर्ष की आयु में उप जिलाधिकारी (SDM) बनने का गौरव प्राप्त किया है, वहीं कनालीछीना के प्रवीण सिंह दिगारी का चयन उप शिक्षा अधिकारी (DEO) के पद पर हुआ है। इन दोनों युवाओं की अभूतपूर्व सफलता से उनके पैतृक गांवों सहित पूरे पिथौरागढ़ जनपद में खुशी की लहर दौड़ गई है।

​24 की उम्र में SDM बने अमित द्विवेदी: संघर्ष से सफलता तक की अनूठी मिसाल

​पिथौरागढ़ जिले के सुदूर मुनस्यारी विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम बमनगांव क्विटी निवासी हरीश चंद्र द्विवेदी के पुत्र अमित द्विवेदी ने वह मुकाम हासिल किया है, जो हजारों युवाओं का सपना होता है। अमित ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षा को न केवल उत्तीर्ण किया, बल्कि प्रतिष्ठित उप जिलाधिकारी (SDM) का पद भी हासिल किया।

​महज 24 वर्ष की बेहद कम उम्र में इस शीर्ष पद पर चयनित होकर अमित ने साबित कर दिया है कि यदि इरादे मजबूत हों और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।

​क्लर्क से SDM तक का सफर: युवाओं के लिए बने रोल मॉडल

​अमित द्विवेदी की यह सफलता इसलिए भी बेहद खास और प्रेरणादायी है क्योंकि उन्होंने यह मुकाम सीधे नहीं, बल्कि एक-एक सीढ़ी चढ़कर हासिल किया है। इससे पूर्व वे उत्तराखंड सरकार के विभिन्न विभागों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। अमित के करियर का ग्राफ कुछ इस तरह रहा है:

  • ​शुरुआती सरकारी सेवाएं: उन्होंने सबसे पहले क्लर्क (लिपिक) के रूप में सरकारी सेवा में कदम रखा।
  • ​सांगठनिक अनुभव: इसके बाद उन्होंने ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) और फिर पटवारी के पद पर भी अपनी सेवाएं दीं।
  • ​वर्तमान पद: पीसीएस परीक्षा का परिणाम आने तक वे उत्तराखंड सचिवालय में समीक्षा अधिकारी (RO) के महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत थे।

​एक के बाद एक कई प्रतियोगी परीक्षाओं को पास करने और वर्तमान में सचिवालय में नौकरी करने के साथ-साथ पीसीएस जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी करना अमित की असाधारण प्रतिभा और समय प्रबंधन को दर्शाता है। क्षेत्रवासियों ने उनकी इस यात्रा को राज्य के उन युवाओं के लिए एक महान प्रेरणास्रोत बताया है, जो विपरीत परिस्थितियों में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं।

​गांव में जश्न, जनप्रतिनिधियों ने दी बधाई

​अमित के डिप्टी कलेक्टर बनने की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव बमनगांव क्विटी पहुंची, लोग बधाई देने के लिए उनके घर पर उमड़ पड़े। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर ग्राम प्रधान शांति द्विवेदी, पूर्व प्रधान ओम प्रकाश द्विवेदी सहित क्षेत्र के तमाम जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने अमित तथा उनके गौरवान्वित परिवार को शुभकामनाएं दी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सुदूर सीमांत क्षेत्र के एक युवा का इस पद पर पहुंचना पूरे मुनस्यारी क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।

​स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के पौत्र प्रवीण दिगारी बने उप शिक्षा अधिकारी

​पिथौरागढ़ के ही कनालीछीना विकासखंड से एक और गौरवशाली खबर सामने आई है। देश की आजादी की लड़ाई में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय माधौ सिंह दिगारी के पौत्र प्रवीण सिंह दिगारी ने भी उत्तराखंड पीसीएस परीक्षा में बाजी मारी है। प्रवीण का चयन राज्य में उप शिक्षा अधिकारी (Deputy Education Officer) के पद पर हुआ है।

​कनालीछीना से पंतनगर तक की शानदार शैक्षणिक यात्रा

​मूल रूप से कनालीछीना विकासखंड के रीठगाड़ा गांव के रहने वाले प्रवीण सिंह दिगारी की प्रारंभिक शिक्षा और पृष्ठभूमि बेहद मजबूत रही है:

  • ​प्रारंभिक शिक्षा: उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर कनालीछीना से प्राप्त की, जहां उनकी नींव मजबूत हुई।
  • ​इंटरमीडिएट: इसके बाद उन्होंने दयासागर इंटर कॉलेज से अपनी इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की।
  • ​उच्च शिक्षा (Engineering): तकनीकी शिक्षा की ओर रुख करते हुए प्रवीण ने ग्राफिक ऐरा एकेडमी देहरादून से सिविल ट्रेड में बीटेक (B.Tech) की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने देश के प्रतिष्ठित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (पंतनगर) से हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग में अपनी उच्च शिक्षा पूरी की।

​शिक्षक माता-पिता के संस्कार और परिजनों को श्रेय

​प्रवीण दिगारी के परिवार में शिक्षा का माहौल पहले से ही रहा है। उनके पिता विक्रम सिंह दिगारी राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिण में व्यायाम शिक्षक (Physical Education Teacher) के पद पर तैनात हैं, जबकि उनकी माता निर्मला दिगारी राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय न्वाली में अंग्रेजी की शिक्षिका हैं।

​माता-पिता दोनों के शिक्षा जगत से जुड़े होने के कारण प्रवीण को बचपन से ही पढ़ाई का बेहतर माहौल मिला। प्रवीण ने अपनी इस बड़ी सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों और परिजनों के मार्गदर्शन तथा आशीर्वाद को दिया है।

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​सीमांत क्षेत्र में प्रतिभाओं की कमी नहीं

​पिथौरागढ़ के इन दोनों होनहारों, अमित द्विवेदी और प्रवीण सिंह दिगारी की शानदार सफलता ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि उत्तराखंड के पहाड़ी और सीमांत क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। उचित अवसर और दृढ़ संकल्प के बल पर यहां के युवा देश-दुनिया के किसी भी मंच पर अपनी योग्यता का लोहा मनवा सकते हैं। दोनों युवाओं के घरों पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है और सोशल मीडिया पर भी लोग इन्हें उत्तराखंड के नए मार्गदर्शक के रूप में सराह रहे हैं।

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