आगरा: उत्तर प्रदेश के ताजनगरी आगरा से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने आधुनिक समाज की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहाँ एक ओर पूरा देश ‘मदर्स डे’ पर मातृ शक्ति के सम्मान में कसीदे पढ़ रहा था, वहीं आगरा के एत्माद्दौला क्षेत्र की सड़कों पर एक मानसिक रूप से बीमार महिला निर्वस्त्र अवस्था में भटकती रही। इस विचलित करने वाली स्थिति में मदद के लिए हाथ बढ़ाने के बजाय, तमाशबीन बने लोग अपने मोबाइल फोन से वीडियो बनाने में मशगूल दिखे।
तमाशबीन बना समाज, वीडियो बनाने की मची होड़
घटना रविवार शाम करीब साढ़े सात बजे की है। मूल रूप से फिरोजाबाद की रहने वाली एक महिला, जो पिछले दो साल से एत्माद्दौला क्षेत्र में अपने पति के साथ किराए के मकान में रह रही है, अचानक मानसिक संतुलन खोने के कारण निर्वस्त्र हालत में घर से बाहर निकल आई। महिला नुनिहाई से रामबाग जाने वाले मुख्य मार्ग से होते हुए नरायच पुलिया तक पहुँच गई।
इस दौरान सड़क पर भारी भीड़ मौजूद थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला के हाथ में एक डंडा था और वह बदहवास स्थिति में चल रही थी। समाज की संवेदनहीनता का आलम यह था कि लोग उसे ढंकने या उसकी सहायता करने के बजाय रुक-रुक कर उसका वीडियो बनाने लगे। कुछ लोग तो इस दुखद स्थिति को देखकर मजाक उड़ाते भी नजर आए। यह घटना दर्शाती है कि डिजिटल युग में ‘वायरल’ होने की होड़ ने मानवीय संवेदनाओं को कितना पीछे छोड़ दिया है।
राहगीर और पुलिस की तत्परता ने बचाई गरिमा
जब समाज का एक बड़ा हिस्सा तमाशबीन बना हुआ था, तभी मानवता का परिचय देते हुए एक राहगीर और बजरंग दल के पदाधिकारी अनिल शर्मा आगे आए। उन्होंने तत्काल अपने गमछे से महिला के तन को ढंकने का प्रयास किया और बिना देरी किए पुलिस को इस घटना की सूचना दी।
सूचना मिलते ही थाना एत्माद्दौला की महिला पुलिसकर्मी मौके पर पहुँचीं। महिला दरोगा स्वाति वर्मा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पास की एक दुकान से नए कपड़े खरीदे और महिला को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर कपड़े पहनाए। पुलिस की इस संवेदनशीलता और सक्रियता की अब हर तरफ सराहना हो रही है।
मानसिक बीमारी और पुलिस की जांच
डीसीपी सिटी सैयद अब्बास अली के अनुसार, महिला की स्थिति काफी नाजुक थी। पूछताछ के दौरान वह लगातार अपने बयान बदल रही थी। कभी उसने पुलिस उत्पीड़न का आरोप लगाया, तो कभी मकान मालिक और अपनी बेटी के साथ हो रही परेशानियों का जिक्र किया।
पुलिस ने जब महिला के पति से संपर्क किया, तो सच्चाई सामने आई। आटा मिल में काम करने वाले उसके पति ने बताया कि उसकी पत्नी काफी समय से मानसिक रूप से बीमार है और उसका इलाज चल रहा है। रविवार शाम वह अचानक घर से निकल गई थी, जिसका उन्हें पता नहीं चल सका। पुलिस ने कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद महिला को उसके पति के सुपुर्द कर दिया है।
एक गंभीर सामाजिक प्रश्न
आगरा की यह घटना हमारे समाज के लिए एक आईना है। क्या हम इतने संवेदनहीन हो चुके हैं कि किसी की लाचारी हमारे लिए मनोरंजन का साधन बन गई है? मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति के प्रति सहानुभूति दिखाने के बजाय उसका वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर साझा करना न केवल अनैतिक है, बल्कि एक कानूनी अपराध की श्रेणी में भी आता है।
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प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि ऐसी स्थितियों में वीडियो बनाने के बजाय तुरंत पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112 पर सूचना दें और मानवीय आधार पर मदद का प्रयास करें। महिला पुलिसकर्मियों की इस सूझबूझ भरी कार्रवाई ने न केवल महिला की गरिमा बचाई, बल्कि खाकी का मानवीय चेहरा भी पेश किया है।









