कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद अब दोनों राज्यों में सरकार गठन की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर शुरू हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मिली प्रचंड जीत के बाद गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि बंगाल की कमान किसके हाथों में होगी? इस बीच, भाजपा आलाकमान ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लेते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पश्चिम बंगाल का केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।
अमित शाह और जेपी नड्डा को मिली बड़ी जिम्मेदारी
भाजपा संसदीय दल ने सरकार बनाने की कवायद को आधिकारिक रूप देने के लिए दिग्गज नेताओं को मैदान में उतारा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पश्चिम बंगाल के लिए मुख्य पर्यवेक्षक बनाया गया है, जबकि ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को सह-पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी दी गई है।
वहीं, असम की बात करें तो वहां सरकार गठन की प्रक्रिया की निगरानी के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा को पर्यवेक्षक और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को सह-पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। ये पर्यवेक्षक नवनिर्वाचित विधायकों के साथ बैठक करेंगे और विधायक दल के नेता के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
बंगाल में 9 मई को होगा शपथ ग्रहण
पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि राज्य में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 9 मई को आयोजित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक पल के लिए कोलकाता में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। हालांकि, पार्टी ने अभी तक आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर नहीं लगाई है, लेकिन अमित शाह की नियुक्ति यह साफ करती है कि फैसला बेहद चौंकाने वाला और रणनीतिक हो सकता है।
सुवेंदु अधिकारी का नाम सबसे आगे?
राजनीतिक गलियारों में मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। सबसे प्रबल दावेदार के रूप में सुवेंदु अधिकारी का नाम उभरकर सामने आ रहा है। ममता बनर्जी को उनके ही गढ़ में कड़ी टक्कर देने और पार्टी की जीत में बड़ी भूमिका निभाने के कारण सुवेंदु को सीएम पद का स्वाभाविक हकदार माना जा रहा है।
हालांकि, भाजपा की कार्यशैली को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि ऊंट किस करवट बैठेगा। पार्टी अक्सर अपने फैसलों से राजनीतिक विश्लेषकों को चौंकाती रही है। मुख्यमंत्री फेस को लेकर जारी इस सस्पेंस का अंत अमित शाह की विधायकों के साथ होने वाली बैठक के बाद ही होगा।
असम में भी हलचल तेज
असम में भाजपा ने अपनी सत्ता बरकरार रखते हुए एक बार फिर बहुमत हासिल किया है। जेपी नड्डा और नायब सिंह सैनी की उपस्थिति में विधायक दल की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें नेता के नाम पर अंतिम मुहर लगेगी। असम में नेतृत्व को लेकर स्थिति बंगाल के मुकाबले अधिक स्पष्ट मानी जा रही है, लेकिन औपचारिकताएं पूरी होने का इंतजार है।
भाजपा की रणनीतिक जीत के मायने
बंगाल और असम में भाजपा की यह जीत न केवल सांगठनिक मजबूती को दर्शाती है, बल्कि आने वाले समय के लिए क्षेत्रीय राजनीति की दिशा भी तय करती है। पर्यवेक्षकों के रूप में अमित शाह और जेपी नड्डा जैसे कद्दावर नेताओं को भेजना यह संकेत देता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय नेतृत्व इन राज्यों में शासन की एक मजबूत और पारदर्शी नींव रखना चाहते हैं।
निष्कर्ष: सस्पेंस बरकरार
फिलहाल सबकी नजरें कोलकाता पर टिकी हैं। क्या सुवेंदु अधिकारी ही बंगाल के नए ‘कैप्टन’ होंगे या दिल्ली से कोई नया नाम सामने आएगा? 9 मई की तारीख नजदीक है और अगले 48 घंटे बंगाल की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं।
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