देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पिछले कुछ समय से अपराध के ग्राफ में आई तेजी और कानून व्यवस्था पर उठते सवालों के बीच पुलिस ने अब ‘आर-पार’ की जंग छेड़ दी है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रमेंद्र डोभाल के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन क्रैकडाउन’ ने शहर के संदिग्ध तत्वों और नियमों की अनदेखी करने वाले मकान मालिकों के बीच हड़कंप मचा दिया है। पिछले डेढ़ महीने के आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि देवभूमि की सुरक्षा से समझौता करने वालों के लिए अब दून में कोई जगह नहीं है।
43 हजार से अधिक बाहरी व्यक्तियों की हुई ‘कुंडली’ जांच
पुलिस मुख्यालय के सख्त निर्देशों के बाद शुरू हुए इस महा-अभियान के तहत देहरादून पुलिस ने शहर के कोने-कोने को खंगाला है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले 45 दिनों में जनपद के नगर और देहात क्षेत्रों में कुल 43,499 बाहरी व्यक्तियों का भौतिक सत्यापन किया गया है। पुलिस की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य बाहरी राज्यों से आकर यहां छिपे आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की पहचान करना और उन पर लगाम कसना है।
अभियान के दौरान पुलिस की टीमों ने केवल झुग्गी-झोपड़ियों तक ही अपनी जांच सीमित नहीं रखी, बल्कि पहली बार बड़े पैमाने पर पॉश इलाकों और हाई-प्रोफाइल कॉलोनियों में भी दस्तक दी है।
342 अपार्टमेंट और 59 गेटेड कॉलोनियों में पुलिस की दबिश
ऑपरेशन क्रैकडाउन के तहत पुलिस ने सुरक्षा के उन छिद्रों को भरने की कोशिश की है जहाँ अक्सर अपराधी पनाह लेते हैं।
- आवासीय अभियान: पुलिस ने 342 अपार्टमेंट्स और 59 गेटेड रेजिडेंशियल कॉलोनियों के लगभग 30,000 से अधिक मकानों में सत्यापन की कार्रवाई की।
- सार्वजनिक स्थल: कॉलोनियों के अलावा शहर के आश्रमों, धर्मशालाओं, होटलों, गेस्ट हाउसों और हॉस्टलों में भी गहन तलाशी ली गई।
नियमों की अनदेखी पड़ी महंगी: ₹2.59 करोड़ का लगा जुर्माना
देहरादून पुलिस ने उन मकान मालिकों और व्यापारिक प्रतिष्ठान स्वामियों के खिलाफ भी बेहद सख्त रुख अपनाया है जिन्होंने अपने किरायेदारों, घरेलू नौकरों या कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन नहीं कराया था।
पुलिस ने 83 पुलिस एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए 2,596 व्यक्तियों के चालान काटे हैं। इस लापरवाही की कीमत उन्हें भारी-भरकम जुर्माने के रूप में चुकानी पड़ी है। अब तक पुलिस प्रशासन द्वारा 02 करोड़ 59 लाख 60 हजार रुपए का जुर्माना वसूला जा चुका है। यह कार्रवाई उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो चंद रुपयों के लालच में बिना पहचान पत्र और सत्यापन के अनजान लोगों को अपने यहाँ पनाह देते हैं।
3 विदेशी महिलाओं समेत दर्जनों गिरफ्तार
सत्यापन अभियान के दौरान केवल जुर्माना ही नहीं वसूला गया, बल्कि कई गंभीर गिरफ्तारियां भी हुई हैं:
- अवैध विदेशी नागरिक: रायपुर थाना क्षेत्र में बिना किसी वैध दस्तावेज के अवैध रूप से रह रहीं 03 विदेशी महिलाओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा है।
- संदिग्धों पर कार्रवाई: सत्यापन के दौरान संदिग्ध पाए गए 4,466 लोगों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की गई, जिनमें से 63 लोगों को मौके पर गिरफ्तार किया गया।
- आपराधिक गतिविधियां: रायवाला और कैंट थाना क्षेत्रों में भी 07 ऐसे आरोपियों को दबोचा गया जो विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में लिप्त पाए गए थे।
एसएसपी का संदेश: “सत्यापन नहीं तो सुरक्षा नहीं”
एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र डोभाल ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान केवल एक औपचारिकता नहीं है। शहर में बढ़ रहे अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए ऑपरेशन नाइट स्ट्राइक, ऑपरेशन नाइट वॉच और ऑपरेशन प्रहार के साथ-साथ ‘ऑपरेशन क्रैकडाउन’ निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने जनता से अपील की है कि वे अपने घर में रहने वाले किसी भी बाहरी व्यक्ति की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।
क्यों जरूरी है सत्यापन?
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि देहरादून की बदलती डेमोग्राफी और बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों की बढ़ती संख्या के बीच सुरक्षा को चाक-चौबंद रखना बड़ी चुनौती है। सत्यापन प्रक्रिया से न केवल अपराधियों के मन में डर पैदा होता है, बल्कि किसी भी अप्रिय घटना के बाद पुलिस के पास संदिग्धों का पूरा डेटाबेस मौजूद रहता है, जिससे जांच में आसानी होती है।
देहरादून पुलिस की इस चौतरफा कार्रवाई से अपराधियों के हौसले पस्त नजर आ रहे हैं, वहीं आम जनता ने पुलिस की इस सक्रियता पर संतोष जताया है।








