ढाका/न्यूज़ डेस्क:
बांग्लादेश में वर्ष 2024 के हिंसक घटनाक्रम और सत्ता परिवर्तन के दो साल बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मीडिया से वर्चुअल बातचीत के ज़रिए अपनी चुप्पी तोड़ी है। अपने संबोधन में उन्होंने देश के मौजूदा हालात पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि वह जल्द ही अपने देश और जनता के बीच वापस लौटेंगी।
”यह वह बांग्लादेश नहीं, जिसे हमने बनाया था”
शेख हसीना ने कहा कि देश से दूर रहने के बावजूद वह अपने लोगों से कभी अलग नहीं हुईं। पिछले दो सालों के घटनाक्रमों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, “मैंने अपने प्यारे बांग्लादेश को पीड़ित होते देखा है। यह वह देश नहीं है जिसे हमने गढ़ा था और न ही यह वह बांग्लादेश है जिसके लिए 1971 में 30 लाख लोगों ने अपनी शहादत दी थी।”
2024 के आंदोलन को बताया पूर्व-नियोजित षड्यंत्र
जुलाई-अगस्त 2024 की हिंसा पर बात करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री ने दावा किया कि वह कोई साधारण या स्वतःस्फूर्त छात्र आंदोलन नहीं था।
• बातचीत से समाधान की कोशिश: हसीना के अनुसार, उनकी सरकार ने शुरुआत में ही शांतिपूर्वक, कानूनी और धैर्यपूर्ण तरीके से मांगों को हल करने की कोशिश की थी।
• हिंसक राजनीतिक हथियार: उन्होंने आरोप लगाया कि सुधारों की आड़ में एक संगठित समूह छात्रों के प्रदर्शन का इस्तेमाल बैलेट बॉक्स के बिना सत्ता हथियाने के लिए कर रहा था।
• अंतरिम सरकार पर हमला: शेख हसीना ने मुहम्मद यूनुस के पुराने बयानों का हवाला देते हुए कहा कि यूनुस ने खुद इसे एक सोची-समझी योजना और मास्टरमाइंड द्वारा संचालित आंदोलन माना था, जो इस पूरी सच्चाई को उजागर करता है।
शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने संयुक्त राष्ट्र और यूनुस शासन पर उठाए सवाल
इस दौरान शेख हसीना के पुत्र सजीब वाजेद ने भी 2024 की हिंसा में हुई मौतों के आंकड़ों और मौजूदा यूनुस सरकार के फैसलों पर गंभीर सवाल खड़े किए:
1. आंकड़ों में विरोधाभास: वाजेद ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र मौतों की संख्या 1,400 बता रहा है, जबकि आधिकारिक आंकड़ा 800 है। उन्होंने सवाल उठाया कि यह अतिरिक्त 600 लोग कौन हैं और UN को ये नाम कहाँ से मिले? उन्होंने दावा किया कि बार-बार पत्राचार के बावजूद UN नाम देने में असमर्थ रहा है।
2. ‘क्षतिपूर्ति विधेयक’ पर आपत्ति: वाजेद ने यूनुस सरकार द्वारा लाए गए क्षतिपूर्ति अध्यादेश (Indemnity Bill) की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को आम नागरिकों और पुलिसकर्मियों की हत्या के बावजूद कानूनी सुरक्षा देना मानवाधिकारों और न्याय के सभी मानकों का उल्लंघन है।
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मुख्य बिंदु:
▪ दो साल बाद मीडिया के सामने आईं बांग्लादेश की पूर्व PM शेख हसीना।
▪ 2024 के छात्र आंदोलन को बताया सोची-समझी राजनीतिक साजिश।
▪ शेख हसीना का बयान— “चाहे जो परिस्थितियां हों, मैं अपने लोगों के पास वापस जाऊंगी।”
▪ सजीब वाजेद ने यूनुस सरकार के ‘इंडेम्निटी बिल’ और UN के आंकड़ों पर खड़े किए गंभीर सवाल।