टिहरी/देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वागत के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री जल्द ही टिहरी गढ़वाल का दौरा करेंगे, जहाँ वे राष्ट्र को एक ऐसी महापरियोजना समर्पित करेंगे जो न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे उत्तर भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी। प्रधानमंत्री यहाँ लगभग 8,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट (PSP) परियोजना का औपचारिक लोकार्पण करेंगे। इस परियोजना के पूर्ण होते ही यह एशिया की सबसे बड़ी पीएसपी जल विद्युत परियोजना का गौरव हासिल कर लेगी।
एशिया की सबसे बड़ी जल विद्युत उपलब्धि
टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड (THDC) द्वारा विकसित यह परियोजना आधुनिक इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसकी कुल स्थापित क्षमता 1000 मेगावाट है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के अंतर्गत 250-250 मेगावाट की चार इकाइयां स्थापित की गई हैं।
परियोजना की विशेष बातें:
- चौथी यूनिट का लोकार्पण: परियोजना की तीन इकाइयां पहले ही शुरू की जा चुकी हैं, जिनका उद्घाटन केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा किया गया था। अब प्रधानमंत्री मोदी चौथी और अंतिम यूनिट का औपचारिक उद्घाटन कर इस पूरी परियोजना को देश को सौंपेंगे।
- औपचारिक शुरुआत: हालाँकि अनौपचारिक रूप से परियोजना ने काम करना शुरू कर दिया है, लेकिन पीएम मोदी के हाथों इसका विधिवत उद्घाटन इसे एक ऐतिहासिक क्षण बना देगा।
क्या है पंप स्टोरेज प्लांट (PSP) तकनीक?
पंप स्टोरेज प्लांट को ‘विशाल प्राकृतिक बैटरी’ के रूप में देखा जा सकता है। यह तकनीक ग्रिड स्थिरता बनाए रखने के लिए दुनिया भर में सबसे कारगर मानी जाती है। इसमें दो जलाशयों (एक ऊपर और एक नीचे) का उपयोग होता है।
- अतिरिक्त बिजली का उपयोग: जब ग्रिड में बिजली की मांग कम होती है (जैसे रात के समय), तब अतिरिक्त बिजली का उपयोग कर निचले जलाशय से पानी को पंप करके ऊपरी जलाशय में पहुँचाया जाता है।
- पीक डिमांड में उत्पादन: जब बिजली की मांग चरम पर होती है (जैसे शाम के समय), तो उसी पानी को वापस नीचे छोड़ा जाता है, जिससे टर्बाइन घूमते हैं और तुरंत बिजली का उत्पादन शुरू हो जाता है।
उत्तर भारत को मिलेगा ‘पावर बैकअप’
इस परियोजना के पूर्ण संचालन से बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता कई गुना बढ़ जाएगी। पहाड़ी राज्यों में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच अक्सर असंतुलन देखा जाता है, जिसे यह प्रोजेक्ट पूरी तरह समाप्त करने की क्षमता रखता है। यह परियोजना न केवल उत्तराखंड के आर्थिक विकास को गति देगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के लक्ष्यों को प्राप्त करने में भारत की प्रतिबद्धता को भी मजबूती प्रदान करेगी।
पहले टल गया था कार्यक्रम
ज्ञात हो कि इस परियोजना का लोकार्पण पिछले दिनों दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के समय ही प्रस्तावित था। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने इसकी पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन अंतिम क्षणों में कुछ कारणों से इसे स्थगित कर दिया गया था। तब यह निर्णय लिया गया था कि प्रधानमंत्री स्वयं टिहरी पहुँचकर इस विशेष उपलब्धि का जश्न मनाएंगे।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री का यह दौरा उत्तराखंड के प्रति उनके विशेष लगाव और राज्य के विकास के प्रति उनकी प्राथमिकताओं को दर्शाता है। 8,000 करोड़ रुपये की यह सौगात टिहरी बांध के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ेगी और उत्तराखंड को देश के ‘ऊर्जा प्रदेश’ के रूप में नई पहचान दिलाएगी।






