Nomadic Elephant 2026: भारत और मंगोलिया की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास का नया संस्करण उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में शुरू हो गया है। पहाड़ी और अर्ध-शहरी इलाकों में संभावित आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए सैनिकों की संयुक्त क्षमता बढ़ाना इस अभ्यास का प्रमुख उद्देश्य है। अभ्यास के दौरान दोनों देशों के सैनिक एक-दूसरे के साथ मिलकर कई सामरिक गतिविधियों का प्रशिक्षण लेंगे।
मिली जानकारी के मुताबिक Nomadic Elephant 2026 का आयोजन 21 सितंबर से 3 अक्टूबर तक किया जा रहा है। इसमें भारत और मंगोलिया की सेनाओं के 45-45 जवान हिस्सा ले रहे हैं। यानी कुल 90 सैनिक इस संयुक्त प्रशिक्षण का हिस्सा हैं। दोनों देशों के बीच होने वाला यह वार्षिक प्लाटून स्तर का सैन्य अभ्यास आपसी सैन्य तालमेल और परिचालन क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित है।
पहाड़ों में आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन की तैयारी
Nomadic Elephant 2026 में पहाड़ी इलाकों की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ऐसे क्षेत्रों में सैनिकों को दुर्गम भूभाग, सीमित आवाजाही और बदलते परिचालन हालात के बीच अभियान चलाने की जरूरत पड़ सकती है।
अभ्यास के दौरान भारतीय और मंगोलियाई सैनिक संयुक्त राष्ट्र के जनादेश के अनुरूप संभावित अभियानों के लिए जरूरी प्रक्रियाओं और सामरिक तकनीकों का अभ्यास करेंगे। इसका एक महत्वपूर्ण उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय विकसित करना है, ताकि संयुक्त मिशन के दौरान सैनिक एक-दूसरे की कार्यप्रणाली और कमांड सिस्टम को बेहतर तरीके से समझ सकें।
ALSO READ THIS:Kerala Heavy Rain: केरल में बेमौसम बारिश से तबाही, बाढ़ और भूस्खलन में 6 की मौत, 6 जिलों में ऑरेंज अलर्ट
घेराबंदी से लेकर इमारतों में कार्रवाई तक होगी ट्रेनिंग
अभ्यास के दौरान सैनिकों को कई तरह के सामरिक अभ्यासों से गुजरना होगा। इनमें घेराबंदी और तलाशी अभियान यानी cordon and search operation प्रमुख हिस्सा होगा। इसके अलावा इमारतों में प्रवेश कर कार्रवाई करने और संदिग्ध इलाकों में ऑपरेशन संचालित करने जैसी परिस्थितियों का भी अभ्यास किया जाएगा।
पर्वतीय और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में किसी अभियान के दौरान जमीन की स्थिति तेजी से बदल सकती है। ऐसे में सैनिकों के बीच संचार, टीमवर्क और तेजी से निर्णय लेने की क्षमता महत्वपूर्ण होती है। Nomadic Elephant 2026 में इन्हीं पहलुओं को संयुक्त प्रशिक्षण के जरिए मजबूत करने पर जोर रहेगा।
हेलिबोर्न ऑपरेशन और आधुनिक तकनीक पर भी फोकस
इस संयुक्त अभ्यास में केवल पारंपरिक सैन्य रणनीतियों पर ही ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सैनिक विशेष हेलिबोर्न ऑपरेशन से जुड़ी प्रक्रियाओं का भी अभ्यास करेंगे। हेलिकॉप्टर के जरिए जवानों और संसाधनों को किसी निर्धारित क्षेत्र में पहुंचाना या वहां से निकालना चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में महत्वपूर्ण क्षमता हो सकती है।
इसके साथ ही साइबर सुरक्षा भी अभ्यास का हिस्सा है। आधुनिक सैन्य अभियानों में डिजिटल सिस्टम और संचार नेटवर्क की सुरक्षा लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। इसलिए दोनों देशों के सैनिक साइबर सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को भी समझेंगे।
ड्रोन के खतरे से निपटने की भी तैयारी
