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जापान के बाद नेपाल ने दिया भारत को बड़ा झटका; भारतीय आमों के आयात पर लगाया पूर्ण प्रतिबंध, जानें क्या है वजह

On: June 10, 2026 5:52 AM
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काठमांडू/नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में अपनी मिठास के लिए मशहूर भारतीय आम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक के बाद एक दो बड़े झटके लगे हैं। हाल ही में जापान द्वारा भारतीय आमों के आयात पर रोक लगाने के बाद, अब पड़ोसी देश नेपाल ने भी भारतीय आम के आयात पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है।

नेपाल सरकार ने इस कड़े फैसले के पीछे आम में कीटनाशकों (Pesticides) की अत्यधिक मात्रा और सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्याप्त क्वारंटाइन (Quarantine) व जांच सुविधाओं के न होने का हवाला दिया है।
​नेपाल के इस औचक फैसले से जहां भारतीय फल उत्पादक किसानों और निर्यातकों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है, वहीं खुद नेपाल के घरेलू बाजारों में आम की किल्लत और कीमतों में भारी उछाल का खतरा मंडराने लगा है।

​प्रतिबंध के मुख्य कारण: कीटनाशक और क्वारंटाइन की कमी

​न्यूज एजेंसी पीटीआई (PTI) और नेपाल के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, नेपाल के कृषि और पशुपंछी विकास मंत्रालय ने सीमा चौकियों पर सख्त निगरानी के निर्देश दिए हैं। जांच के दौरान भारत से आने वाले आमों की खेप में ‘मैक्सिमम रेजिड्यू लिमिट’ (MRL) यानी कीटनाशकों की सुरक्षित सीमा से कहीं अधिक मात्रा पाई गई।
​इसके अलावा, नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों—विशेष रूप से भारत से सटे मधेश प्रांत में—आयातित फलों की गुणवत्ता जांचने के लिए उचित लैब और क्वारंटाइन सुविधाओं का अभाव है। ऐसे में बिना उचित जांच के कीटनाशक युक्त फलों को देश में प्रवेश देना नेपाली नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ माना गया, जिसके चलते सरकार ने यह सख्त कदम उठाया।

​नेपाल के स्थानीय किसानों की चमकी किस्मत

​इस प्रतिबंध का एक पहलू नेपाल के स्थानीय कृषि क्षेत्र के लिए वरदान साबित हो रहा है। मधेश प्रांत के भूमि प्रबंधन, कृषि और सहकारिता मंत्रालय के सूचना अधिकारी अजय ज्ञवाली ने इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया:


​”भारतीय आमों पर लगी इस रोक के बाद नेपाल के स्थानीय बाजारों में अब पूरी तरह से स्वदेशी आम ही बिक रहे हैं। हमारे स्थानीय किसानों को अब भारतीय आमों से सीधी और असमान प्रतिस्पर्धा नहीं करनी पड़ रही है, जिससे उन्हें अपनी फसल का बहुत अच्छा दाम मिल रहा है। यह स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक बेहद सकारात्मक कदम है।”

​मंत्रालय के अनुसार, मधेश प्रांत के सिराहा, सप्तरी और धनुषा जिले नेपाल में आम के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं। वर्तमान में इन क्षेत्रों के किसान इस फैसले से काफी उत्साहित हैं।

​व्यापारियों की चिंता: आसमान छू सकते हैं आम के दाम

​स्थानीय किसानों के लिए यह फैसला भले ही फायदेमंद हो, लेकिन नेपाल के फल व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं के लिए यह किसी मुसीबत से कम नहीं है। जनकपुरधाम के फल और सब्जी व्यवसायी संघ के महासचिव भुवनेश्वर पुरवे ने इस पूर्ण प्रतिबंध पर चिंता जताई है।


​व्यापारियों का कहना है कि नेपाल में आम का सीजन बेहद सीमित होता है। यहां मुख्य रूप से मध्य मई से मध्य जुलाई (लगभग दो महीने) तक ही आम का उत्पादन होता है। ऐसे में पूरे साल और विशेषकर गर्मियों के पीक सीजन में देश की मांग को पूरा करने के लिए घरेलू उत्पादन बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है।


