चमोली (उत्तराखंड): देवभूमि उत्तराखंड के सीमांत जिले चमोली से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। गुरुवार, 16 अप्रैल को गोपेश्वर-चोपता मोटर मार्ग पर भारतीय सेना का एक वाहन अनियंत्रित होकर लगभग 500 मीटर गहरी खाई में जा गिरा। इस भीषण हादसे में सेना के दो जवान गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायलों की स्थिति को देखते हुए सेना और प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की, जिसके बाद एक जवान को हेलीकॉप्टर के जरिए एयरलिफ्ट कर ऋषिकेश एम्स (हायर सेंटर) भेजा गया है।
कैसे हुआ हादसा?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सेना की सिग्नल कंपनी (ज्योतिर्मठ) का एक वाहन नियमित आवाजाही के दौरान गोपेश्वर-चोपता मार्ग पर था। पहाड़ी रास्तों की चुनौतियों के बीच अचानक चालक ने वाहन पर से नियंत्रण खो दिया और देखते ही देखते वाहन गहरी खाई की ओर लुढ़क गया। करीब 500 मीटर नीचे गिरने के कारण वाहन के परखच्चे उड़ गए। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके की ओर दौड़े और राहत कार्य शुरू किया।
स्थानीय युवकों ने पेश की मानवता की मिसाल
हादसे के वक्त स्थानीय युवाओं ने जो तत्परता दिखाई, वह काबिले तारीफ है। जैसे ही वाहन खाई में गिरा, स्थानीय युवक प्रदीप रमोला, राहुल और अजय पंवार ने अपनी जान की परवाह किए बिना गहरी खाई में उतरकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। उन्होंने न केवल पुलिस और प्रशासन को सूचना दी, बल्कि एम्बुलेंस का इंतजार करने के बजाय दोनों लहूलुहान जवानों को अपने निजी वाहन से तत्काल जिला अस्पताल गोपेश्वर पहुंचाया। चिकित्सकों का कहना है कि अगर समय पर इन जवानों को अस्पताल न लाया जाता, तो स्थिति और भी चिंताजनक हो सकती थी।
घायल जवानों की स्थिति और पहचान
जिला अस्पताल गोपेश्वर में डॉक्टरों की टीम ने तुरंत घायलों का उपचार शुरू किया। घायलों की पहचान निम्न रूप में हुई है:
- जांबाज सिंह (29 वर्ष): पुत्र जय भगवान सिंह, निवासी- भिवानी, हरियाणा। डॉक्टर के अनुसार जांबाज सिंह के सिर में हल्की चोटें आई हैं और उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
- धवन सिंह (28 वर्ष): जवान धवन सिंह की हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है। उनके सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। अस्पताल लाने के दौरान वे बेहोशी की हालत में थे।
अग्निवीर जवान को सेना ने किया एयरलिफ्ट
घायल जवान धवन सिंह, जो वर्तमान में ‘अग्निवीर’ के रूप में देश की सेवा कर रहे हैं, की गंभीर स्थिति को देखते हुए सेना के अधिकारियों ने बड़ा निर्णय लिया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया। इसके बाद सेना के एक विशेष हेलीकॉप्टर को मौके पर बुलाया गया और जवान को तत्काल उच्च चिकित्सा संस्थान (एम्स ऋषिकेश) के लिए एयरलिफ्ट किया गया। सेना के वरिष्ठ अधिकारी भी अस्पताल और एयरलिफ्टिंग की प्रक्रिया के दौरान मौके पर मौजूद रहे।
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खतरनाक बना हुआ है गोपेश्वर-चोपता मार्ग
यह दुर्घटना एक बार फिर उत्तराखंड के पहाड़ी मार्गों पर सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर रही है। गोपेश्वर-चोपता मार्ग अपनी सुंदरता के लिए जाना जाता है, लेकिन संकरे मोड़ और ढलान इसे जोखिम भरा बनाते हैं।
विशेषकर सैन्य वाहनों की आवाजाही के दौरान यहाँ अत्यधिक सावधानी की आवश्यकता होती है। जिला प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं कि हादसा वाहन की तकनीकी खराबी की वजह से हुआ या इसके पीछे अन्य कोई कारण थे।
ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) में तैनात थे जवान
हादसे का शिकार हुए दोनों जवान सिग्नल कंपनी, ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) में तैनात हैं। यह यूनिट क्षेत्र में संचार व्यवस्था बनाए रखने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालती है। सेना के आला अधिकारियों ने घायल जवानों के परिवारों को सूचित कर दिया है और उनके बेहतर इलाज के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में सीमा सुरक्षा और आंतरिक व्यवस्था के लिए तैनात जवान अक्सर दुर्गम रास्तों पर ऐसी चुनौतियों का सामना करते हैं। स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल के कारण आज दो जांबाज सैनिकों की जान बचाई जा सकी। फिलहाल, पूरा प्रदेश और सेना के साथी जवान घायल अग्निवीर धवन सिंह के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं।










