बेंगलुरु: जिसे समाज ‘जीवनदाता’ मानता है, जब वही ‘यमराज’ बन जाए तो रिश्तों और पेशे दोनों से विश्वास उठने लगता है। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से एक ऐसी ही रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक नामी सर्जन ने अपनी डॉक्टर पत्नी की हत्या न केवल बेहद शातिर तरीके से की, बल्कि उसे अंजाम देने के लिए डिजिटल तकनीक का ऐसा इस्तेमाल किया जिसे जानकर जाँच अधिकारी भी हैरान रह गए।
घटना की पृष्ठभूमि: प्यार, धोखा और साजिश
आरोपी सर्जन महेंद्र रेड्डी और पीड़ित कृतिका रेड्डी की शादी मई 2024 में बड़े ही धूमधाम से हुई थी। दोनों पेशे से डॉक्टर थे और एक ही अस्पताल में साथ काम करते थे। बाहर से देखने पर यह एक खुशहाल जोड़ा नजर आता था, लेकिन इस वैवाहिक जीवन के पीछे महेंद्र का एक नर्स, हरिष्ठा, के साथ विवाहेतर संबंध चल रहा था। अपनी प्रेमिका के साथ नई जिंदगी शुरू करने की राह में महेंद्र अपनी पत्नी कृतिका को कांटा समझने लगा था।
21 अप्रैल की वह काली रात
यह खौफनाक वारदात 21 अप्रैल की है। पुलिस चार्जशीट के अनुसार, महेंद्र ने अपने मेडिकल ज्ञान का दुरुपयोग करते हुए कृतिका को एनेस्थीसिया (Anesthesia) की ओवरडोज दे दी। जब कृतिका अचेत हो गई और उसकी स्थिति बिगड़ने लगी, तो खुद को बचाने के लिए महेंद्र उसे आनन-फानन में अस्पताल ले गया। वहां उसने डॉक्टरों को यह दिखाने की कोशिश की कि उसकी पत्नी की तबीयत अचानक खराब हुई है। डॉक्टरों ने जांच के बाद कृतिका को मृत घोषित कर दिया। शुरुआती दौर में मामला ‘नेचुरल डेथ’ या ‘हार्ट फेलियर’ जैसा लग रहा था, लेकिन पोस्टमॉर्टम और फोरेंसिक जांच ने संदेह के घेरे को बड़ा कर दिया।
UPI चैट: जब तकनीक बनी हत्यारे की दुश्मन
महेंद्र रेड्डी एक शातिर अपराधी की तरह सोच रहा था। उसे पता था कि पुलिस व्हाट्सऐप (WhatsApp), इंस्टाग्राम या कॉल रिकॉर्ड्स की जांच सबसे पहले करेगी। इसलिए, उसने अपनी प्रेमिका हरिष्ठा से संपर्क साधने के लिए UPI पेमेंट ऐप्स (जैसे PhonePe)के ट्रांजेक्शन मैसेजिंग फीचर का इस्तेमाल किया। उसे लगा था कि पेमेंट ऐप्स की बातचीत कभी पुलिस की रडार पर नहीं आएगी।
हालांकि, बेंगलुरु पुलिस की साइबर और फोरेंसिक टीम ने जब आरोपी के फोन की गहराई से जांच की, तो उन्हें चौंकाने वाले सबूत मिले। फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) ने महेंद्र के डिवाइस से 10 लाख से अधिक डिजिटल फाइलें और डेटा रिकवर किया। इनमें वे डिलीट की गई चैट भी शामिल थीं, जो UPI प्लेटफॉर्म के माध्यम से भेजी गई थीं
चैट में कबूला गुनाह: “मैने उसे मार दिया”
जांच में मिले मैसेज महेंद्र के खिलाफ सबसे पुख्ता सबूत बनकर उभरे हैं। एक मैसेज में महेंद्र ने अपनी प्रेमिका को निर्देश देते हुए लिखा था:
“अगर पुलिस पूछे तो कहना कि हम सिर्फ दोस्त हैं। कहीं भी कॉल या मैसेज मत करना।”
इससे भी अधिक चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब एक चैट में महेंद्र ने सीधे तौर पर हत्या की बात स्वीकार की। उसने लिखा:
“मैंने कृतिका को मार दिया है, अब मुझे जेल जाना ही पड़ेगा।”इन संदेशों से यह स्पष्ट हो गया कि हत्या पहले से सुनियोजित थी और आरोपी को अपने किए का पूरा आभास था।
फॉरेंसिक रिपोर्ट और मेडिकल ज्ञान का दुरुपयोग
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि महेंद्र ने कृतिका को मारने के लिए उन दवाओं का इस्तेमाल किया, जिनकी पहुंच एक सर्जन होने के नाते उसके पास आसानी से थी। उसने शरीर पर कोई भी बाहरी चोट के निशान छोड़े बिना उसे मौत की नींद सुलाने की कोशिश की, ताकि इसे एक सामान्य मेडिकल इमरजेंसी का रूप दिया जा सके। लेकिन खून और विसरा की रिपोर्ट में दवाओं के घातक स्तर ने उसकी सारी चालाकी उजागर कर दी।
कोर्ट का सख्त रुख: जमानत याचिका खारिज
हाल ही में जब यह मामला अदालत के सामने आया, तो बचाव पक्ष ने इसे केवल संदेह के आधार पर बनाया गया केस बताने की कोशिश की। लेकिन पुलिस द्वारा पेश किए गए ‘डिजिटल फुटप्रिंट्स’और UPI चैट के सबूत इतने ठोस थे कि कोर्ट ने आरोपी की दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। मामले की गंभीरता, सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका और जघन्य अपराध को देखते हुए अदालत ने महेंद्र रेड्डी की जमानत याचिका को नामंजूर कर दिया है।
निष्कर्ष: डिजिटल युग में अपराध का अंत
यह मामला इस बात का प्रमाण है कि अपराधी चाहे कितना भी प्रभावशाली या शिक्षित क्यों न हो, कानून के लंबे हाथों से बचना नामुमकिन है। आज के डिजिटल युग में हर एक क्लिक और हर एक मैसेज एक निशान छोड़ जाता है। एक डॉक्टर, जिसका धर्म जान बचाना था, आज अपनी ही पत्नी के खून के दाग अपने हाथों पर लेकर सलाखों के पीछे है।
बेंगलुरु पुलिस अब इस मामले में अंतिम चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है, ताकि आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके और पीड़िता के परिवार को न्याय मिल सके।










