देहरादून के शहर काज़ी और जमीअत उलमा-ए-हिन्द उत्तराखंड के प्रदेश उपाध्यक्ष, मौलाना मोहम्मद अहमद कासमी के निधन से शहर शोक में डूब गया। दिल का दौरा पड़ने से नजीबाबाद में हुए उनके इंतकाल की खबर फैलते ही शहरभर से लोग उनके अंतिम दर्शनों के लिए उमड़ पड़े। रविवार सुबह से ही भंडारीबाग स्थित उनके निवास पर लोगों का तांता लगा रहा।
पलटन बाजार स्थित जामा मस्जिद में नमाज़-ए-जनाज़ा अदा की गई, जिसमें भारी संख्या में लोग शामिल हुए। मस्जिद से लेकर चंद्रनगर कब्रिस्तान तक उनकी अंतिम यात्रा में इंसानों का ऐसा हुजूम देखने को मिला, मानो पूरा शहर उन्हें विदाई देने निकल आया हो। नम आंखों से लोग उनके जनाज़े के साथ चलते हुए चंदरनगर कब्रिस्तान पहुंचे, जहां उन्हें सपुर्द-ए-ख़ाक किया गया।
राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक संगठनों सहित शहरभर की अनेक हस्तियों ने मौलाना कासमी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उनकी विद्वता, सादगी और समाज सेवा से जुड़े योगदानों को याद करते हुए लोगों ने कहा कि उनका जाना देहरादून के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
मौलाना मोहम्मद अहमद कासमी 75 वर्ष के थे और लंबे समय से शहर के धार्मिक एवं सामाजिक मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। उनकी अंतिम यात्रा एक ऐतिहासिक दृश्य बन गई, जिसने यह साबित किया कि वे केवल एक धार्मिक शख्सियत ही नहीं, बल्कि पूरे शहर के दिलों में बसने वाले इंसान थे।
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