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चीन की कोयला खदान में भीषण गैस विस्फोट: 90 मजदूरों की दर्दनाक मौत, कई लापता; राष्ट्रपति चिनफिंग ने दिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश

On: May 23, 2026 8:18 AM
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चीन की लियुशेनयु कोयला खदान में गैस विस्फोट के बाद मलबे में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाती चीनी बचाव दल और एम्बुलेंस की गाड़ियां।

​बीजिंग / शांक्सी:

उत्तरी चीन के शांक्सी प्रांत से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ स्थित ‘लियुशेनयु’ (Liushenyu) कोयला खदान में शुक्रवार देर रात हुए एक भयानक गैस विस्फोट में मरने वाले मजदूरों की संख्या बढ़कर 90 हो गई है। इस हादसे ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। मलबे और जहरीली गैस के बीच अभी भी कई मजदूरों के लापता होने की आशंका है, जिसके कारण मौतों का यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है।

​चीन की सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ के अनुसार, यह हादसा किनयुआन काउंटी में स्थित कोयला खदान में उस समय हुआ जब मजदूर अपनी शिफ्ट में काम कर रहे थे। घटना की गंभीरता को देखते हुए चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग ने आपातकालीन बैठक कर बचाव कार्य में पूरी ताकत झोंकने और घायलों को तत्काल उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

​आधी रात को मौत का तांडव: जब खदान में हुआ ब्लास्ट

​सरकारी मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार देर रात जब लियुशेनयु कोयला खदान के भीतर रोजाना की तरह काम चल रहा था, तभी अचानक भूमिगत हिस्से में मिथेन या किसी अन्य ज्वलनशील गैस के संचय के कारण एक जोरदार धमाका हुआ। धमाका इतना शक्तिशाली था कि खदान का एक बड़ा हिस्सा ढह गया और चारों तरफ जहरीली गैस फैल गई।

​हादसे के वक्त स्थिति: आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, जिस समय यह भयानक गैस विस्फोट हुआ, उस वक्त जमीन से सैकड़ों फीट नीचे खदान के भीतर कुल 247 मजदूर काम कर रहे थे। धमाके के बाद वहां अफरा-तफरी मच गई और कई मजदूर मलबे के नीचे ही जिंदा दफन हो गए।

​राहत और बचाव कार्य जारी, मौतों के आंकड़ों में अचानक उछाल से उठे सवाल

​घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, फायर ब्रिगेड और विशेष आपदा प्रबंधन टीमों को मौके पर रवाना किया गया। फिलहाल युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाया जा रहा है। हालांकि, खदान के भीतर बची हुई जहरीली गैस और ढहे हुए मलबे के कारण बचाव कर्मियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

​इस पूरे हादसे में चीनी सरकारी मीडिया की भूमिका और सूचनाओं के आदान-प्रदान पर भी सवाल उठ रहे हैं। शुरुआत में शिन्हुआ एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में केवल 8 लोगों की मौत की पुष्टि की थी और दावा किया था कि 200 से अधिक मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर मरने वालों की संख्या अचानक 8 से बढ़कर 90 पहुंच गई। मीडिया ने इस आंकड़े में हुए अचानक और भारी बदलाव का कोई स्पष्ट स्पष्टीकरण नहीं दिया है, जिससे स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही और जानकारी छुपाने की आशंकाओं को बल मिला है।

​राष्ट्रपति शी चिनफिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग सख्त, कंपनी अधिकारी हिरासत में

​इस भीषण त्रासदी पर चीन के शीर्ष नेतृत्व ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने स्थानीय अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा:

  • ​सर्च ऑपरेशन: खोज और बचाव अभियान में कोई भी कसर न छोड़ी जाए और आखिरी मजदूर के मिलने तक ऑपरेशन जारी रहे।
  • ​कड़ी जवाबदेही: हादसे के असली कारणों की गहन और पारदर्शी जांच की जाए और जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।

​वहीं, प्रधानमंत्री ली कियांग ने भी राष्ट्रपति के निर्देशों का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन को हिदायत दी है कि हादसे से जुड़ी हर छोटी-बड़ी और सटीक जानकारी समय पर सार्वजनिक की जाए ताकि किसी भी तरह की अफवाह न फैले।
​प्रशासनिक कार्रवाई: इस बीच, हादसे की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की है। लियुशेनयु कोयला खदान का संचालन करने वाली कंपनी के शीर्ष अधिकारियों और जिम्मेदार प्रबंधकों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है कि क्या खदान में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी।

​चीन की माइनिंग इंडस्ट्री और सुरक्षा मानकों पर एक नजर

​चीन दुनिया में कोयले का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है। 2000 के दशक की शुरुआत में चीन की कोयला खदानों को दुनिया में सबसे खतरनाक माना जाता था, जहां हर साल हजारों मजदूरों की जान जाती थी। हालांकि, पिछले दो दशकों में चीनी सरकार ने:

  • ​सुरक्षा नियमों को बेहद कड़ा किया है।
  • ​अवैध और पुरानी तकनीक वाली छोटी खदानों को बंद कर दिया है।
  • ​आधुनिक तकनीक और गैस वेंटिलेशन सिस्टम को अनिवार्य बनाया है।

​इन कदमों की बदौलत खदान हादसों और मौतों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। लेकिन, लियुशेनयु खदान में हुआ यह हादसा पिछले एक दशक में चीन के भीतर सबसे घातक और बड़ा खदान हादसा माना जा रहा है। विशेषज्ञ इस बात की आशंका जता रहे हैं कि उत्पादन बढ़ाने के दबाव में कहीं सुरक्षा प्रोटोकॉल को ताक पर तो नहीं रख दिया गया था।

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​निष्कर्ष

​फिलहाल, अस्पताल में भर्ती घायल मजदूरों की स्थिति नाजुक बनी हुई है और उनके परिजन अपनों की सलामती की दुआ कर रहे हैं। बीजिंग से लेकर शांक्सी तक का प्रशासनिक अमला इस समय इस आपदा से निपटने में लगा है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि इस भीषण नरसंहार जैसी त्रासदी का असली जिम्मेदार कौन है। (समाचार एजेंसी इनपुट के साथ)

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