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उत्तराखंड के रवि टम्टा ने रचा इतिहास: बनाई भारत की स्वदेशी उड़ने वाली कार ‘हपिडा स्काईनेक्स’, अल्मोड़ा में सफल टेस्ट फ्लाइट

On: August 7, 2026 8:21 AM
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अल्मोड़ा (उत्तराखंड)।

पहाड़ों की वादियों से ताल्लुक रखने वाले युवाओं का प्रतिभा के मामले में कोई सानी नहीं है। इस बात को एक बार फिर सच कर दिखाया है उत्तराखंड के अल्मोड़ा निवासी युवा नवप्रवर्तक (Innovator) रवि टम्टा ने। रवि ने स्वदेशी तकनीक से तैयार अपने पर्सनल एरियल व्हीकल (Personal Aerial Vehicle / उड़ने वाली कार) ‘हपिडा स्काईनेक्स’ (Hapida Skynex) के प्रोटोटाइप का सफल उड़ान परीक्षण (Flight Test) करके इतिहास रच दिया है।

​इस सफलता के साथ ही भारत ने व्यक्तिगत हवाई परिवहन के क्षेत्र में एक नई और क्रांतिकारी दिशा में कदम बढ़ा दिया है।
​Army Helipad पर हुआ सफल परीक्षण, हवा में रहे 1 मिनट
​अल्मोड़ा स्थित आर्मी हेलीपैड पर आयोजित इस तकनीकी परीक्षण के दौरान ‘हपिडा स्काईनेक्स’ ने जैसे ही जमीन से हवा में उड़ान भरी, वहां मौजूद लोग दंग रह गए। वाहन ने लगभग एक मिनट तक हवा में स्थिर रहकर सफलता पूर्वक उड़ान भरी और निर्धारित तकनीकी मानकों को पूरा किया।


​इस ऐतिहासिक क्षण को देखने के लिए स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों की भारी भीड़ जमा हो गई थी। वाहन के सुरक्षित टेक-ऑफ और लैंडिंग के साथ ही ‘हपिडा स्काई प्राइवेट लिमिटेड’ के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ने अपना पहला और बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है।

​पूरी तरह स्वदेशी और इलेक्ट्रिक (eVTOL) तकनीक पर आधारित

​रवि टम्टा, जो ‘हपिडा स्काई प्राइवेट लिमिटेड’ के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) भी हैं, पिछले कई वर्षों से इस सपने को सच करने में जुटे थे।

•  ​ईको-फ्रेंडली ग्रीन टेक्नोलॉजी: ‘हपिडा स्काईनेक्स’ पूरी तरह से विद्युत चालित (Electric-Powered) है, जिससे इससे पर्यावरण को कोई नुकसान या प्रदूषण नहीं पहुँचता।
• ​लंबा अनुसंधान: वर्षों के कड़े अनुसंधान, तकनीकी परीक्षणों और अत्याधुनिक इंजीनियरिंग डिज़ाइन के बाद इस प्रोटोटाइप को तैयार किया गया है।
• ​सुरक्षा के मानक: परीक्षण के दौरान वाहन ने अपनी स्थिरता, सुरक्षा और उड़ान क्षमता का लोहा मनवाया, जिससे इस प्रोजेक्ट की व्यावहारिक उपयोगिता (Feasibility) साबित हो चुकी है।


​भविष्य की जरूरत: ट्रैफिक से राहत और आपदा प्रबंधन में मददगार

​विशेषज्ञों और एविएशन इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि ‘हपिडा स्काईनेक्स’ जैसी तकनीक आने वाले समय में परिवहन की परिभाषा बदल देगी। इसके बहुआयामी फायदे हैं:

1. ​शहरी यातायात (Traffic Gridlock) से मुक्ति: बड़े शहरों में दिन-ब-दिन बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने में ऐसे व्यक्तिगत हवाई वाहन (Flying Cars) रीढ़ की हड्डी साबित होंगे।
2. ​दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में कनेक्टिविटी: उत्तराखंड जैसे पहाड़ी और दूरस्थ राज्यों में जहाँ सड़कें बनाना चुनौतीपूर्ण होता है, वहाँ यह वाहन मिनटों में पहुंच सुनिश्चित कर सकता है।
3. ​आपदा एवं आपातकालीन सेवाएं (Medical & Disaster Relief): बाढ़, भूस्खलन या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान दवाइयां पहुँचाने, रेस्क्यू करने और एयर एम्बुलेंस के रूप में यह तकनीक अत्यंत कारगर साबित होगी।


​”भारत को हवाई परिवहन में आत्मनिर्भर बनाना ही लक्ष्य” – रवि टम्टा


​सफल उड़ान परीक्षण के बाद रवि टम्टा ने अपनी खुशी साझा करते हुए कहा:
“हमारा मुख्य उद्देश्य भारत को व्यक्तिगत हवाई परिवहन तकनीक (Personal Aerial Mobility) के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना है। ‘हपिडा स्काईनेक्स’ केवल एक शुरुआत है। आने वाले समय में हम इसके सुरक्षा फीचर्स, पेलोड क्षमता, बैटरी बैकअप और ओवरऑल परफॉर्मेंस को और बेहतर बनाने के लिए कई अन्य चरणों में उन्नत परीक्षण (Advanced Phase Testing) करेंगे।”

​बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं रवि: पहले भी कर चुके हैं अनोखे नवाचार


​रवि टम्टा के लिए नवाचार (Innovation) कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी वे समाज और प्रशासन की मदद के लिए कई अनोखे उपकरण बना चुके हैं:


• ​अग्निशमन यंत्र (Firefighting Drone/Device): जंगलों में लगने वाली भीषण आग (Forest Fire) पर काबू पाने के लिए उन्होंने वन विभाग के लिए विशेष उपकरण तैयार किया था।
• ​स्मार्ट स्टिक (Smart Cane for Divyang): दिव्यांगजनों (विशेषकर दृष्टिबाधितों) की सुगम आवाजाही के लिए उन्होंने सेंसर युक्त इलेक्ट्रॉनिक छड़ी का निर्माण किया था।

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​देश और प्रदेश के लिए गर्व का क्षण


​रवि टम्टा की यह सफलता केवल उत्तराखंड के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के लिए एक मिसाल है। एयरोस्पेस और एविएशन सेक्टर के विशेषज्ञ इसे भारतीय तकनीकी क्षमता का एक बड़ा मील का पत्थर मान रहे हैं।
​यदि इस प्रोजेक्ट को सरकारी प्रोत्साहन और व्यावसायिक निवेश (Investment) मिलता है, तो वह दिन दूर नहीं जब सड़कों के साथ-साथ भारत के आसमान में भी स्वदेशी उड़ने वाली कारें भर्राटे भरती नजर आएंगी।

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