​वर्तमान में काठमांडू के बाजारों में आम की कीमत 100 से 150 नेपाली रुपये प्रति किलो के आसपास चल रही है। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि भारत से आयात तुरंत बहाल नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आम आम लोगों की थाली से गायब हो जाएगा और इसकी कीमतें दोगुनी तक हो सकती हैं।

​पिछले साल केले पर लगा था बैन, दोगुनी हुई थीं कीमतें

​यह पहली बार नहीं है जब नेपाल ने भारतीय फलों पर इस तरह की रोक लगाई है। पिछले साल नेपाल सरकार ने भारत से आने वाले केलों पर भी ऐसा ही प्रतिबंध लगाया था। उस प्रतिबंध का असर आज भी उपभोक्ता झेल रहे हैं।


​प्रतिबंध से पहले नेपाल में जो केला 120 से 150 रुपये प्रति दर्जन बिकता था, उसकी कीमत बढ़कर अब 250 से 300 रुपये प्रति दर्जन तक पहुंच चुकी है। फल व्यापारियों का तर्क है कि अगर सरकार ने क्वारंटाइन व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय आम पर भी ‘ब्लैंकेट बैन’ (पूर्ण प्रतिबंध) जारी रखा, तो आम का हाल भी केले जैसा ही होगा। व्यापारियों ने अपील की है कि सीमा पर जांच व्यवस्था दुरुस्त की जाए और गुणवत्ता परीक्षण के बाद भारतीय आमों को आने की अनुमति दी जाए।

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​भारत के लिए ‘दोहरा झटका’: जापान भी कर चुका है प्रतिबंधित

​भारतीय फल निर्यातकों के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण है। नेपाल का यह फैसला भारत के लिए एक और बड़ा आर्थिक आघात है, क्योंकि कुछ ही समय पहले जापान ने भी भारतीय आमों के आयात को निलंबित कर दिया था।


​जापान के कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन मंत्रालय (MAFF) ने भारत के कुछ वेपर हीट ट्रीटमेंट (VHT) और पैकिंग केंद्रों पर निरीक्षण के दौरान खामियां पाई थीं। जापान की सख्त फाइटोसैनिटरी (Phytosanitary) शर्तों के उल्लंघन के कारण भारत की मशहूर किस्मों जैसे—अलफोंसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली की खेप को रोक दिया गया था। अब नेपाल द्वारा यूरोपीय संघ (EU) के मानकों के तर्ज पर सख्त नियम लागू करने से भारतीय निर्यातकों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

भारतीय आम निर्यात पर संकट के मुख्य बिंदु:

  1. जापान द्वारा पैकिंग और हीट-ट्रीटमेंट सेंटर्स में कमियों के कारण निलंबन।
  2. नेपाल द्वारा कीटनाशकों की अधिकता (MRL उल्लंघन) के कारण पूर्ण आयात रोक।
  3. वेस्ट बंगाल और अन्य राज्यों के व्यापारियों के लिए निर्यात लागत में बढ़ोतरी।

निष्कर्ष: क्या है आगे का रास्ता?

​भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 45% हिस्सा उगाता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग और घटिया पैकेजिंग मानकों के कारण भारत की साख पर असर पड़ रहा है।


​विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत को वैश्विक बाजार में बने रहना है, तो कृषि मंत्रालयों और एपीईडीए (APEDA) को किसानों को कीटनाशकों के सीमित उपयोग के प्रति जागरूक करना होगा। साथ ही, नेपाल जैसे पड़ोसी देशों के साथ द्विपक्षीय वार्ता कर सीमा पर ही संयुक्त क्वारंटाइन लैब स्थापित करने जैसे कदम उठाने होंगे, ताकि भारतीय किसानों का नुकसान न हो और उपभोक्ताओं को भी उचित दाम पर फल मिलते रहें।

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