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Shubhanshu Shukla: इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंचे भारतीय एस्ट्रोनॉट, भारत के लिए गौरवपूर्ण क्षण

On: June 26, 2025 11:17 AM
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भारतीय अंतरिक्ष इतिहास में 26 जून 2025 का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष में कदम रखकर हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। शुभांशु और उनकी टीम Axiom Mission-4 के तहत 28 घंटे की रोमांचक अंतरिक्ष यात्रा पूरी कर 26 जून शाम 4 बजे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर सफलतापूर्वक पहुंचे।

इस ऐतिहासिक मौके पर शुभांशु ने स्पेसक्राफ्ट से जुड़ते ही कहा – “नमस्कार फ्रॉम स्पेस!” उनकी यह आवाज न सिर्फ स्पेस से आई, बल्कि हर भारतीय के दिल तक पहुंच गई। यह क्षण इसलिए भी खास है क्योंकि 1984 के बाद पहली बार किसी भारतीय ने अंतरिक्ष में कदम रखा है।

डॉकिंग हुई सफल, अब शुरू होगा 14 दिन का विज्ञान मिशन

ड्रैगन अंतरिक्ष यान ने 28 घंटे की यात्रा के बाद 26 जून को शाम 4 बजे ISS से सफलतापूर्वक डॉकिंग कर ली। डॉकिंग का मतलब है कि स्पेसक्राफ्ट अब ISS से पूरी तरह जुड़ चुका है और क्रू मेंबर स्टेशन के अंदर प्रवेश कर चुके हैं।

अब शुरू होगा मिशन का सबसे अहम हिस्सा – 14 दिनों का स्पेस स्टे, जिसमें शुभांशु शुक्ला और उनकी टीम 60 साइंटिफिक एक्सपेरिमेंट्स को अंजाम देंगे। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

अंतरिक्ष में मानव शरीर पर प्रभाव का अध्ययन

माइक्रोग्रैविटी में मेडिकल रिसर्च

नई स्पेस टेक्नोलॉजी का परीक्षण

यह मिशन अब तक के किसी भी Axiom मिशन में सबसे अधिक वैज्ञानिक प्रयोगों वाला होगा। इसके नतीजे भविष्य के मानव अंतरिक्ष अभियानों को दिशा देंगे, विशेषकर भारत के ‘गगनयान मिशन’ को।

मिशन में अब तक क्या-क्या हुआ?

25 जून दोपहर 12 बजे: शुभांशु शुक्ला Axiom-4 मिशन के तहत रवाना हुए।

26 जून शाम 4 बजे: अंतरिक्ष यान ने ISS से सफलतापूर्वक डॉकिंग की।

28 घंटे का सफर तय करने के बाद चारों एस्ट्रोनॉट्स ISS में दाखिल हुए।

मिशन को लॉन्च होने से पहले 6 बार टालना पड़ा, फिर भी टीम ने हौसला नहीं छोड़ा।

41 साल बाद फिर एक भारतीय अंतरिक्ष में

शुभांशु शुक्ला भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री बने हैं। उनसे पहले राकेश शर्मा ने 1984 में सोवियत संघ के मिशन से अंतरिक्ष यात्रा की थी। शुभांशु की यह यात्रा नासा और इसरो के सहयोग से संभव हो सकी, जो भविष्य में भारत के पहले पूर्ण मानव मिशन ‘गगनयान’ का मार्ग प्रशस्त करेगी।

हर भारतवासी के लिए गर्व की घड़ी

शुभांशु शुक्ला का यह साहसिक कदम भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं और वैज्ञानिक सोच का प्रतीक बन गया है। आज हर भारतीय गर्व से कह रहा है – हमारा एक और बेटा अब सितारों के बीच है!

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