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उत्तराखंड में ‘वीआईपी कल्चर’ पर प्रहार: निजी वाहनों पर हूटर और सायरन लगाया तो अब खैर नहीं, 20 अप्रैल से शुरू होगा महा-अभियान

On: April 19, 2026 4:25 AM
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उत्तराखंड में निजी वाहनों से हूटर और लाल-नीली बत्ती हटाती पुलिस।

​देहरादून: उत्तराखंड की सड़कों पर अब रसूख की नुमाइश करना भारी पड़ने वाला है। राज्य में निजी वाहनों पर अनाधिकृत रूप से हूटर, सायरन और बहुरंगी बत्तियों (लाल-नीली बत्ती) का उपयोग करने वालों के खिलाफ पुलिस प्रशासन ने कमर कस ली है। मुख्यमंत्री के निर्देशों और यातायात निदेशालय की सख्त रणनीति के तहत आगामी 20 अप्रैल से पूरे प्रदेश में 15 दिवसीय विशेष अभियान चलाया जाएगा।

​दबदबा दिखाने वालों पर कड़ा एक्शन

​अक्सर देखा जाता है कि कई लोग अपनी निजी कारों और एसयूवी पर हूटर और फ्लैशर लगाकर न केवल यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं, बल्कि आम जनता के बीच अनावश्यक रौब झाड़ने की कोशिश भी करते हैं। यातायात निदेशालय ने इसे गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि सड़कों पर अब किसी भी तरह का ‘वीआईपी स्टाइल’ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
​पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) और निदेशक यातायात, निवेदिता कुकरेती ने प्रदेश के सभी जिलों के कप्तानों और यातायात प्रभारियों को इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि यह अभियान केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि धरातल पर सघन चेकिंग के माध्यम से उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

​अभियान की मुख्य विशेषताएं

​यातायात निदेशालय द्वारा जारी ब्लूप्रिंट के अनुसार, इस 15 दिवसीय अभियान के केंद्र में निम्नलिखित बिंदु रहेंगे:

  • ​बत्तियों को मौके पर हटाना: यदि किसी निजी वाहन पर लाल, नीली या किसी भी तरह की बहुरंगी बत्ती पाई जाती है, तो उसे तत्काल मौके पर ही उतरवाया जाएगा।
  • ​हूटर और सायरन की जब्ती: अनाधिकृत रूप से लगाए गए इलेक्ट्रॉनिक हूटर और सायरन को जब्त किया जाएगा।
  • ​भारी चालान की कार्रवाई: मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की संबंधित धाराओं के तहत वाहन स्वामियों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
  • ​पुनरावृत्ति पर सख्त सजा: यदि कोई व्यक्ति बार-बार नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है, तो उसके वाहन का पंजीकरण रद्द करने या ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने की संस्तुति भी की जा सकती है।

​किसे है अनुमति और कौन है प्रतिबंधित?

​उत्तराखंड शासन और परिवहन विभाग की अधिसूचना के अनुसार, नियमों की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है:

  • ​आपातकालीन सेवाएं: केवल एम्बुलेंस, अग्निशमन सेवा (Fire Brigade) और पुलिस के अधिकृत वाहनों को ही विशिष्ट परिस्थितियों में इन उपकरणों के उपयोग की अनुमति है।
  • ​निजी एवं गैर-सरकारी वाहन: किसी भी निजी व्यक्ति, व्यापारी, नेता या गैर-सरकारी संगठन के वाहन पर हूटर, सायरन या फ्लैशर लगाना पूर्णतः प्रतिबंधित है।

​”सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और उत्तराखंड शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि आपातकालीन सेवाओं के अलावा किसी भी वाहन पर इस प्रकार के उपकरण नहीं होने चाहिए। हम सुनिश्चित करेंगे कि सार्वजनिक सड़कों पर सभी नागरिक समान महसूस करें और कोई भी कानून से ऊपर न हो।” — यातायात निदेशालय, उत्तराखंड

​आम जनता को परेशानी से बचाने की कवायद

​इस अभियान का एक मुख्य उद्देश्य आपातकालीन सेवाओं के लिए रास्ता सुगम बनाना भी है। अक्सर निजी वाहनों पर लगे हूटर की वजह से लोग भ्रमित हो जाते हैं और असली एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड को रास्ता मिलने में देरी होती है। इस शोर-शराबे और ‘हूटर कल्चर’ से ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ता है और सड़क पर चलने वाले अन्य चालक असहज महसूस करते हैं।

​सोशल मीडिया पर भी रहेगी नजर

​सूत्रों के अनुसार, पुलिस की सोशल मीडिया सेल भी उन वाहनों पर नजर रख रही है जो सोशल मीडिया रील्स या वीडियो में हूटर और बत्तियों का प्रदर्शन करते हैं। ऐसे वाहनों को चिन्हित कर उनके घर पर भी चालान भेजे जा सकते हैं।

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​निष्कर्ष: कानून का पालन ही एकमात्र विकल्प

​20 अप्रैल से शुरू होने वाला यह अभियान उत्तराखंड की यातायात व्यवस्था को सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि रसूख चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, कानून सबके लिए बराबर है। यदि आप भी अपनी गाड़ी पर हूटर या अनाधिकृत बत्ती लगाकर चलते हैं, तो अभियान शुरू होने से पहले इन्हें हटा लेना ही समझदारी होगी, अन्यथा भारी जुर्माने और कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

​नोट: यातायात नियमों का पालन करना न केवल कानूनी बाध्यता है, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक होने की पहचान भी है। सड़क सुरक्षा में सहयोग दें।

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