देहरादून: उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने भविष्य की चुनौतियों और वैश्विक संकटों को देखते हुए राज्य में ऊर्जा और ईंधन संरक्षण की दिशा में कुछ बेहद साहसी और क्रांतिकारी कदम उठाए हैं। बुधवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में न केवल सरकारी कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाने पर जोर दिया गया, बल्कि आम जनमानस के व्यवहार में भी बदलाव लाने के लिए कई नीतियों को मंजूरी दी गई।
वैश्विक संकट के बीच आत्मनिर्भर उत्तराखंड की पहल
कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। ईंधन, खाद्य पदार्थ और उर्वरकों की बढ़ती कीमतों का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को आगे बढ़ाते हुए, धामी सरकार ने राज्य में ईंधन की खपत घटाने और आयात निर्भरता कम करने के लिए “अल्पकालिक और दीर्घकालिक” सुधारों का खाका तैयार किया है।
1. वर्क फ्रॉम होम और डिजिटल वर्किंग
ईंधन बचाने के लिए सरकार अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) को प्राथमिकता देगी। सरकारी विभागों में अब अधिकांश बैठकें भौतिक उपस्थिति के बजाय डिजिटल माध्यम से होंगी।
- निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन: सरकार निजी कंपनियों को भी अपने कर्मचारियों के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ की नीति अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी।
- परिवहन पर जोर: लोगों को निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने के लिए जागरूक किया जाएगा।
2. मंत्रियों के काफिले में कटौती और ‘नो व्हीकल डे’
सादगी और बचत का संदेश खुद सरकार के शीर्ष स्तर से शुरू होगा।
- काफिला होगा छोटा: मुख्यमंत्री और मंत्रियों के वाहन फ्लीट में गाड़ियों की संख्या अब आधी कर दी जाएगी।
- नो व्हीकल डे: सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ मनाया जाएगा। इस दिन मंत्री और अधिकारी घर से ही कार्य (वर्क फ्रॉम होम) करेंगे। आम जनता से भी अपील की गई है कि वे सप्ताह में एक दिन अपने वाहन का प्रयोग न करें।
- एसी (AC) पर नियंत्रण: सरकारी और निजी भवनों में एयर कंडीशनिंग के उपयोग को सीमित करने के उपाय किए जाएंगे।
3. ‘एक अधिकारी, एक वाहन’ और नई ईवी पॉलिसी
प्रशासनिक सुधार के तहत अब एक अधिकारी को एक ही सरकारी वाहन मिलेगा, चाहे उसके पास कितने ही विभागों का प्रभार क्यों न हो।
- EV की अनिवार्यता: सरकार जल्द ही एक प्रभावी ‘इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी’ लेकर आएगी। इसके तहत भविष्य में खरीदे जाने वाले 50 प्रतिशत सरकारी वाहन इलेक्ट्रिक होंगे।
- चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर: पूरे राज्य में चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क प्राथमिकता के आधार पर बिछाया जाएगा।
4. पर्यटन और विदेशी यात्राओं पर नकेल
सरकारी खजाने पर बोझ कम करने के लिए मंत्रियों और अधिकारियों की विदेशी यात्राओं को बेहद सीमित किया जाएगा। इसके बजाय ‘विजिट माय स्टेट’ अभियान के जरिए घरेलू पर्यटन, होमस्टे और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। उत्तराखंड को ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ के हब के रूप में विकसित करने के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस की व्यवस्था की जा रही है।
5. खान-पान और स्वास्थ्य पर बड़ा फोकस
हैरान करने वाला लेकिन महत्वपूर्ण निर्णय खाद्य तेल की खपत को लेकर लिया गया है।
- लो ऑयल मेन्यू: होटलों, ढाबों और सरकारी कैंटीन को कम तेल वाला भोजन परोसने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
- स्वस्थ भारत: स्कूल-अस्पतालों में तेल के उपयोग की समीक्षा होगी, ताकि हृदय स्वास्थ्य में सुधार हो और खाद्य तेल का आयात कम किया जा सके।
कैबिनेट के अन्य महत्वपूर्ण बिंदु:
- स्वैच्छिक चकबंदी: पहाड़ में खेती को बचाने के लिए ‘स्वैच्छिक चकबंदी नीति’ को मंजूरी दी गई है।
- होमस्टे में विस्तार: अब होमस्टे में कमरों की सीमा 6 से बढ़ाकर 8 कर दी गई है, जिससे स्थानीय रोजगार बढ़ेगा।
- पंचायती राज: पंचायत भवनों के निर्माण के लिए बजट 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया है।
- शिक्षा और खेल: लोहाघाट महिला स्पोर्ट्स कॉलेज में पदों का सृजन और अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम में संशोधन को हरी झंडी मिली।
- ऊर्जा निगम: ऊर्जा के तीनों निगमों (UPCL, UJVNL, PTCUL) में अब बाहर से भी कुशल ‘प्रबंध निदेशक’ नियुक्त किए जा सकेंगे।
- समान कार्य-समान वेतन: श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के 277 संविदा कर्मचारियों को अब स्थाई कर्मियों के समान वेतन मिलेगा।
निष्कर्ष
धामी कैबिनेट के ये फैसले यह साफ करते हैं कि सरकार केवल तात्कालिक राहत पर नहीं, बल्कि भविष्य की ‘ग्रीन इकोनॉमी’ और ‘सस्टेनेबल लिविंग’ पर ध्यान केंद्रित कर रही है। “मेरा भारत, मेरा योगदान” अभियान के जरिए सरकार हर उत्तराखंडी को राष्ट्र निर्माण और ऊर्जा संरक्षण की इस मुहिम से जोड़ने की तैयारी में है।









