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जम्मू-कश्मीर: उरी में LoC के पास भीषण धमाका, महाराष्ट्र के दो जांबाज जवान देश के लिए बलिदान

On: June 10, 2026 4:59 AM
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​श्रीनगर / उरी:

जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के अंतर्गत आने वाले उरी सेक्टर में नियंत्रण रेखा (LoC) के पास एक अत्यंत दुखद और हृदयविदारक घटना सामने आई है। उरी के कमलकोट इलाके में एलओसी के अग्रिम क्षेत्र के पास हुए एक अचानक और शक्तिशाली ब्लास्ट (धमाके) में भारतीय सेना के दो जवान गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्होंने बाद में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। देश की संप्रभुता और सीमाओं की रक्षा करते हुए इन दोनों वीर जवानों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया गया है और सेना ने व्यापक स्तर पर छानबीन शुरू कर दी है।
​अचानक हुए धमाके से दहल उठा कमलकोट सेक्टर

​सैन्य सूत्रों और स्थानीय इनपुट्स से मिली जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा मंगलवार देर शाम उरी सेक्टर के कमलकोट क्षेत्र में पेश आया। कमलकोट नियंत्रण रेखा से बिल्कुल सटा हुआ एक बेहद संवेदनशील इलाका है, जहां भारतीय सेना के जवान मुस्तैदी से घुसपैठ रोकने और सीमा की निगरानी के लिए गश्त (Patrolling) पर तैनात रहते हैं।

​मंगलवार की शाम को जब जवान अपनी नियमित ड्यूटी पर थे, तभी अचानक एक जोरदार धमाका हुआ। ब्लास्ट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इसकी आवाज दूर तक सुनी गई। इस अचानक हुए विस्फोट की चपेट में आने से अग्रिम मोर्चे पर तैनात सेना के दो जवान गंभीर रूप से झुलस गए और बुरी तरह घायल हो गए।
​श्रीनगर के सैन्य अस्पताल में तोड़ा दम

​धमाका होते ही सीमा पर तैनात अन्य सैन्य कर्मी तुरंत हरकत में आए और त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों घायल जवानों को घटनास्थल से रेस्क्यू किया गया। प्राथमिक उपचार देने के बाद, दोनों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तुरंत सेना के विशेष चॉपर (हेलिकॉप्टर) के जरिए श्रीनगर स्थित बादामीबाग छावनी के 92 बेस हॉस्पिटल ले जाया गया।

​92 बेस हॉस्पिटल सेना का एक अत्यंत आधुनिक और विशेषज्ञ चिकित्सा केंद्र है, जहां डॉक्टरों की टीम ने दोनों जांबाजों की जान बचाने के लिए अथक प्रयास किए। हालांकि, चोटें इतनी गंभीर थीं और अंदरूनी ब्लीडिंग इतनी ज्यादा हो चुकी थी कि इलाज के दौरान दोनों जवानों ने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और दोनों वीर जवानों ने शहादत का जाम पी लिया।
​महाराष्ट्र के रहने वाले थे दोनों जांबाज वीर

​इस घटना में बलिदान हुए दोनों वीर सपूत पश्चिमी राज्य महाराष्ट्र के रहने वाले थे। उनकी पहचान निम्नलिखित रूप में की गई है:

  1. ​चव्हाण विक्रम बालकृष्ण: वीर जवान चव्हाण विक्रम बालकृष्ण महाराष्ट्र के ठाणे जिले के अंतर्गत आने वाले ऐरोली (Airoli) के निवासी थे।
  2. ​अर्जुन जाधव राजेंद्र: वीर जवान अर्जुन जाधव राजेंद्र महाराष्ट्र के सतारा जिले की कराड तहसील के शाहपुर गांव के रहने वाले थे।

​जैसे ही दोनों जवानों की शहादत की खबर उनके पैतृक गांवों और परिवारों तक पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय स्तर तक लोग इन वीर सपूतों की वीरता को नमन कर रहे हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, लेकिन साथ ही पूरे क्षेत्र को अपने इन बेटों की शहादत पर गर्व भी है।
​विस्फोट के कारणों की जांच में जुटी सेना

​नियंत्रण रेखा (LoC) के पास अक्सर सीमा पार से होने वाली घुसपैठ को रोकने के लिए एंटी-इंफिल्ट्रेशन ऑब्स्टेकल सिस्टम (AIOS) और कई तरह के सुरक्षात्मक लैंडमाइंस (Landmines) या बारूदी सुरंगें बिछाई गई होती हैं। कई बार पहाड़ी इलाकों में मौसम के उतार-चढ़ाव, भारी बारिश या मिट्टी खिसकने की वजह से ये पुरानी माइंस अपनी जगह से शिफ्ट हो जाती हैं या एक्टिव हो जाती हैं।

​सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, अभी इस बात की गहनता से तफ्तीश की जा रही है कि यह धमाका किसी पुरानी बारूदी सुरंग (Explosive Device/Mine) के कारण हुआ या इसके पीछे किसी अन्य प्रकार की साजिश थी। सेना की तकनीकी और फॉरेंसिक टीमें घटनास्थल का बारीकी से मुआयना कर रही हैं ताकि ब्लास्ट की सटीक प्रकृति का पता लगाया जा सके।
​सीमा पर सुरक्षा और सतर्कता बढ़ाई गई

​इस दुखद घटना के बाद उरी और उसके आसपास के तमाम सीमावर्ती इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। नियंत्रण रेखा से सटे कमलकोट और अन्य सेक्टरों में गश्त को और अधिक कड़ा कर दिया गया है। भारतीय सेना किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति या सीमा पार की संदिग्ध गतिविधियों से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।

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​शहीद जवानों के पार्थिव शरीर को पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनके पैतृक निवास स्थान महाराष्ट्र भेजने की औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं, जहां पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। देश इन दोनों वीर जवानों चव्हाण विक्रम बालकृष्ण और अर्जुन जाधव राजेंद्र के इस सर्वोच्च और अनुकरणीय बलिदान को हमेशा याद रखेगा।

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