देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून एक बार फिर बड़े आंदोलन की तपिश महसूस कर रही है। मुजफ्फरनगर के छात्र दिव्यांशु जटराना की हत्या के मामले में न्याय की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत शुक्रवार को देहरादून-सहारनपुर सीमा स्थित आशारोड़ी चेकपोस्ट पहुंचे। भारी संख्या में किसानों और जाट समाज के प्रतिनिधियों के साथ आयोजित इस महापंचायत में टिकैत ने दोटूक कहा कि जब तक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात नहीं होती, तब तक धरना समाप्त नहीं होगा।
महापंचायत में भावुक दृश्य: फूट-फूट कर रोए दिव्यांशु के परिजन
आशारोड़ी चेकपोस्ट पर शुक्रवार को माहौल उस समय बेहद गमगीन हो गया, जब शोकसभा के दौरान दिव्यांशु के बाबा अपने पोते को याद कर फूट-फूट कर रोने लगे। किसान नेताओं और स्थानीय लोगों ने उन्हें ढांढ़स बंधाया, लेकिन परिजनों का आक्रोश और दुख साफ झलक रहा था।
महापंचायत में पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में किसान और संगठन के पदाधिकारी पहुंचे, जिससे प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए।
‘रणवीर हत्याकांड’ से की तुलना: नशे और प्रॉपर्टी डीलिंग पर उठाए सवाल
पत्रकारों से बातचीत करते हुए राकेश टिकैत ने इस हत्याकांड की तुलना साल 2009 के चर्चित ‘रणवीर एनकाउंटर कांड’ से कर डाली। उन्होंने कहा कि जिस तरह बेगुनाह रणवीर को मार दिया गया था, दिव्यांशु के साथ भी वैसा ही क्रूर व्यवहार हुआ है।
टिकैत ने उत्तराखंड सरकार और पुलिस प्रशासन पर तीखे हमले करते हुए कहा:
- नशे का कारोबार: देहरादून में नशे का धंधा जड़ें जमा चुका है, जिससे युवा अपराध की ओर जा रहे हैं।
- पुलिस की विफलता: टिकैत ने आरोप लगाया कि अगर कोई बदमाश किसी को धमकी देता है, तो पुलिस सुरक्षा देने (गनर) की बात करती है, लेकिन अपराधियों को ठीक करने की हिम्मत नहीं दिखाती।
- प्रॉपर्टी का खेल: उन्होंने गंभीर आरोप लगाया कि उत्तराखंड में पुलिस और नेता मिलकर ‘प्रॉपर्टी के धंधे’ में शामिल हो गए हैं, जिसके कारण राज्य में अपराध का ग्राफ बढ़ रहा है।
प्रशासन की पहल: 11 सदस्यीय कमेटी की मुख्यमंत्री से होगी वार्ता
महापंचायत स्थल पर भारी भीड़ और तनाव को देखते हुए एसपी सिटी प्रमोद कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसान प्रतिनिधियों को मनाने की कोशिश की। लंबी बातचीत के बाद यह निर्णय लिया गया कि पुलिस प्रशासन 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात जल्द ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से करवाएगा। हालांकि, राकेश टिकैत ने स्पष्ट किया कि जब तक वार्ता सफल नहीं होती और ठोस आश्वासन नहीं मिलता, वे धरनास्थल से नहीं हटेंगे।
क्या था मामला?
गत 23 मार्च की रात को देहरादून में छात्र गुटों के बीच हुए हिंसक संघर्ष में मुजफ्फरनगर निवासी दिव्यांशु जटराना की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने कुल 15 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन सात नामजद आरोपी अब भी फरार हैं।
गिरफ्तारी की धीमी रफ्तार पर नाराजगी
आरोपियों की गिरफ्तारी में हो रही देरी से जाट समाज और छात्र संगठनों में भारी रोष है। अंतरराष्ट्रीय जाट संसद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनु चौधरी ने भी इस मुद्दे पर चेतावनी दी है। समाज का कहना है कि पुलिस मुख्य आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही है। शुक्रवार की महापंचायत में रणनीति बनाई गई कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो विधानसभा कूच या बड़े प्रदेशव्यापी प्रदर्शन की घोषणा की जाएगी।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
महापंचायत के मद्देनजर एसएसपी प्रमेन्द्र डोबाल ने आशारोड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात किया है। भीड़ प्रबंधन और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पीएसी की कंपनियां भी बुलाई गई हैं। देहरादून-दिल्ली हाईवे पर यातायात को सुचारू रखना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
निष्कर्ष
दिव्यांशु हत्याकांड अब केवल एक क्राइम रिपोर्ट नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुका है। राकेश टिकैत की एंट्री ने इसे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के साझा आंदोलन में तब्दील कर दिया है। अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री के साथ होने वाली प्रस्तावित बैठक पर टिकी हैं। क्या सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाकर इस आक्रोश को शांत कर पाएगी? यह आने वाले कुछ घंटों में साफ हो जाएगा।