आज के सैन्य अभियानों में ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। निगरानी से लेकर सामरिक गतिविधियों तक ड्रोन कई तरह की भूमिका निभा सकते हैं। इसी को देखते हुए Nomadic Elephant 2026 में ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम से जुड़ी ट्रेनिंग भी शामिल की गई है।
सैनिकों को ड्रोन की पहचान, उसके संभावित इस्तेमाल और उसे रोकने वाली तकनीकों से जुड़े परिचालन पहलुओं का अभ्यास कराया जाएगा। इसका उद्देश्य बदलती तकनीकी चुनौतियों के बीच सैनिकों की तैयारी को बेहतर बनाना है।
एक-दूसरे की सैन्य रणनीति समझेंगे जवान
संयुक्त अभ्यास का एक अहम फायदा यह है कि दोनों देशों के सैनिक अपने अनुभव साझा कर सकते हैं। अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने वाली सेनाओं की ट्रेनिंग, रणनीति और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं में अंतर हो सकता है।
Nomadic Elephant 2026 के दौरान भारतीय और मंगोलियाई सैनिक साथ रहकर अभ्यास करेंगे। इससे उन्हें एक-दूसरे की रणनीति और प्रक्रियाओं को नजदीक से समझने का अवसर मिलेगा। वास्तविक परिस्थितियों जैसे अभ्यासों के जरिए संयुक्त अभियान के दौरान आपसी तालमेल बेहतर करने की कोशिश की जाएगी।
18वां संस्करण, लंबे समय से जारी है सैन्य सहयोग
भारत और मंगोलिया के बीच Nomadic Elephant एक वार्षिक प्लाटून स्तर का संयुक्त सैन्य अभ्यास है। इसे बारी-बारी से दोनों देशों में आयोजित किया जाता है। उपलब्ध आधिकारिक रक्षा रिकॉर्ड में भी Nomadic Elephant को भारत-मंगोलिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास के रूप में दर्ज किया गया है।
पिछला संस्करण मई-जून 2025 में मंगोलिया में आयोजित हुआ था। इस तरह दोनों सेनाओं के बीच यह अभ्यास केवल सैन्य प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि लगातार संपर्क और पेशेवर स्तर पर सहयोग बढ़ाने का माध्यम भी है।
भारत-मंगोलिया रक्षा सहयोग को मिलेगा नया आयाम
Nomadic Elephant 2026 ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब दोनों देशों की सेनाएं संयुक्त प्रशिक्षण के जरिए इंटरऑपरेबिलिटी यानी साथ मिलकर प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही हैं। संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों और अन्य बहुपक्षीय गतिविधियों में भी अलग-अलग देशों की सेनाओं के बीच तालमेल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मंगोलिया के साथ भारत का सैन्य सहयोग केवल इस एक अभ्यास तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के रक्षा संबंधों में नियमित सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण और पेशेवर संवाद शामिल हैं। 2026 में मंगोलिया में आयोजित बहुपक्षीय KHAAN QUEST अभ्यास में भी भारतीय सेना ने हिस्सा लिया था, जिसमें संयुक्त योजना, गश्त, घेराबंदी एवं तलाशी और चिकित्सा निकासी जैसे अभ्यास शामिल थे।
पिथौरागढ़ में पहाड़ी परिस्थितियों का मिलेगा वास्तविक अनुभव
पिथौरागढ़ जैसे पहाड़ी क्षेत्र में सैन्य अभ्यास करने से जवानों को कठिन भूभाग में ऑपरेशन की व्यावहारिक चुनौतियों को समझने का मौका मिलता है। ऊंचाई, संकरी जगहें और तेजी से बदलने वाला भूगोल सैनिकों के लिए अलग तरह की चुनौतियां पैदा करता है।
ऐसे माहौल में Nomadic Elephant 2026 दोनों देशों के जवानों के लिए अपने प्रशिक्षण को वास्तविक परिस्थितियों के करीब ले जाने का अवसर है। अभ्यास के अंत तक दोनों सेनाओं के बीच बेहतर सामंजस्य, सामरिक अनुभवों का आदान-प्रदान और संयुक्त अभियानों के लिए जरूरी तालमेल विकसित करना इसका प्रमुख लक्ष्य रहेगा।








