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मिडल-ईस्ट में बड़ी कूटनीतिक जीत: ट्रंप ने ईरान पर 2 हफ्ते के युद्धविराम का किया एलान, पाकिस्तान की मध्यस्थता ने पलटी बाजी

On: April 8, 2026 4:13 AM
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* वाशिंगटन डी.सी. में व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रम्प, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर एक टेबल पर बैठकर चर्चा कर रहे हैं। पृष्ठभूमि में एक बड़ी स्क्रीन पर "होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने" की शर्त के साथ "ईरान युद्ध पर दो सप्ताह का ब्रेक" शीर्षक वाला एक नक्शा दिखाई दे रहा है।

वॉशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया (Middle East) में पिछले कई दिनों से मंडरा रहे महाविनाश के बादलों के बीच एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को अगले दो सप्ताह के लिए स्थगित करने की घोषणा की है। यह निर्णय उस समय आया है जब पूरी दुनिया ईरान और अमेरिका के बीच एक पूर्ण युद्ध की आशंका से कांप रही थी।

इस ऐतिहासिक युद्धविराम (Ceasefire) के पीछे पाकिस्तान की भूमिका अहम बताई जा रही है। राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, यह समझौता पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ गहन चर्चा के बाद संभव हो पाया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना पहली शर्त

ट्रंप ने साफ किया है कि यह युद्धविराम ‘एकतरफा’ नहीं है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्पष्ट संदेश दिया कि यह शांति तभी बनी रहेगी जब ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आवाजाही के लिए ‘पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित’ रूप से खोलने पर सहमत होगा।

ट्रंप ने पोस्ट में लिखा, “पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के अनुरोध पर, जिन्होंने मुझसे विनाशकारी बल के प्रयोग को रोकने की अपील की थी, मैं दो सप्ताह के लिए बमबारी स्थगित करने पर सहमत हूं। लेकिन इसके लिए ईरान को होर्मुज की घेराबंदी हटानी होगी।”

ईरान और इजरायल की मुहर

ईरान की सरकारी मीडिया और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने भी इस समझौते की पुष्टि कर दी है। विशेष रूप से, ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है। ईरानी नेतृत्व ने इसे अपनी कूटनीतिक जीत करार दिया है और संकेत दिया है कि एक स्थायी शांति समझौते के लिए आगामी बातचीत पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित की जा सकती है।

सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि इजरायल ने भी इस युद्धविराम प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। व्हाइट हाउस के अधिकारियों और इजरायली सार्वजनिक प्रसारक ‘कान’ के अनुसार, इजरायल इस अवधि के दौरान कोई भी नया हमला नहीं करेगा, ताकि कूटनीति को एक मौका दिया जा सके।

विनाश के कगार से वापसी

बता दें कि इस घोषणा से कुछ ही घंटे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को एक खतरनाक अल्टीमेटम दिया था। ट्रंप ने वॉशिंगटन समय के अनुसार मंगलवार रात 8 बजे तक का समय दिया था और चेतावनी दी थी कि यदि होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट, पुलों और बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तबाह कर देगा। ट्रंप ने इसे ‘सभ्यता को प्रभावित करने वाला हमला’ बताया था। हालांकि, समय सीमा समाप्त होने से पहले ही पाकिस्तान की मध्यस्थता ने स्थिति को संभाल लिया।

10-सूत्रीय शांति प्रस्ताव: क्या है भविष्य की योजना?

राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात का भी खुलासा किया कि अमेरिका को ईरान की ओर से एक 10-सूत्रीय शांति प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। ट्रंप के मुताबिक, यह प्रस्ताव बेहद ‘व्यावहारिक’ है और इसे बातचीत के आधार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

ट्रंप ने कहा, “हमने पहले ही अपने अधिकांश सैन्य उद्देश्यों को प्राप्त कर लिया है। अब हमारा ध्यान दीर्घकालिक शांति पर है। अमेरिका और ईरान के बीच विवाद के लगभग सभी प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है। ये दो हफ्ते हमें एक अंतिम और निर्णायक समझौते को लागू करने का समय देंगे।”

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पाकिस्तान की भूमिका और क्षेत्रीय प्रभाव

अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक इस घटनाक्रम को पाकिस्तान की विदेश नीति की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देख रहे हैं। शहबाज शरीफ और जनरल आसिम मुनीर द्वारा ट्रंप को युद्ध रोकने के लिए मनाना यह दर्शाता है कि क्षेत्रीय शांति में इस्लामाबाद की भूमिका अभी भी महत्वपूर्ण है।

दूसरी ओर, होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ी खबर है, क्योंकि दुनिया का एक बड़ा हिस्सा अपने तेल और गैस की आपूर्ति के लिए इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर है। इसकी नाकेबंदी से वैश्विक तेल की कीमतों में भारी उछाल आने का खतरा पैदा हो गया था।

निष्कर्ष: सम्मान की बात और स्थायी शांति की उम्मीद

डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे घटनाक्रम को अपने ‘सम्मान’ से जोड़ते हुए कहा है कि वे मध्य पूर्व की इस पुरानी समस्या को हमेशा के लिए सुलझाना चाहते हैं। हालांकि, सवाल अब भी बरकरार है कि क्या ये दो हफ्ते एक स्थायी संधि में बदल पाएंगे या फिर यह केवल एक ‘युद्ध पूर्व का सन्नाटा’ है।

दुनिया की नजरें अब इस्लामाबाद में होने वाली बैठकों पर टिकी हैं, जहाँ अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि दशकों पुरानी दुश्मनी को खत्म करने के लिए मेज पर बैठेंगे।

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