गैस रिसाव बना हादसे का कारण; घायलों में महिलाएं और बच्चे शामिल, जिला अस्पताल में चल रहा उपचार
रुद्रपुर (उत्तराखंड)।
उत्तराखंड के जनपद उधमसिंह नगर अंतर्गत रुद्रपुर के ट्रांजिट कैंप इलाके से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। बुधवार सुबह एक किराए के मकान में खाना बनाते समय अचानक रसोई गैस सिलेंडर में विस्फोट हो गया। इस धमाके और उसके बाद लगी भीषण आग की चपेट में आने से पांच लोग गंभीर रूप से झुलस गए। घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। आनन-फानन में पुलिस और अग्निशमन विभाग को सूचना दी गई, जिसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।
सुबह की शांति धमाके में बदली
मिली जानकारी के अनुसार, ट्रांजिट कैंप थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर नौ, चामुंडा मंदिर के पास स्थित अरुण गुप्ता के मकान में यह हादसा हुआ। अरुण गुप्ता ने अपने मकान के कमरों को किराए पर दे रखा है, जहाँ विभिन्न क्षेत्रों के श्रमिक और उनके परिवार रहते हैं। बुधवार सुबह करीब 9:00 बजे, जब लोग अपने दैनिक कार्यों और काम पर जाने की तैयारी में जुटे थे, तभी अचानक एक कमरे से जोरदार धमाके की आवाज आई। धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास के कमरों में मौजूद लोग भी सहम गए।
गैस रिसाव बना काल
किरायेदार राम आसरे (निवासी पीलीभीत) ने बताया कि हादसे की मुख्य वजह गैस रिसाव (Gas Leakage) थी। सुबह सिलेंडर से गैस का रिसाव हो रहा था और जैसे ही आग जलाई गई, सिलेंडर ने आग पकड़ ली और देखते ही देखते उसमें ब्लास्ट हो गया। धमाके के बाद कमरे और बरामदे में आग की लपटें फैल गईं। जो लोग उस समय बरामदे में खड़े थे या कमरों के बाहर थे, वे सीधे तौर पर आग की चपेट में आ गए।
घायलों की स्थिति और रेस्क्यू ऑपरेशन
हादसे की सूचना मिलते ही ट्रांजिट कैंप थाना प्रभारी निरीक्षक मोहन चंद्र पांडेय और अपर उप निरीक्षक हृदयेश परिहार डायल 112 की टीम के साथ मौके पर पहुंचे। साथ ही दमकल विभाग की गाड़ियां भी घटनास्थल पर पहुंच गईं। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से झुलसे हुए लोगों को तुरंत मलबे और आग के बीच से निकाला और एम्बुलेंस के जरिए जिला अस्पताल भिजवाया।
हादसे में घायल हुए मुख्य व्यक्ति:
- देवकी: पत्नी राम आसरे (46% झुलसीं)
- अनीता: पत्नी सत्यवीर, निवासी पचपेड़ा, पीलीभीत (20% झुलसीं)
- संगीता देवी: पुत्री केशरी लाल, निवासी बरेली (15% झुलसीं)
- पारुल: पुत्री सत्यवीर (30% झुलसीं)
जिला अस्पताल में तैनात डॉ. जुनैद ने बताया कि घायलों का उपचार प्राथमिकता के आधार पर शुरू कर दिया गया है। देवकी और पारुल की स्थिति अपेक्षाकृत अधिक गंभीर है क्योंकि वे काफी ज्यादा प्रतिशत तक झुलस चुकी हैं। डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनकी निगरानी कर रही है।
प्रशासन और दमकल विभाग की मुस्तैदी
घटना के तुरंत बाद अग्निशमन विभाग की टीम ने मोर्चा संभाला और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। यदि समय रहते आग न बुझाई जाती, तो घनी आबादी वाले इस इलाके में बड़ा नुकसान हो सकता था। पुलिस प्रशासन ने मकान मालिक और अन्य किरायेदारों से पूछताछ की है ताकि हादसे के अन्य पहलुओं की जांच की जा सके।
सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
रुद्रपुर का ट्रांजिट कैंप इलाका अपनी घनी आबादी और छोटे-छोटे कमरों में रहने वाले प्रवासियों के लिए जाना जाता है। इस हादसे ने एक बार फिर गैस सिलेंडरों के रख-रखाव और तंग गलियों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि गैस रिसाव की स्थिति में जागरूकता की कमी अक्सर ऐसे बड़े हादसों को निमंत्रण देती है।
निष्कर्ष
फिलहाल, सभी घायलों का उपचार जारी है और पुलिस मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे गैस उपकरणों के इस्तेमाल में सावधानी बरतें और रिसाव महसूस होने पर तुरंत खिड़की-दरवाजे खोलकर गैस एजेंसी को सूचित करें।







