सहारनपुर:
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में प्रेम, धोखे और कत्ल की एक ऐसी खौफनाक दास्तां सामने आई है, जिसने पुलिस और जनता दोनों को हिलाकर रख दिया है। मिर्जापुर थाना क्षेत्र के नौगांवा गांव के पास रजबहे में 27 अप्रैल को मिला राखी कश्यप का शव महज एक हत्या नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा था। पुलिस को घटनास्थल से मिले साक्ष्य—प्लास्टिक का बोरा और रस्सी—इस बात की गवाही दे रहे हैं कि हत्यारों ने राखी को बेरहमी से मौत के घाट उतारने के बाद सबूत मिटाने की पूरी कोशिश की थी।
गला रेतकर हत्या और साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश
राखी कश्यप की हत्या किसी पेशेवर अपराधी की तरह की गई। जांच के अनुसार, हत्यारों ने पहले धारदार हथियार से राखी का गला रेता और फिर उसकी पहचान छिपाने व शव को ठिकाने लगाने के लिए उसे चौकर के एक प्लास्टिक बोरे में ठूंस दिया। शव बाहर न निकले, इसके लिए बोरे को रस्सी से मजबूती से बांधा गया और फिर सुनसान अंधेरे का फायदा उठाकर उसे रजबहे (नहर) में फेंक दिया गया। पुलिस को मौके से बरामद बोरा और रस्सी अब इस हत्याकांड के सबसे बड़े सुराग बन गए हैं।
विक्रांत और राखी: तीसरी शादी का सपना और अनसुलझे सवाल
इस पूरी कहानी का दूसरा सिरा डूडा (DUDA) के शहर मिशन प्रबंधक विक्रांत से जुड़ा है, जो मूल रूप से प्रयागराज के रहने वाले थे। राखी और विक्रांत के बीच प्रेम-प्रसंग की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि राखी की पहले दो शादियां हो चुकी थीं और दोनों ही बार उसका तलाक हो गया था। अब वह विक्रांत के साथ तीसरी शादी करने की योजना बना रही थी। विक्रांत भी अपनी पत्नी प्राची और बेटी के होने के बावजूद राखी के बेहद करीब था।
वो रहस्यमयी पार्टी और 4 लाख रुपये का राज
विक्रांत के लापता होने से ठीक पहले राखी के घर पर एक पार्टी हुई थी, जिसमें विक्रांत समेत कुछ अन्य लोग शामिल थे। इसी पार्टी के दौरान विक्रांत को गोली लगने की बात भी सामने आई है, जिसे राखी ने शुरू में पुलिस को ‘पारिवारिक विवाद’ बताकर गुमराह कर दिया था। इसके अलावा, विक्रांत ने लापता होने से महज दो दिन पहले अपने बैंक खाते से 4 लाख रुपये निकाले थे। यह बड़ी रकम किस काम के लिए निकाली गई और अब वह कहां है, यह पुलिस के लिए बड़ी गुत्थी बनी हुई है।
पुलिस की चूक या राखी की चुप्पी?
23 अप्रैल को जब विक्रांत की पत्नी ने गुमशुदगी दर्ज कराई, तब पुलिस ने शक के आधार पर राखी को कोतवाली बुलाकर पूछताछ की थी। पुलिस ने उसकी लाइसेंसी पिस्टल भी जमा करा ली थी, लेकिन राखी ने उस वक्त कुछ नहीं उगला। जानकारों का मानना है कि अगर पुलिस उस समय कड़ाई से पूछताछ करती, तो शायद आज राखी जिंदा होती और विक्रांत का सुराग भी मिल जाता। पूछताछ के अगले ही दिन राखी खुद भी संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई और फिर उसकी लाश ही मिली।
अज्ञात शवों की पहचान: पुलिस के लिए बड़ी चुनौती
सहारनपुर और आसपास के इलाकों में पिछले एक-दो महीनों में 10 से अधिक अज्ञात शव मिले हैं, जिनमें से अधिकांश की हत्या की गई थी। राखी के मामले में भी पहचान करना शुरुआत में मुश्किल था, लेकिन गहन जांच के बाद कड़ियां जुड़ती गईं। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या विक्रांत की हत्या हो चुकी है या वह इस पूरी साजिश का हिस्सा है?
घटनाक्रम का सारांश:
- 23 अप्रैल: विक्रांत की पत्नी प्राची ने गुमशुदगी दर्ज कराई।
- पूछताछ: पुलिस ने राखी को बुलाया, लेकिन उसने सच नहीं बताया।
- 27 अप्रैल: नौगांवा के रजबहे में बोरे में बंद राखी का शव मिला।
- मुख्य साक्ष्य: चौकर का बोरा, रस्सी और 4 लाख रुपये की निकासी।
पुलिस जांच की दिशा
मिर्जापुर पुलिस और एसओजी (SOG) की टीमें अब बरामद बोरे और रस्सी के सोर्स का पता लगा रही हैं। साथ ही, उन मोबाइल नंबरों को खंगाला जा रहा है जिनसे राखी और विक्रांत की आखिरी बार बात हुई थी। विक्रांत की पत्नी, जो नोएडा में कार्यरत हैं, उनसे भी जानकारी जुटाई जा रही है।
यह हत्याकांड न केवल अवैध संबंधों के खतरनाक अंजाम को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि अपराधी अब साक्ष्य मिटाने के लिए कितने क्रूर तरीके अपना रहे हैं। पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस खूनी खेल के सभी किरदारों को बेनकाब कर दिया जाएगा।
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