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Tukaram Mundhe FDA Action: 90 दिनों में 5-Star होटल से ढाबों तक सख्ती, आम लोगों के बीच क्यों बढ़ी लोकप्रियता?

On: August 22, 2026 5:44 AM
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Tukaram Mundhe FDA Action: Tukaram Mundhe leading Maharashtra FDA food safety action against hotels, restaurants and food businesses

Tukaram Mundhe FDA Action: महाराष्ट्र के Food and Drug Administration यानी FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे इन दिनों अपने सख्त प्रशासनिक रवैये को लेकर चर्चा में हैं। मई 2026 में FDA कमिश्नर का पद संभालने के बाद उन्होंने खाद्य सुरक्षा और साफ-सफाई से जुड़े नियमों के उल्लंघन पर लगातार कार्रवाई की है। होटल, रेस्टोरेंट, क्लब, वेयरहाउस और स्ट्रीट फूड कारोबारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई ने खाद्य उद्योग में हलचल पैदा कर दी है।

इसी वजह से सोशल मीडिया पर लोग उन्हें ‘सिंघम’ और आम आदमी का अफसर तक कह रहे हैं। हालांकि, तुकाराम मुंढे खुद इस तरह की तुलना से दूरी रखते हैं। उनका कहना है कि वह कोई ‘सिंघम’ नहीं हैं, बल्कि एक प्रशासनिक अधिकारी हैं और उनका काम यह सुनिश्चित करना है कि लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन मिले।

90 दिनों में FDA का बदला अंदाज

मई 2026 में FDA की जिम्मेदारी संभालने के बाद तुकाराम मुंढे ने खाद्य सुरक्षा को लेकर निरीक्षण और कार्रवाई का सिलसिला तेज किया। Tukaram Mundhe FDA Action की चर्चा इसलिए भी बढ़ी क्योंकि कार्रवाई सिर्फ छोटे दुकानदारों तक सीमित नहीं रही।

बड़े होटल, रेस्टोरेंट, क्लब और खाद्य कंपनियां भी FDA की जांच के दायरे में आईं। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले तीन महीनों में निरीक्षण के बाद महाराष्ट्र में कम से कम 10 होटल के लाइसेंस निलंबित किए गए। इससे खाद्य कारोबार से जुड़े लोगों के बीच यह संदेश गया कि नियमों की अनदेखी अब महंगी पड़ सकती है।

5-Star होटल से स्ट्रीट वेंडर तक सख्ती

तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में FDA की कार्रवाई का असर सड़क किनारे खाने-पीने वाले छोटे कारोबारियों से लेकर बड़े प्रतिष्ठानों तक दिखाई देने की बात कही जा रही है। साफ-सफाई, खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और सुरक्षित तरीके से खाना तैयार करने को लेकर कारोबारियों में सतर्कता बढ़ी है।

कुछ स्ट्रीट वेंडरों ने अखबार में खाना लपेटने की जगह फूड-ग्रेड पेपर का इस्तेमाल शुरू किया है। वहीं कई जगहों पर कर्मचारियों को हाइजीन और व्यक्तिगत स्वच्छता से जुड़े नियमों का पालन करते देखा जा रहा है।

खाद्य पदार्थों में कृत्रिम रंगों के इस्तेमाल को लेकर भी FDA की सख्ती चर्चा में है। खासतौर पर ऐसे खाद्य पदार्थों पर निगरानी बढ़ी है जिनमें मिलावट या असुरक्षित सामग्री का इस्तेमाल उपभोक्ताओं के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

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Domino’s से लेकर बड़े प्रतिष्ठानों तक पहुंची कार्रवाई

Tukaram Mundhe FDA Action की चर्चा उस समय और तेज हुई जब FDA की कार्रवाई कई बड़े और चर्चित प्रतिष्ठानों तक पहुंची। रिपोर्ट के अनुसार मुंबई के विलिंगडन क्लब, Domino’s, Instamart, Pizza Hut और Blinkit के कुछ गोदामों और अन्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया।

इसके अलावा मुंबई के पुराने और चर्चित खाद्य प्रतिष्ठानों पर भी कार्रवाई हुई। K. Rustom Ice Cream Parlour, Parsi Dairy, Shalimar और Rahmania जैसे प्रतिष्ठानों के लाइसेंस कुछ समय के लिए निलंबित किए जाने की बात सामने आई।

इन कार्रवाइयों ने यह संदेश देने की कोशिश की कि खाद्य सुरक्षा के नियम किसी छोटे या बड़े कारोबारी के लिए अलग नहीं हो सकते।

आम लोगों के बीच क्यों लोकप्रिय हुए तुकाराम मुंढे?

