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जॉन टर्नस होंगे एप्पल के नए सीईओ, टिम कुक ने दिया इस्तीफा

On: April 21, 2026 2:39 AM
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ohn Ternus and Tim Cook Apple CEO transition news

​टेक डेस्क, नई दिल्ली। दुनिया की सबसे मूल्यवान टेक कंपनी, एप्पल (Apple) में एक बड़े नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट ने वैश्विक बाजार को चौंका दिया है। लगभग 15 वर्षों तक कंपनी को सफलता के शिखर पर रखने वाले टिम कुक (Tim Cook) ने अपने पद से हटने के संकेत दिए हैं। उनकी जगह अब कंपनी की हार्डवेयर इंजीनियरिंग के दिग्गज जॉन टर्नस (John Ternus) को सौंपी जा सकती है।

​एक युग का समापन: टिम कुक का ऐतिहासिक सफर

​वर्ष 2011 में जब एप्पल के दूरदर्शी सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स का निधन हुआ, तब पूरी दुनिया को संदेह था कि क्या कोई उनकी कमी को पूरा कर पाएगा। टिम कुक ने न केवल उन संदेहों को गलत साबित किया, बल्कि एप्पल को $4 ट्रिलियन (4 लाख करोड़ डॉलर) के बाजार मूल्यांकन तक पहुँचाने वाले पहले सीईओ बने।

​कुक के नेतृत्व में एप्पल ने न केवल आईफोन को एक स्टेटस सिंबल बनाया, बल्कि एप्पल वॉच, एयरपॉड्स और सर्विसेज (Apple Music, iCloud) जैसे सेगमेंट को अरबों डॉलर के बिजनेस में बदल दिया। उन्होंने कंपनी की निर्भरता चीन से घटाकर भारत जैसे उभरते बाजारों पर केंद्रित की, जिससे भारत आज एप्पल का एक बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बनकर उभरा है।

​कौन हैं जॉन टर्नस? नए उत्तराधिकारी की प्रोफाइल

​जॉन टर्नस वर्तमान में एप्पल में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (हार्डवेयर इंजीनियरिंग) के पद पर तैनात हैं। 50 वर्षीय टर्नस को एप्पल के भीतर एक ‘शांत और भरोसेमंद’ लीडर माना जाता है।

  • ​अनुभव: टर्नस 2001 में एप्पल की प्रोडक्ट डिजाइन टीम में शामिल हुए थे।
  • ​उपलब्धियां: पिछले दो दशकों में उन्होंने हर बड़े एप्पल उत्पाद पर काम किया है। आईपैड के पहले मॉडल से लेकर हालिया आईफोन और मैक कंप्यूटरों में ट्रांजिशन (M-Series Chips) की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी।
  • ​भरोसा: टिम कुक और बोर्ड के सदस्यों के बीच टर्नस की साख बहुत मजबूत है। उन्हें एक ऐसा व्यक्ति माना जाता है जो एप्पल की मूल संस्कृति (Design and Quality) को समझते हैं।

​टिम कुक का भावुक विदाई संदेश

​65 वर्षीय टिम कुक ने कथित तौर पर एक बयान में अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा:

​”एपल का सीईओ बनना और इस असाधारण कंपनी का नेतृत्व करना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य रहा है। मैं इस टीम के नवाचार और जुनून का आभारी हूँ। हालांकि मैं सीईओ का पद छोड़ रहा हूँ, लेकिन एप्पल के भविष्य के प्रति मेरा लगाव हमेशा बना रहेगा।”

​रिपोर्ट्स के अनुसार, पद छोड़ने के बाद कुक कंपनी के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की भूमिका निभा सकते हैं, जहाँ वे रणनीतिक सलाह देना जारी रखेंगे।

​बदलाव की जरूरत क्यों?

​एप्पल अब केवल एक हार्डवेयर कंपनी नहीं रही। एआई (Artificial Intelligence) के दौर में कंपनी ‘एप्पल इंटेलिजेंस’ पर दांव लगा रही है। जॉन टर्नस को सीईओ बनाने के पीछे का मुख्य कारण उनकी तकनीकी समझ है। उन्हें आईफोन की हर बारीकी का पता है, और टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि एप्पल के अगले बड़े उत्पाद (जैसे- एप्पल कार या एडवांस्ड विजन प्रो) को बाजार में उतारने के लिए टर्नस जैसे हार्डवेयर एक्सपर्ट की ही जरूरत है।

​भारत के लिए इसके क्या मायने हैं?

​टिम कुक के कार्यकाल में भारत एप्पल की प्राथमिकता बना। मुंबई और दिल्ली में स्टोर खुलने से लेकर आईफोन 15 और 16 की असेंबली भारत में शुरू होना कुक की बड़ी उपलब्धि रही। जॉन टर्नस के आने के बाद भी इस नीति में बदलाव की उम्मीद कम है, क्योंकि भारत अब एप्पल की ग्लोबल सप्लाई चेन का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है।

​निष्कर्ष: भविष्य की चुनौतियां

​जॉन टर्नस के सामने चुनौतियां कम नहीं होंगी। एक तरफ चीन के साथ ट्रेड वॉर और दूसरी तरफ गूगल व मेटा से एआई की रेस में आगे निकलना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। हालांकि, टर्नस का ट्रैक रिकॉर्ड बताता है कि वे दबाव में बेहतरीन काम करने के आदी हैं।
​दुनिया अब 1 सितंबर (संभावित तिथि) का इंतजार कर रही है, जब आधिकारिक तौर पर एप्पल के इस नए अध्याय की शुरुआत होगी।

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​मुख्य बिंदु एक नज़र में:

  • ​सीईओ: जॉन टर्नस (1 सितंबर से संभावित)।
  • ​टिम कुक: एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की भूमिका में रहेंगे।
  • ​टर्नस की ताकत: हार्डवेयर इंजीनियरिंग और भविष्य की चिप टेक्नोलॉजी में विशेषज्ञता।
  • ​एप्पल की वैल्यू: 4 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार करने वाली पहली कंपनी।

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