Delhi Jal Board Scam मामले में दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने मंगलवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन सहित छह प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के टेंडर आवंटन में तकनीकी नियमों को जानबूझकर बदला गया, प्रतिस्पर्धा को सीमित किया गया और बड़े पैमाने पर रिश्वतखोरी की गई।
गिरफ्तार किए गए लोगों में पूर्व जल मंत्री सत्येंद्र जैन के अलावा दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और आईएएस अधिकारी उदित प्रकाश राय, पूर्व संविदा सलाहकार अंकित श्रीवास्तव, एएन एंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर नागेंद्र यादव, यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के मालिक राजा कुमार कुर्रा और सृजनहार के प्रोपराइटर पंकज वर्मा शामिल हैं।
Delhi Jal Board Scam में एफआईआर और जांच का आधार
एसीबी के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय (Directorate of Vigilance) की शिकायत के बाद दर्ज की गई एफआईआर संख्या 10/2024 की जांच के आधार पर की गई है। सतर्कता निदेशालय ने इस संबंध में 11 मई 2024 को आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।
जांच एजेंसी ने महीनों तक दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड्स और तकनीकी रिपोर्टों का गहन विश्लेषण किया। एजेंसी का कहना है कि पर्याप्त साक्ष्य और पूछताछ के आधार पर कानून सम्मत तरीके से सभी 6 आरोपियों को 18 अगस्त को हिरासत में लिया गया।
Delhi Jal Board Scam में टेंडर की शर्तों में हेरफेर के आरोप
जांच एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली जल बोर्ड के एसटीपी उन्नयन और क्षमता विस्तार से जुड़े प्रोजेक्ट्स में गंभीर तकनीकी अनियमितताएं पाई गईं:
- पायलट अध्ययन की अनदेखी: टेंडर जारी करने से पहले प्रस्तावित अनिवार्य पायलट अध्ययन नहीं कराया गया।
- प्रतिबंधात्मक शर्तें: टेंडर दस्तावेजों में ऐसी शर्तें जोड़ी गईं, जिससे अधिकांश योग्य फर्में बाहर हो गईं और एक विशेष तकनीक प्रदाता कंपनी को अनुचित लाभ मिला।
- गुणवत्ता मानकों से समझौता: पानी के ट्रीटमेंट से जुड़े अनिवार्य और तय मानकों को तकनीकी शर्तों से बाहर रखा गया।
इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच के दौरान यह बात सामने आई कि निजी फर्मों के प्रतिनिधियों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के बीच टेंडर के ड्राफ्ट, शुद्धिपत्र (Corrigendum) और तकनीकी विशिष्टताओं को लेकर सीधा संवाद हो रहा था। निजी पक्षों के सुझावों के आधार पर ही टेंडर की अंतिम शर्तों को संशोधित किया गया था।
Delhi Jal Board Scam में 1.52 करोड़ रुपये के मनी ट्रेल का खुलासा
वित्तीय जांच के दौरान एसीबी को रिश्वत और कमीशन के पैसों के संदिग्ध लेन-देन के मजबूत सबूत मिले हैं। जांच के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- शैल और मध्यस्थ कंपनियों का उपयोग: यूरोटेक से जुड़ी संस्थाओं से धनराशि पहले एएन एंटरप्राइजेज के खातों में भेजी गई।
- अधिकारियों और परिजनों के खातों में ट्रांसफर: इसके बाद यह कमीशन सरकारी अधिकारियों और उनके करीबी रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर किया गया।
- अचल संपत्ति में निवेश: जांच में सामने आया कि तत्कालीन डीजेबी सीईओ उदित प्रकाश राय और उनके परिजनों के बैंक खातों में करीब 1.52 करोड़ रुपये पहुंचे, जिसका उपयोग कथित तौर पर अचल संपत्तियों की खरीद में किया गया।
मामले में आगे की जांच और वित्तीय पड़ताल
एसीबी के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में वित्तीय लेन-देन, मनी लॉन्ड्रिंग और अपराध से अर्जित अन्य संपत्तियों की पहचान के लिए जांच अभी जारी है। एजेंसी अन्य संबंधित अधिकारियों, सलाहकारों और निजी ठेकेदारों की भूमिका की भी जांच कर रही है ताकि घोटाले के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।








