गदरपुर (उत्तराखंड): छोटी-छोटी बातें जब अहं और गुस्से का रूप ले लेती हैं, तो हंसते-खेलते परिवार कैसे उजड़ जाते हैं, इसकी एक दर्दनाक बानगी गदरपुर में देखने को मिली। यहाँ महज़ एक गैस सिलेंडर को लेकर हुए मामूली विवाद ने एक 29 वर्षीय युवक की जान ले ली। पत्नी की जिद और घरेलू तकरार से आहत होकर युवक ने मौत को गले लगा लिया, जिससे पूरे इलाके में शोक की लहर है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, गदरपुर के ग्राम पिपलिया नंबर-एक निवासी किशन विश्वास (29 वर्ष), जो पेशे से फॉल्स सीलिंग (False Ceiling) का कार्य करते थे, का अपनी पत्नी रीना के साथ पिछले कुछ दिनों से विवाद चल रहा था। विवाद की जड़ घर में खत्म हुआ रसोई गैस सिलेंडर था।
बुधवार की रात यह तकरार उस समय और बढ़ गई जब पत्नी ने दो टूक शब्दों में कह दिया, “जब सिलेंडर आएगा, तभी खाना बनाऊंगी।” यह बात किशन को इतनी नागवार गुजरी कि वे गुस्से में घर की छत पर बने कमरे में चले गए और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया।
मां ने देखा खौफनाक मंजर
काफी देर तक जब किशन नीचे नहीं आए, तो उनकी मां उन्हें देखने छत पर स्थित कमरे में पहुंचीं। कमरे का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। किशन पंखे के कुंडे से फंदे पर लटके हुए थे। मां की चीख सुनकर परिवार के अन्य सदस्य भी मौके पर पहुंच गए। आनन-फानन में किशन को फंदे से उतारकर जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें ‘ब्रॉट डेड’ (Dead on Arrival) घोषित कर दिया।
पुलिस की कार्रवाई और परिवार का हाल
घटना की सूचना मिलते ही सिडकुल चौकी पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। गुरुवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
पुलिस का बयान: “शुरुआती जांच में मामला घरेलू विवाद और गुस्से में की गई आत्महत्या का लग रहा है। पत्नी और पति के बीच सिलेंडर लाने को लेकर कहासुनी हुई थी। फिलहाल मामले की गहनता से जांच की जा रही है।”
ये भी पढ़े➜टिहरी में मातम: अंतिम संस्कार से लौट रहे ग्रामीणों की गाड़ी खाई में गिरी, 8 की दर्दनाक मौत
पीछे छूट गया रोता-बिलखता परिवार
किशन की मौत ने एक झटके में दो मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया छीन लिया है। करीब 8 साल पहले किशन और रीना का विवाह हुआ था। परिवार में किशन के अलावा तीन और भाई-बहन हैं। इस आत्मघाती कदम के बाद पत्नी रीना और मां का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव वाले स्तब्ध हैं कि क्या वाकई एक गैस सिलेंडर जैसी मामूली बात किसी की जान लेने का कारण बन सकती है?
विशेषज्ञों की राय: गुस्से पर नियंत्रण क्यों है जरूरी?
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं ‘इम्पल्सिव सुसाइड’ (Impulsive Suicide) का हिस्सा होती हैं, जहां व्यक्ति क्षणिक गुस्से में आकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर लेता है।
- संवाद की कमी: परिवारों में आपसी बातचीत और धैर्य का अभाव ऐसे मामलों को जन्म देता है।
- आर्थिक तनाव: कई बार सिलेंडर या राशन जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी व्यक्ति को मानसिक रूप से कमजोर कर देती है।
- समाधान: छोटी तकरार को तूल देने के बजाय, परिवार के अन्य सदस्यों को मध्यस्थता कर मामले को शांत करना चाहिए।
निष्कर्ष
गदरपुर की यह घटना समाज के लिए एक सबक है। जीवन की छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान आपसी सूझबूझ से निकाला जा सकता है। एक पल का गुस्सा न केवल एक जान लेता है, बल्कि पीछे पूरे परिवार को उम्र भर का दर्द दे जाता है। प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं को भी मानसिक स्वास्थ्य और घरेलू कलह के समाधान के लिए जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।