FDA कमिश्नर की कार्रवाई को लेकर खाद्य उद्योग के एक हिस्से में नाराजगी जरूर है, लेकिन आम उपभोक्ताओं के बीच उनकी छवि मजबूत हुई है। खासतौर पर मध्यम वर्ग और युवाओं के बीच उनकी सख्त कार्रवाई को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

8 अगस्त को पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम में भी उनकी लोकप्रियता दिखाई दी। कार्यक्रम में उनके पहुंचने पर लोगों ने तालियां बजाईं और कई लोगों ने उनका वीडियो बनाया। सोशल मीडिया पर भी लोग खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर उनकी कार्रवाई की सराहना कर रहे हैं।

लोगों का मानना है कि अगर होटल और रेस्टोरेंट में साफ-सफाई बेहतर होती है और खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर निगरानी रहती है, तो इसका सीधा फायदा ग्राहकों को मिलता है।

विधानसभा में उठा ट्रांसफर का मुद्दा

तुकाराम मुंढे की सख्त कार्रवाई के बीच उनके संभावित ट्रांसफर को लेकर भी राजनीतिक चर्चा हुई। महाराष्ट्र विधानसभा में एनसीपी-एसपी विधायक जितेंद्र आव्हाड ने उनके ट्रांसफर को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि ट्रांसफर के लिए बड़ी रकम जुटाई जा रही थी।

वहीं तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सदन में भरोसा दिलाया कि मुंढे का ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। अभिनेता परेश रावल ने भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से अपील की कि तुकाराम मुंढे को उनके मौजूदा विभाग में काम करने दिया जाए।

तुकाराम मुंढे का करियर पहले भी लगातार ट्रांसफर के कारण चर्चा में रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले दो दशकों में उनका करीब 25 बार तबादला हो चुका है।

पान मसाला विज्ञापनों पर भी नजर

खाद्य सुरक्षा के अलावा तुकाराम मुंढे ने पान मसाला और सरोगेट विज्ञापनों से जुड़े मामलों पर भी सख्त रुख दिखाया। फिल्मी सितारों को नोटिस भेजे जाने के बाद यह मामला भी चर्चा में आया।

शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने उनके काम की तारीफ करते हुए कहा कि खाद्य गुणवत्ता, साफ-सफाई और खान-पान के मानकों को बेहतर करना प्रशासन की सामान्य जिम्मेदारी होनी चाहिए।

सोशल मीडिया पर ‘सिंघम’ और ‘स्पाइडरमैन’ जैसे नाम

तुकाराम मुंढे की कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी तेजी से सामने आई हैं। कुछ यूजर्स ने उन्हें भ्रष्टाचार और मिलावट के खिलाफ लड़ने वाला अधिकारी बताया, तो कुछ ने उनके लिए ‘स्पाइडरमैन’ और ‘सिंघम’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।

कई लोगों ने महाराष्ट्र सरकार से यह भी अपील की कि उन्हें लंबे समय तक FDA में काम करने का अवसर दिया जाए। हालांकि, सोशल मीडिया की प्रतिक्रियाएं व्यक्तिगत राय हैं और इन्हें आधिकारिक जनमत नहीं माना जा सकता।

FDA की कार्रवाई से क्या बदला?

FDA अधिकारियों के मुताबिक विभाग पहले भी निरीक्षण और कार्रवाई करता रहा है, लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण इसकी क्षमता सीमित थी। मौजूदा दौर में निरीक्षकों और लैब तकनीशियनों के अतिरिक्त काम करने से कार्रवाई का दायरा बढ़ा है। शिकायतों की संख्या में भी बढ़ोतरी बताई जा रही है।

Tukaram Mundhe FDA Action का सबसे बड़ा असर यही है कि खाद्य सुरक्षा का मुद्दा आम लोगों की चर्चा में आ गया है। छोटे वेंडर से लेकर बड़े होटल तक अब साफ-सफाई, खाद्य गुणवत्ता और नियमों को लेकर ज्यादा सतर्क दिखाई दे रहे हैं।

तुकाराम मुंढे की लोकप्रियता का आधार सिर्फ उनकी सख्त छवि नहीं, बल्कि लोगों की यह उम्मीद है कि बाजार में मिलने वाला खाना सुरक्षित हो। आने वाले समय में FDA की कार्रवाई कितनी प्रभावी रहती है और खाद्य सुरक्षा के नियमों का पालन कितना स्थायी रूप से बढ़ता है, यह देखने वाली बात होगी।

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